फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shahjahanpur News ›   Relief to flour and rice mills due to abolition of mandi fee

Shahjahanpur News: मंडी शुल्क खत्म होने से आटा और चावल की मिलों को राहत

Sun, 29 Jan 2023 11:42 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 29 Jan 2023 11:42 PM IST
विज्ञापन
Relief to flour and rice mills due to abolition of mandi fee
बरेली मोड़ स्थित एक होटल में पत्रकारों से वार्ता करते राइस मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी।
सरकार के फैसले का खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े उद्यमियों ने किया स्वागत
विज्ञापन

खाद्य प्रसंस्करण आधारित उद्योगों पर अब तक लागू था 1.5 फीसदी मंडी शुल्क
शाहजहांपुर। आटा और चावल मिलों समेत खाद्य प्रसंस्करण आधारित उद्योगों पर लागू 1.5 प्रतिशत मंडी शुल्क खत्म होने का मिल मालिकों ने स्वागत किया है। मिल मालिकों ने प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना और मुख्यमंत्री का आभार जताया गया।
इस संबंध में यूपी फ्लोर मिलर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रामचंद्र सिंघल, राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेश सिंघल और लघु उद्योग भारती के जिलाध्यक्ष राकेश अग्रवाल ने रविवार को एक होटल में पत्रकार वार्ता की।
विज्ञापन

उद्यमी रामचंद्र सिंघल ने बताया कि प्रदेश में करीब 800 राइस मिलें हैं। जनपद में इनकी संख्या 140 है, लेकिन उनमें सिर्फ 80 मिलें चालू हालत में हैं। इसी तरह प्रदेश की 370 फ्लोर मिलों में करीब 50 मिलें बंद हैं। जो चालू हालत में हैं, उनमें भी मुश्किल से 10-15 फीसदी पूरी क्षमता से चल रही हैं। मिलों की यह हालत उन पर मंडी शुल्क थोपे जाने के कारण हुई थी। मंडी शुल्क खत्म होने से मिलों को कच्चा माल (गेहूं, धान आदि) खरीदने पर टैक्स नहीं चुकाना होगा। इससे किसानों समेत व्यापारियों का मंडी शुल्क चालान के नाम पर शोषण भी थमेगा और मिल मालिक किसानों को ज्यादा भाव देकर खरीद कर सकेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

कृषि कानून वापस लिए जाने पर प्रदेश सरकार ने दोबारा मंडी शुल्क लागू कर दिया था। तभी से वह वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के माध्यम से सरकार के संपर्क में थे। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को लेकर वित्त मंत्री ने गत 23 जनवरी को उनकी मुख्यमंत्री से भेंटवार्ता कराई थी। मुख्यमंत्री ने मंडी शुल्क हटाने की मांग को गंभीरता से लिया।
रामचंद सिंघल ने कहा कि मंडी शुल्क से सरकार को 350 करोड़ रुपये राजस्व मिलता था, जिसमें निजी क्षेत्र की मिलों से केवल 150 करोड़ रुपये अर्जित होते थे। इसलिए सरकार पर इस फैसले से ज्यादा वित्तीय बोझ भी नहीं पड़ेगा। लघु उद्योग भारती के जिलाध्यक्ष राकेश अग्रवाल ने कहा कि इस निर्णय से न केवल आटा और चावल मिलें, बल्कि दाल, तेल मिल आदि खाद्य वस्तुओं की सभी निर्माता इकाइयों को लाभ होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मिलों में तैयार खाद्य वस्तुओं के मंडी के माध्यम से विक्रय पर मंडी शुल्क पूर्ववत लागू रहेगा।

सरकार का फैसला जीरो टालरेंस नीति का प्रमाण: डॉ. सुधीर
पत्रकार वार्ता में राइस मिलर के नाते मौजूद एमएलसी डॉ. सुधीर गुप्ता ने सरकार के इस फैसले को सरकार की जीरो टालरेंस नीति और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का प्रमाण बताते हुए कहा कि इससे न केवल किसानों बल्कि उद्यमियों और व्यापारियों को भी मंडी शुल्क वसूली की आड़ में होने वाले शोषण से निजात मिल जाएगी। उन्होंने बताया कि गत वर्ष पुवायां क्षेत्र के सिमरा वीरान गोसदन का निरीक्षण करने आए मुख्यमंत्री को उन्होंने ज्ञापन देकर मंडी शुल्क खत्म करने का अनुरोध किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed