{"_id":"64121155458e3c1c2a061d04","slug":"rivers-will-not-be-polluted-now-sewage-treatment-plant-will-start-from-april-shahjahanpur-news-c-4-1-94614-2023-03-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shahjahanpur News: अब नहीं प्रदूषित होंगी नदियां, अप्रैल से चालू हो जाएगा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shahjahanpur News: अब नहीं प्रदूषित होंगी नदियां, अप्रैल से चालू हो जाएगा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
Thu, 16 Mar 2023 12:11 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Thu, 16 Mar 2023 12:11 AM IST
विज्ञापन
शाहजहांपुर। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का 95 प्रतिशत काम पूरा होने का दावा कार्यदायी संस्था जल निगम के अधिकारियों और प्रोजेक्ट मैनेजर ने किया है। उनका कहना है कि अप्रैल के अंत तक शत-प्रतिशत काम पूरा हो जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक 15 अप्रैल के बाद प्लांट से जल शोधन का कार्य शुरू हो जाएगा।
अमृत योजना के तहत 248 करोड़ रुपये की लागत से शहर में सीवर लाइन डालने के साथ ही मघई टोला स्थित अस्थायी गोशाला के पास सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का काम जून 2021 में शुरू किया गया था। जल निगम अधिकारियों का दावा है कि 95 प्रतिशत सिविल वर्क पूरा कर लिया गया है। अप्रैल के पहले सप्ताह में शत-प्रतिशत काम पूरा हो जाएगा। दूसरे सप्ताह में इलेक्ट्रिकल्स व मैकेनिकल कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद एसटीपी चालू किया जाएगा।
प्लांट का मैकेनिकल वर्क किया जा रहा है। इसके पूरा होने के बाद घरों से निकलने वाले गंदे पानी को सीवर लाइन के माध्यम से एसटीपी तक पहुंचाया जाएगा। इस पानी को शोधन करने के बाद खन्नौत नदी में छोड़ा जाएगा। इससे न सिर्फ नदियों को प्रदूषित होने से बचाया जा सकेगा बल्कि नालियों में बहने वाली गंदगी से भी राहत मिलेगी। योजना के तहत सीवर लाइन डालने के काम को मार्च 2023 तक पूरा करने का समय निर्धारित किया है। इसका लगभग 50 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। अब सीवर लाइन को कनेक्ट करने का काम किया जाएगा। 15 अप्रैल तक एसटीपी को शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
विज्ञापन
एसबीआर प्रणाली का होगा उपयोग
शहर में डाली गईं सीवर लाइनों से गंदा पानी एसटीपी तक पहुंचेगा। यहां उसे शुद्ध किया जाएगा। इसके बाद पानी को नदी में छोड़ा जाएगा। इसके लिए सीक्वेंसिंग बैच रिएक्टर (एसबीआर) प्रणाली का इस्तेमाल किया जाएगा। यह अपशिष्ट जल उपचार के लिए एक फिल-एंड-ड्रॉ एक्टिवेटेड स्लज सिस्टम है। इस प्रणाली में अपशिष्ट जल को एकल बैच रिएक्टर में जोड़ा जाता है। अवांछनीय घटकों को हटाने के लिए उपचारित किया जाता है।
-- -- -
एसटीपी के पानी का उपयोग करेगा रिलायंस
रोजा तापीय परियोजना में सीवर लाइन के पानी का इस्तेमाल किया जाएगा। परियोजना में 12 सौ मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाता है। गर्रा नदी से रोजाना 40 से 65 हजार किलोलीटर पानी परियोजना के लिए कोयला से भाप बनाने के लिए लिया जाता है। एसटीपी शुरू होने के बाद इससे निकलने वाले शोधित जल का इस्तेमाल परियोजना में होगा। हालांकि इसके लिए अलग से टेंडर होगा।
-- -- -
पानी को अल्ट्रावॉयलेट किरणों से किया जाएगा फिल्टर
एसटीपी पर सीवर के पानी को शुद्ध करने की प्रक्रिया के तहत अल्ट्रावॉयलेट किरणों से फिल्टर किया जाएगा। एसटीपी प्लांट से निकलने वाले सॉलिड वेस्ट को खेतों में खाद के रूप में प्रयोग किया जाएगा। इसके लिए सॉलिड वेस्ट का केक बनाकर रख लिया जाएगा। जब जरूरत होगी तो उपलब्ध करा दिया जाएगा।
एसटीपी को 15 अप्रैल तक चालू करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें 95 प्रतिशत सिविल वर्क पूरा हो गया है। वहीं सीवर लाइन के प्रथम चरण का काम 31 मार्च तक पूरा करना है। इसके तहत 50 प्रतिशत लाइन डाल दी गई है, उसको कनेक्ट करके चालू करना है। - कामेश्वर पांडेय, प्रोजेक्ट मैनेजर
विज्ञापन
अमृत योजना के तहत 248 करोड़ रुपये की लागत से शहर में सीवर लाइन डालने के साथ ही मघई टोला स्थित अस्थायी गोशाला के पास सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का काम जून 2021 में शुरू किया गया था। जल निगम अधिकारियों का दावा है कि 95 प्रतिशत सिविल वर्क पूरा कर लिया गया है। अप्रैल के पहले सप्ताह में शत-प्रतिशत काम पूरा हो जाएगा। दूसरे सप्ताह में इलेक्ट्रिकल्स व मैकेनिकल कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद एसटीपी चालू किया जाएगा।
विज्ञापन
प्लांट का मैकेनिकल वर्क किया जा रहा है। इसके पूरा होने के बाद घरों से निकलने वाले गंदे पानी को सीवर लाइन के माध्यम से एसटीपी तक पहुंचाया जाएगा। इस पानी को शोधन करने के बाद खन्नौत नदी में छोड़ा जाएगा। इससे न सिर्फ नदियों को प्रदूषित होने से बचाया जा सकेगा बल्कि नालियों में बहने वाली गंदगी से भी राहत मिलेगी। योजना के तहत सीवर लाइन डालने के काम को मार्च 2023 तक पूरा करने का समय निर्धारित किया है। इसका लगभग 50 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। अब सीवर लाइन को कनेक्ट करने का काम किया जाएगा। 15 अप्रैल तक एसटीपी को शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
विज्ञापन
एसबीआर प्रणाली का होगा उपयोग
शहर में डाली गईं सीवर लाइनों से गंदा पानी एसटीपी तक पहुंचेगा। यहां उसे शुद्ध किया जाएगा। इसके बाद पानी को नदी में छोड़ा जाएगा। इसके लिए सीक्वेंसिंग बैच रिएक्टर (एसबीआर) प्रणाली का इस्तेमाल किया जाएगा। यह अपशिष्ट जल उपचार के लिए एक फिल-एंड-ड्रॉ एक्टिवेटेड स्लज सिस्टम है। इस प्रणाली में अपशिष्ट जल को एकल बैच रिएक्टर में जोड़ा जाता है। अवांछनीय घटकों को हटाने के लिए उपचारित किया जाता है।
एसटीपी के पानी का उपयोग करेगा रिलायंस
रोजा तापीय परियोजना में सीवर लाइन के पानी का इस्तेमाल किया जाएगा। परियोजना में 12 सौ मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाता है। गर्रा नदी से रोजाना 40 से 65 हजार किलोलीटर पानी परियोजना के लिए कोयला से भाप बनाने के लिए लिया जाता है। एसटीपी शुरू होने के बाद इससे निकलने वाले शोधित जल का इस्तेमाल परियोजना में होगा। हालांकि इसके लिए अलग से टेंडर होगा।
पानी को अल्ट्रावॉयलेट किरणों से किया जाएगा फिल्टर
एसटीपी पर सीवर के पानी को शुद्ध करने की प्रक्रिया के तहत अल्ट्रावॉयलेट किरणों से फिल्टर किया जाएगा। एसटीपी प्लांट से निकलने वाले सॉलिड वेस्ट को खेतों में खाद के रूप में प्रयोग किया जाएगा। इसके लिए सॉलिड वेस्ट का केक बनाकर रख लिया जाएगा। जब जरूरत होगी तो उपलब्ध करा दिया जाएगा।
एसटीपी को 15 अप्रैल तक चालू करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें 95 प्रतिशत सिविल वर्क पूरा हो गया है। वहीं सीवर लाइन के प्रथम चरण का काम 31 मार्च तक पूरा करना है। इसके तहत 50 प्रतिशत लाइन डाल दी गई है, उसको कनेक्ट करके चालू करना है। - कामेश्वर पांडेय, प्रोजेक्ट मैनेजर