{"_id":"6a650d529a9322661e059c9b","slug":"ramesh-chandra-made-the-supreme-sacrifice-in-the-kargil-war-shahjahanpur-news-c-122-1-sbly1036-180000-2026-07-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shahjahanpur News: कारगिल युद्ध में रमेश चंद्र ने दिया था सर्वाेच्च बलिदान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shahjahanpur News: कारगिल युद्ध में रमेश चंद्र ने दिया था सर्वाेच्च बलिदान
विज्ञापन
शाहजहांपुर। कारगिल विजय दिवस पर पूरा देश 1999 के उन वीर सैनिकों को नमन कर रहा है, जिन्होंने दुर्गम पहाड़ियों पर दुश्मन को परास्त कर तिरंगे की आन-बान-शान कायम रखी। शाहजहांपुर भी इस गौरवशाली इतिहास का साक्षी है। जिले के मदनापुर क्षेत्र के गांव काबिलपुर निवासी सिपाही रमेश चंद्र ने कारगिल युद्ध में सर्वोच्च बलिदान देकर मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। इसी क्रम में रविवार को कारगिल युद्ध में जिले के रहने वाले सैनिकों को आज सम्मानित किया जाएगा।
रमेश चंद्र का जन्म 20 अक्तूबर 1971 को हुआ था। वह जाट रेजीमेंट में भर्ती हुए और कारगिल युद्ध के दौरान 12 जून 1999 को बहादुरी से लड़ते हुए बलिदान हो गए थे। उनके बलिदान ने शाहजहांपुर का नाम पूरे देश में गौरवान्वित किया। उनकी स्मृति में गांव काबिलपुर में प्रतिमा और स्मारक स्थापित है। साथ ही शहर में आवास विकास में उनके नाम पर पार्क की स्थापना की गई है।
कारगिल युद्ध में रमेश चंद्र अकेले नहीं थे। शाहजहांपुर के कई वीर सैनिकों ने दुश्मन से लोहा लिया। ये आज भी उस युद्ध की यादों को गर्व के साथ साझा करते हैं। उनका कहना है कि भारतीय सैनिकों का साहस, अनुशासन और देशभक्ति ही विजय का सबसे बड़ा आधार था।
विज्ञापन
शहर के बाबूजई मोहल्ले के रहने वाले छविनाथ श्रीलंका में गई शांति सेना के दो साल तक हिस्सा रहे थे। 1999 में वह कारगिल के तुरतुक सेक्टर में 12 जाट रेजीमेंट बटालियन में पोस्टेड थे। उन्होंने बताया कि मई में अचानक पाकिस्तानी सैनिकों ने पेट्रोलिंग पार्टी पर हमला कर दिया था। इसके बाद वह और उनके साथी सैनिक अपनी पोस्ट की रक्षा करने के साथ ही दुश्मनों को कड़ा जवाब देते रहे। अंत में दुश्मन को पीछे धकेलकर कारगिल की बर्फ से ढकी चोटियों पर तिरंगा फहरा दिया था।
--
इनका होगा सम्मान
जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास कार्यालय में ऑपरेशन कारगिल विजय में हिस्सा लेने वाले सैनिकों को सम्मानित किया जाएगा। इनमें वीरगति प्राप्त सैनिक रमेश चंद्र की पत्नी सुनीता देवी के साथ ही सूबेदार छविनाथ, हवलदार कलियान, ऑनरेरी कैप्टन पप्पू सिंह यादव, हवलदार कमलेश यादव, हवलदार नन्हेंलाल शर्मा, सूबेदार एसबी यादव, सूबेदार धर्मानंद, हवलदार नरेंद्र सिंह शामिल हैं। यह जानकारी जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी धनंजय प्रसाद सिंह ने दी।
विज्ञापन
रमेश चंद्र का जन्म 20 अक्तूबर 1971 को हुआ था। वह जाट रेजीमेंट में भर्ती हुए और कारगिल युद्ध के दौरान 12 जून 1999 को बहादुरी से लड़ते हुए बलिदान हो गए थे। उनके बलिदान ने शाहजहांपुर का नाम पूरे देश में गौरवान्वित किया। उनकी स्मृति में गांव काबिलपुर में प्रतिमा और स्मारक स्थापित है। साथ ही शहर में आवास विकास में उनके नाम पर पार्क की स्थापना की गई है।
विज्ञापन
कारगिल युद्ध में रमेश चंद्र अकेले नहीं थे। शाहजहांपुर के कई वीर सैनिकों ने दुश्मन से लोहा लिया। ये आज भी उस युद्ध की यादों को गर्व के साथ साझा करते हैं। उनका कहना है कि भारतीय सैनिकों का साहस, अनुशासन और देशभक्ति ही विजय का सबसे बड़ा आधार था।
विज्ञापन
शहर के बाबूजई मोहल्ले के रहने वाले छविनाथ श्रीलंका में गई शांति सेना के दो साल तक हिस्सा रहे थे। 1999 में वह कारगिल के तुरतुक सेक्टर में 12 जाट रेजीमेंट बटालियन में पोस्टेड थे। उन्होंने बताया कि मई में अचानक पाकिस्तानी सैनिकों ने पेट्रोलिंग पार्टी पर हमला कर दिया था। इसके बाद वह और उनके साथी सैनिक अपनी पोस्ट की रक्षा करने के साथ ही दुश्मनों को कड़ा जवाब देते रहे। अंत में दुश्मन को पीछे धकेलकर कारगिल की बर्फ से ढकी चोटियों पर तिरंगा फहरा दिया था।
इनका होगा सम्मान
जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास कार्यालय में ऑपरेशन कारगिल विजय में हिस्सा लेने वाले सैनिकों को सम्मानित किया जाएगा। इनमें वीरगति प्राप्त सैनिक रमेश चंद्र की पत्नी सुनीता देवी के साथ ही सूबेदार छविनाथ, हवलदार कलियान, ऑनरेरी कैप्टन पप्पू सिंह यादव, हवलदार कमलेश यादव, हवलदार नन्हेंलाल शर्मा, सूबेदार एसबी यादव, सूबेदार धर्मानंद, हवलदार नरेंद्र सिंह शामिल हैं। यह जानकारी जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी धनंजय प्रसाद सिंह ने दी।