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Shahjahanpur News: मानसून की शुरुआत में ही धंस रहीं करोड़ों की लागत से बनीं सड़कें
Fri, 05 Jul 2024 04:52 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Fri, 05 Jul 2024 04:52 AM IST
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घंटाघर के पास भरा गया गढ्डा। संवाद
शाहजहांपुर। मानसून की शुरुआत में ही शहर की नवनिर्मित सड़कों की गुणवत्ता की पोल खुल गई है। करोड़ों रुपये की लागत से बनाईं गईं सड़कों पर गड्ढे हो गए हैं। पीडब्ल्यूडी के अधिकारी सीवर लाइन की खोदाई और लीकेज के कारण सड़क धंसने की आड़ लेकर बचाव कर रहे हैं। बड़ा सवाल यह है कि जब सीवर लाइन डाले जाने की जानकारी थी तो फिर सड़क की मजबूती का ध्यान क्यों नहीं रखा गया? अचानक सड़क धंसने से हादसे की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता।
करीब तीन साल से शहर में सीवर लाइन डालने का काम चल रहा है। जिन सड़कों पर सीवर लाइन डालने का काम पूरा हो गया था, उनकी मरम्मत की जिम्मेदारी जल निगम ने लोक निर्माण विभाग को सौंप दीं। पीडब्ल्यूडी ने मुख्य रूप से शहर की तीन बड़ी सड़कों का निर्माण कराया। इनमें केरूगंज तिराहा से पीडब्ल्यूडी तिराहा तक 3.1 किमी लंबी सड़क को 2.86 करोड़ की लागत से, गर्रा नदी पुल से पुत्तूलाल चौराहा तक तीन किमी लंबी सड़क को 2.45 करोड़ से, घंटाघर से लाल इमली चौराहा होते हुए रेलवे स्टेशन तक 2.5 किमी सड़क को 2.38 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया।
लाल इमली चौराहे से रेलवे स्टेशन तक की सड़क अभी निर्माणाधीन है। करीब तीन माह पहले केरूगंज से पीडब्ल्यूडी तिराहा तक और गर्रा नदी पुल से केरूगंज तक सड़क डालने का काम पूरा हुआ। मानसून की पहली बारिश में ही सड़कें धंसने लगी हैं।
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केरूगंज में तिराहा के पास सड़क धंसने से बड़ा गड्ढा हो गया। हादसे से बचाव के लिए ट्रैफिक पुलिस को बैरिकेडिंग लगानी पड़ी। वहीं, अंटा चौराहा के पास गड्ढा धंसने से उसमें बृहस्पतिवार सुबह डीसीएम फंस गई। काफी मशक्कत के बाद डीसीएम को निकाला गया। इसके बाद गड्ढा भरा गया। वहीं, लाल इमली चौराहा से पहले घंटाघर की तरफ जाने वाली रोड पर भी सड़क धंसने से गड्ढा हो गया है।
सीवरलाइन लीकेज पर फोड़ा ठीकरा
पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का कहना है कि जिन स्थानों पर सीवर लाइन लीकेज हो रही है, वहां सड़क धंस रही है। इसकी जिम्मेदारी जल निगम की है। जल निगम के माध्यम से ही धंसने वाली सड़कों की मरम्मत कराई जा रही है। सवाल यह है कि जब सीवर लाइन डालने के बाद जल निगम ने मरम्मत कर दी थी तो फिर लीकेज क्यों हो रहा? पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को भी निर्माण के समय सीवर लाइन के ऊपर सड़क बनाते समय उसकी गुणवत्ता का ध्यान रखना चाहिए था। पीडब्ल्यूडी जल निगम पर ठीकरा फोड़कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है।
जिन स्थानों पर सीवर लाइन लीक हो रही है, वहीं पर सड़क धंस रही है। इसमें पीडब्ल्यूडी की कोई कमी नहीं है। यह जिम्मेदारी जल निगम की है। अगर सड़क कहीं पर बैठती है तो जल निगम उसकी मरम्मत कराए।
- महेंद्र पाल, एक्सईएन, प्रांतीय खंड, पीडब्ल्यूडी
जल निगम की ओर से सड़कों के गड्ढों को भरने के लिए मिट्टी डलवाई गई थी। इसके बाद सड़कों का निर्माण हुआ है। तकनीकी रूप से कहीं कमी होने के कारण सड़क धंस सकती है। ऐसा कुछ ही स्थानों पर हुआ है। लीकेज की समस्या के कारण ऐसा हुआ है तो उसको दिखवाकर सही करवा दिया जाएगा। - कपिल एम सिंह, एक्सईएन जल निगम
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करीब तीन साल से शहर में सीवर लाइन डालने का काम चल रहा है। जिन सड़कों पर सीवर लाइन डालने का काम पूरा हो गया था, उनकी मरम्मत की जिम्मेदारी जल निगम ने लोक निर्माण विभाग को सौंप दीं। पीडब्ल्यूडी ने मुख्य रूप से शहर की तीन बड़ी सड़कों का निर्माण कराया। इनमें केरूगंज तिराहा से पीडब्ल्यूडी तिराहा तक 3.1 किमी लंबी सड़क को 2.86 करोड़ की लागत से, गर्रा नदी पुल से पुत्तूलाल चौराहा तक तीन किमी लंबी सड़क को 2.45 करोड़ से, घंटाघर से लाल इमली चौराहा होते हुए रेलवे स्टेशन तक 2.5 किमी सड़क को 2.38 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया।
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लाल इमली चौराहे से रेलवे स्टेशन तक की सड़क अभी निर्माणाधीन है। करीब तीन माह पहले केरूगंज से पीडब्ल्यूडी तिराहा तक और गर्रा नदी पुल से केरूगंज तक सड़क डालने का काम पूरा हुआ। मानसून की पहली बारिश में ही सड़कें धंसने लगी हैं।
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केरूगंज में तिराहा के पास सड़क धंसने से बड़ा गड्ढा हो गया। हादसे से बचाव के लिए ट्रैफिक पुलिस को बैरिकेडिंग लगानी पड़ी। वहीं, अंटा चौराहा के पास गड्ढा धंसने से उसमें बृहस्पतिवार सुबह डीसीएम फंस गई। काफी मशक्कत के बाद डीसीएम को निकाला गया। इसके बाद गड्ढा भरा गया। वहीं, लाल इमली चौराहा से पहले घंटाघर की तरफ जाने वाली रोड पर भी सड़क धंसने से गड्ढा हो गया है।
सीवरलाइन लीकेज पर फोड़ा ठीकरा
पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का कहना है कि जिन स्थानों पर सीवर लाइन लीकेज हो रही है, वहां सड़क धंस रही है। इसकी जिम्मेदारी जल निगम की है। जल निगम के माध्यम से ही धंसने वाली सड़कों की मरम्मत कराई जा रही है। सवाल यह है कि जब सीवर लाइन डालने के बाद जल निगम ने मरम्मत कर दी थी तो फिर लीकेज क्यों हो रहा? पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को भी निर्माण के समय सीवर लाइन के ऊपर सड़क बनाते समय उसकी गुणवत्ता का ध्यान रखना चाहिए था। पीडब्ल्यूडी जल निगम पर ठीकरा फोड़कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है।
जिन स्थानों पर सीवर लाइन लीक हो रही है, वहीं पर सड़क धंस रही है। इसमें पीडब्ल्यूडी की कोई कमी नहीं है। यह जिम्मेदारी जल निगम की है। अगर सड़क कहीं पर बैठती है तो जल निगम उसकी मरम्मत कराए।
- महेंद्र पाल, एक्सईएन, प्रांतीय खंड, पीडब्ल्यूडी
जल निगम की ओर से सड़कों के गड्ढों को भरने के लिए मिट्टी डलवाई गई थी। इसके बाद सड़कों का निर्माण हुआ है। तकनीकी रूप से कहीं कमी होने के कारण सड़क धंस सकती है। ऐसा कुछ ही स्थानों पर हुआ है। लीकेज की समस्या के कारण ऐसा हुआ है तो उसको दिखवाकर सही करवा दिया जाएगा। - कपिल एम सिंह, एक्सईएन जल निगम

घंटाघर के पास भरा गया गढ्डा। संवाद