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रिकवरी के विरोध में लामबंद हो रहे वीडीओ
जलालाबाद।
Updated Fri, 08 May 2015 11:10 PM IST
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क्षेत्र की 28 ग्राम पंचायतों में मनमाने तरीके से खर्च की गई मनरेगा की धनराशि की रिकवरी के आदेश से विकास विभाग में हड़कंप है। रिकवरी के विरोध में ग्राम विकास अधिकारियों, रोजगार सेवकों और तकनीकी सहायकों ने शुक्रवार से मनरेगा से जुड़े कार्यों का बहिष्कार शुरू कर दिया। उधर, ग्राम प्रधान संगठन ने भी इस कार्रवाई पर विरोध जताते हुए इन लोगों का समर्थन करने की घोषणा की है। ग्राम विकास और ग्राम पंचायत अधिकारी संघ ने इस संबंध में सीडीओ से मिलकर उन्हें ज्ञापन भी दिया है।
इस संबंध में ग्राम विकास अधिकारी संघ के ब्लाक अध्यक्ष मोहम्मद इलियास ने बताया कि जांच के दायरे में आई सभी ग्राम पंचायतों में विकास कार्य कराए गए हैं। ऐसे में धांधली का आरोप लगाकर रिकवरी के आदेश जारी करना पूरी तरह गलत है। बताया कि ग्राम पंचायतों में राजनीतिक दबाव में काम कराना उनकी मजबूरी थी। बताया कि इस प्रकरण में सही निर्णय न होने तक मनरेगा से जुड़े कार्य नहीं करेंगे।
उधर, रोजगार सेवकों और तकनीकी सहायकों ने भी मनरेगा से जुड़े कार्यों का बहिष्कार शुरू कर दिया है। इसको लेकर ग्राम पंचायत अधिकारी संघ के जिलाध्यक्ष विजय सिंह तोमर के नेतृत्व में सीडीओ को ज्ञापन देकर इस मामले में किए जाने वाले उत्पीड़न को रोके जाने की मांग की गई है।
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प्रधान संगठन भी करेगा समर्थन
प्रधान संगठन के ब्लाक अध्यक्ष अभिषेक सिंह ने बताया कि इस मामले को लेकर प्रधान संघ की बैठक में निर्णय लिया गया है कि उक्त मामले में सभी प्रधान ग्राम पंचायत अधिकारियों का समर्थन करेंगे और उक्त आदेश वापस न लिया गया तो वे लोग आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे।
क्या है मामला
क्षेत्र की 28 ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना के तहत कराए गए कार्यों के दौरान शासन द्वारा निर्धारित 60:40 अनुपात का पालन न करके मनमाने तरीके से खर्च की गई धनराशि का आरोप जांच में सही पाए जाने के बाद उक्त ग्राम पंचायतों के ग्राम विकास अधिकारी, रोजगार सेवकों, ग्राम प्रधानों और तकनीकी सहायकों से करीब 72 लाख की धनराशि की रिकवरी किए जाने के आदेश हुए है।
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इस संबंध में ग्राम विकास अधिकारी संघ के ब्लाक अध्यक्ष मोहम्मद इलियास ने बताया कि जांच के दायरे में आई सभी ग्राम पंचायतों में विकास कार्य कराए गए हैं। ऐसे में धांधली का आरोप लगाकर रिकवरी के आदेश जारी करना पूरी तरह गलत है। बताया कि ग्राम पंचायतों में राजनीतिक दबाव में काम कराना उनकी मजबूरी थी। बताया कि इस प्रकरण में सही निर्णय न होने तक मनरेगा से जुड़े कार्य नहीं करेंगे।
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उधर, रोजगार सेवकों और तकनीकी सहायकों ने भी मनरेगा से जुड़े कार्यों का बहिष्कार शुरू कर दिया है। इसको लेकर ग्राम पंचायत अधिकारी संघ के जिलाध्यक्ष विजय सिंह तोमर के नेतृत्व में सीडीओ को ज्ञापन देकर इस मामले में किए जाने वाले उत्पीड़न को रोके जाने की मांग की गई है।
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प्रधान संगठन भी करेगा समर्थन
प्रधान संगठन के ब्लाक अध्यक्ष अभिषेक सिंह ने बताया कि इस मामले को लेकर प्रधान संघ की बैठक में निर्णय लिया गया है कि उक्त मामले में सभी प्रधान ग्राम पंचायत अधिकारियों का समर्थन करेंगे और उक्त आदेश वापस न लिया गया तो वे लोग आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे।
क्या है मामला
क्षेत्र की 28 ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना के तहत कराए गए कार्यों के दौरान शासन द्वारा निर्धारित 60:40 अनुपात का पालन न करके मनमाने तरीके से खर्च की गई धनराशि का आरोप जांच में सही पाए जाने के बाद उक्त ग्राम पंचायतों के ग्राम विकास अधिकारी, रोजगार सेवकों, ग्राम प्रधानों और तकनीकी सहायकों से करीब 72 लाख की धनराशि की रिकवरी किए जाने के आदेश हुए है।