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गन्ने का बकाया भुगतान को लेकर बजाज मिल के खिलाफ जारी होगी आरसी
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शाहजहांपुर। प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग) संजय आर भूसरेड्डी ने सभी चीनी मिलों में एक से पांच नवंबर के बीच नया पेराई सत्र शुरू कराने के आदेश दिए हैं। इससे पहले 30 अक्तबूर तक चीनी मिलों को किसानों के बकाया गन्ने का भुगतान करना है। जिले की पांचों चीनी मिल अभी तक किसानों को पिछले पेराई सत्र 2019-20 के गन्ने का 2.53 अरब रुपये भुगतान अभी तक नहीं कर सकी हैं। सबसे ज्यादा 1.45 अरब रुपये बजाज ग्रुप की मकसूदापुर मिल पर बकाया है। हालांकि, मिल अपने ग्रुप की अन्य मिलों के वित्तीय सहयोग से किसानों को प्रतिदिन औसतन एक से 1.25 करोड़ रुपये का भुगतान भेज रही है, लेकिन मुख्यमंत्री के आदेशानुसार मिल प्रबंधन 30 अक्तूबर तक संपूर्ण भुगतान चुकता करने की स्थिति में नहीं है। इसे देखते प्रशासन ने गन्ना मूल्य की भू राजस्व की तर्ज पर वसूली कराने के लिए इस मिल को आरसी जारी करने का निर्णय किया है।
पहले बंद होने पर भी भुगतान में मिल फिसड्डी
इस बार गन्ना रकबा करीब 1900 हेक्टेयर बढ़कर 94064 हेक्टेयर होने से पेराई कार्य भी मई 2021 के अंतिम सप्ताह तक खिंचने के आसार हैं। इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए अपर मुख्य सचिव ने नया पेराई सत्र समय से पूरा कराने के लिए पेराई कार्य हर हाल में नवंबर के पहले सप्ताह से शुरू कराने के आदेश दिए हैं। आमतौर पर पेराई कार्य पूरा करने के बाद मिल प्रबंधन सारा ध्यान गन्ना के बकाया भुगतान पर केंद्रित करता है, लेकिन बजाज ग्रुप के अधिकारी मकसूदापुर मिल पर किसानों की देनदारी अभी तक चुकता नहीं करा सके, जबकि इस मिल में पेराई सत्र का समापन जिले की अन्य चारों मिलों की तुलना में सबसे पहले 16 अप्रैल को हुआ। इसके बावजूद यह मिल अभी तक केवल 47.17 फीसदी भुगतान कर किसानों की देनदारी निपटाने में फिसड्डी साबित हुई। इसकेे विपरीत दो मई को बिरला ग्रुप की रोजा मिल (अवध शुगर मिल) बंद हुई, लेकिन किसानों को भुगतान (97.07 फीसदी) में सबसे आगे रही।
प्रशासन के कब्जे में मिल का चीनी स्टॉक
बजाज मिल की लचर भुगतान स्थित को देखते वहां के गोदामों मेें चीनी का स्टॉक प्रशासन ने दो माह पहले ही सीज कर उसे अपने कब्जे मेें ले रखा है। इसी स्टॉक से किसानों को लॉकडाउन लागू होने पर आंशिक भुगतान कराने की गरज से प्रति माह एक-एक क्विंटल चीनी उपलब्ध कराई गई। 15 अगस्त तक प्रभावी रही इस योजना के बाद प्रशासन अपनी निगरानी में चीनी की बिकवाली कराकर उससे प्राप्त होने वाली 85 फीसदी धनराशि से किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान कराया जा रहा है। संपूर्ण भुगतान कराने में यह व्यवस्था भी ज्यादा कारगर साबित नहीं हो रही, क्योंकि बाजार में छाई मंदी के कारण चीनी के थोक ग्राहक भी ज्यादा नहीं मिल रहे। इसीलिए किसानों की देनदारी चुकता कराने के लिए मकसूदापुर मिल को आरसी जारी कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
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जिले की दोनों सहकारी मिलों (तिलहर एवं पुवायां) को पैकेज के तौर पर आर्थिक सहायता मिलेगी। रोजा और निगोही मिलें 30 अक्तूबर से पहले संपूर्ण भुगतान करने की स्थिति में हैं, लेकिन बजाज ग्रुप की मकसूदापुर मिल पर अब सख्ती की जाएगी। डीएम को पत्र भेजकर इस मिल के खिलाफ आरसी जारी कराने की अनुमति मांगी गई है।
- डॉ. खुशीराम भार्गव, जिला गन्ना अधिकारी
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पहले बंद होने पर भी भुगतान में मिल फिसड्डी
इस बार गन्ना रकबा करीब 1900 हेक्टेयर बढ़कर 94064 हेक्टेयर होने से पेराई कार्य भी मई 2021 के अंतिम सप्ताह तक खिंचने के आसार हैं। इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए अपर मुख्य सचिव ने नया पेराई सत्र समय से पूरा कराने के लिए पेराई कार्य हर हाल में नवंबर के पहले सप्ताह से शुरू कराने के आदेश दिए हैं। आमतौर पर पेराई कार्य पूरा करने के बाद मिल प्रबंधन सारा ध्यान गन्ना के बकाया भुगतान पर केंद्रित करता है, लेकिन बजाज ग्रुप के अधिकारी मकसूदापुर मिल पर किसानों की देनदारी अभी तक चुकता नहीं करा सके, जबकि इस मिल में पेराई सत्र का समापन जिले की अन्य चारों मिलों की तुलना में सबसे पहले 16 अप्रैल को हुआ। इसके बावजूद यह मिल अभी तक केवल 47.17 फीसदी भुगतान कर किसानों की देनदारी निपटाने में फिसड्डी साबित हुई। इसकेे विपरीत दो मई को बिरला ग्रुप की रोजा मिल (अवध शुगर मिल) बंद हुई, लेकिन किसानों को भुगतान (97.07 फीसदी) में सबसे आगे रही।
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प्रशासन के कब्जे में मिल का चीनी स्टॉक
बजाज मिल की लचर भुगतान स्थित को देखते वहां के गोदामों मेें चीनी का स्टॉक प्रशासन ने दो माह पहले ही सीज कर उसे अपने कब्जे मेें ले रखा है। इसी स्टॉक से किसानों को लॉकडाउन लागू होने पर आंशिक भुगतान कराने की गरज से प्रति माह एक-एक क्विंटल चीनी उपलब्ध कराई गई। 15 अगस्त तक प्रभावी रही इस योजना के बाद प्रशासन अपनी निगरानी में चीनी की बिकवाली कराकर उससे प्राप्त होने वाली 85 फीसदी धनराशि से किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान कराया जा रहा है। संपूर्ण भुगतान कराने में यह व्यवस्था भी ज्यादा कारगर साबित नहीं हो रही, क्योंकि बाजार में छाई मंदी के कारण चीनी के थोक ग्राहक भी ज्यादा नहीं मिल रहे। इसीलिए किसानों की देनदारी चुकता कराने के लिए मकसूदापुर मिल को आरसी जारी कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
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जिले की दोनों सहकारी मिलों (तिलहर एवं पुवायां) को पैकेज के तौर पर आर्थिक सहायता मिलेगी। रोजा और निगोही मिलें 30 अक्तूबर से पहले संपूर्ण भुगतान करने की स्थिति में हैं, लेकिन बजाज ग्रुप की मकसूदापुर मिल पर अब सख्ती की जाएगी। डीएम को पत्र भेजकर इस मिल के खिलाफ आरसी जारी कराने की अनुमति मांगी गई है।
- डॉ. खुशीराम भार्गव, जिला गन्ना अधिकारी