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शेल्टर होम में क्वारंटीन लोग खेतों में काट रहे गेहूं
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पुवायां/मिर्जापुर। कोरोना का संक्रमण खतरनाक स्तर न पहुंचे इसलिए जिला प्रशासन ने ग्राम पंचायत स्तर पर शेल्टर होम बनाकर बाहर से आने वालों को क्वारंटीन करने की व्यवस्था की है। मगर इस व्यवस्था पर बदहाली और लापरवाही हावी हो गई है, जिसके चलते कागजों में क्वारंटीन किए लोग खेतों में गेहूं काटने के साथ ही गांवों में घूमकर दूसरों के लिए भी खतरा पैदा करते हैं। कई गांवों में हालात यह हैं कि दिनभर तो लोग शेल्टर होम में रहते हैं और अंधेरा होते ही घर चले जाते हैं। इसके पीछे एक बड़ी शेल्टर होम की बदइंतजामी भी है।
मिर्जापुर की ग्राम पंचायत नरौरा में दस लोगों को क्वारंटीन में रहने को कहा गया था। शेल्टर होम में इनमें से आठ लोग ही बचे हैं और ये भी खेतों में गेहूं की फसल की कटाई कर रहे हैं। गांववालों को कहना है कि जब भी कोई अधिकारी आता है तो ये लोग वापस आ जाते हैं। अधिकारी के जाते ही फिर खेतों में पहुंच जाते हैं।
रात में घर चले जाते हैं शेल्टर होम में रखे गए लोग
बंडा। क्षेत्र के गांव कढ़रेचौरा के प्राथमिक स्कूल में बनाए गए शेल्टर होम में हरियाणा से आए गांव के 26 श्रमिकों को रखा गया है। यह श्रमिक 29 मार्च को गांव आए थे और 31 मार्च से इनको शेल्टर होम में रखा गया है। दिन में श्रमिक शेल्टर होम में मौजूद मिले। कुछ श्रमिकों ने बताया कि स्कूल में मच्छरों की भरमार है, रात भर नींद नहीं आती। तीन दिन में सिर्फ एक दिन यूपी-112 पुलिस खाना दे गई थी, इस वजह से उन्हें भूखा रहना पड़ता है। वहीं, प्रधान संतोष राठौर ने बताया कि स्कूल में सभी व्यवस्थाएं कराई गई हैं लेकिन श्रमिक रात में घरों को चले जाते हैं और सुबह खाना खाने आ जाते हैं।
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बसंतापुर में 15 लोग क्वरंटीन
मझिगवां। गांव बसंतापुर में देहरादून से 11, दिल्ली व नेपाल से एक-एक और उत्तराखंड से दो लोग आए हैं। सभी को गांव के स्कूल में बने शिविर में रखा गया है। प्रधान संजीव पटेल ने बताया कि बाहर से आया कोई भी व्यक्ति घरों में नहीं रह रहा है। स्कूल में रहने वालों के भोजन आदि की उचित व्यवस्था है।
बाहर से आए 13 लोगों ने घरों में जमाया डेरा
पुवायां। गांव जुझारपुर में गैर प्रांतों से आए 22 लोग स्कूल में बने शिविर में रह रहे हैं। इसके अलावा बाहर से आए 13 अन्य लोगों ने शिविर में रुकने से इनकार कर दिया और ये लोग अपने घरों में रह रहे हैं। प्रधान अवध किशोर त्रिवेदी ने बताया कि दो से तीन लोग रात में अपने घर चले जाते हैं। शेष लोग स्कूल में ही रहते हैं। शिविर में दो समय भोजन और दो समय चाय दी जाती है।
शिविर में रहने को तैयार नहीं लोग
बंडा। गावं सैदापुर के स्कूल में बने शिविर में बाहर से आए गांव के 23 लोगों को रखा गया है। स्कूल में रखे गए लोग सामाजिक दूरी का ख्याल नहीं रख रहे हैं और पास ही बैठते हैं। ऐसे में यदि कोई भी व्यक्ति बीमार हुआ तो अन्य लोगों में भी बीमारी फैलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। उधर पड़रिया दलेलपुर गांव में बाहर से आए 33 लोगों में केवल 20 लोग ही स्कूल में रह रहे हैं। प्रधान वीरपाल ने बताया कि 13 लोग शिविर में रहने को तैयार नहीं हैं। प्रशासन को सूचना दे दी है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने की जांच
पुवायां। गांव जलालपुर के स्कूल में बनाए गए शिविर में दूसरे प्रांतों से आए गांव के एक व्यक्ति को रखा गया है। बृहस्पतिवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने स्कूल पहुंचकर शिविर में युवक के स्वास्थ्य की जांच की तो उसका स्वास्थ्य ठीक निकला।
कोरोना वायरस को लेकर लोगों को जागरूक किया गया है लेकिन कुछ लोग फिर भी नहीं मान रहे हैं। बाहर से आए लोगों को शिविर में रखने के लिए पुलिस के माध्यम से सख्ती कराई जाएगी।
दशरथ कुमार, एसडीएम पुवायां
फोटो - 27
गांव में खुलेआम घूम रहे लोग
निगोही। क्षेत्र में बने 79 शेल्टर होम का हाल भी अन्य क्षेत्रों की तरह है, इनमें भी बाहर से आए लोग नहीं रुक रहे और गांवों में खुलेआम बेपरवाह घूम रहे हैं। खंड विकास अधिकारी गोविंद बल्लभ पाठक के मुताबिक क्षेत्र में करीब 2600 लोग बाहर से आए है, इनमें से 260 शेल्टर होम में ठहरे हुए हैं।
11 विदेश और हजारों लोग दिल्ली एनसीआर से लौटे, मगर शेल्टर होम खाली
जलालाबाद। तहसील क्षेत्र की सभी 81 ग्राम पंचायतों के अलावा कस्बे में दो शेल्टर होम बनाए गए हैं, जिनकी देखरेख का जिम्मा प्रधान और सेक्रेटरी पर है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि किसी भी शेल्टर होम में एक भी व्यक्ति मौजूद नहीं है, जबकि कस्बा समेत क्षेत्र के विभिन्न गांवों में एक अप्रैल तक बाहर से आए लोगों की तादाद तीन हजार से ज्यादा है, जिनमें 11 लोग विदेशों से आए हैं।
ग्राम पंचायत कोला, सिकंदरपुर, नूरपुर करही, रुस्तमपुर आदि गांवों के प्रधानों का कहना है कि उन लोगों ने प्रशासन के निर्देशानुसार स्कूल अथवा पंचायत भवन में शेल्टर होम बनाकर लोगों को वहां रुकने के लिए सूचना भिजवा दी है, लेकिन वहां कोई नहीं पहुंचा है। एक अप्रैल तक क्षेत्र में 3027 लोग अन्य जिलों से आए हैं, जबकि 9 लोग नेपाल, एक स्पेन और एक फिलीपींस से आया है। नेपाल से आए 8 गांव उबरिया के रहने वाले हैं और एक गुलड़िया गांव का। स्पेन का युवक यहां रिश्तेदारी में आया था जो वापस जा चुका है। फिलीपींस से आने वाला अल्लाहगंज का रहने वाला है।
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मिर्जापुर की ग्राम पंचायत नरौरा में दस लोगों को क्वारंटीन में रहने को कहा गया था। शेल्टर होम में इनमें से आठ लोग ही बचे हैं और ये भी खेतों में गेहूं की फसल की कटाई कर रहे हैं। गांववालों को कहना है कि जब भी कोई अधिकारी आता है तो ये लोग वापस आ जाते हैं। अधिकारी के जाते ही फिर खेतों में पहुंच जाते हैं।
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रात में घर चले जाते हैं शेल्टर होम में रखे गए लोग
बंडा। क्षेत्र के गांव कढ़रेचौरा के प्राथमिक स्कूल में बनाए गए शेल्टर होम में हरियाणा से आए गांव के 26 श्रमिकों को रखा गया है। यह श्रमिक 29 मार्च को गांव आए थे और 31 मार्च से इनको शेल्टर होम में रखा गया है। दिन में श्रमिक शेल्टर होम में मौजूद मिले। कुछ श्रमिकों ने बताया कि स्कूल में मच्छरों की भरमार है, रात भर नींद नहीं आती। तीन दिन में सिर्फ एक दिन यूपी-112 पुलिस खाना दे गई थी, इस वजह से उन्हें भूखा रहना पड़ता है। वहीं, प्रधान संतोष राठौर ने बताया कि स्कूल में सभी व्यवस्थाएं कराई गई हैं लेकिन श्रमिक रात में घरों को चले जाते हैं और सुबह खाना खाने आ जाते हैं।
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बसंतापुर में 15 लोग क्वरंटीन
मझिगवां। गांव बसंतापुर में देहरादून से 11, दिल्ली व नेपाल से एक-एक और उत्तराखंड से दो लोग आए हैं। सभी को गांव के स्कूल में बने शिविर में रखा गया है। प्रधान संजीव पटेल ने बताया कि बाहर से आया कोई भी व्यक्ति घरों में नहीं रह रहा है। स्कूल में रहने वालों के भोजन आदि की उचित व्यवस्था है।
बाहर से आए 13 लोगों ने घरों में जमाया डेरा
पुवायां। गांव जुझारपुर में गैर प्रांतों से आए 22 लोग स्कूल में बने शिविर में रह रहे हैं। इसके अलावा बाहर से आए 13 अन्य लोगों ने शिविर में रुकने से इनकार कर दिया और ये लोग अपने घरों में रह रहे हैं। प्रधान अवध किशोर त्रिवेदी ने बताया कि दो से तीन लोग रात में अपने घर चले जाते हैं। शेष लोग स्कूल में ही रहते हैं। शिविर में दो समय भोजन और दो समय चाय दी जाती है।
शिविर में रहने को तैयार नहीं लोग
बंडा। गावं सैदापुर के स्कूल में बने शिविर में बाहर से आए गांव के 23 लोगों को रखा गया है। स्कूल में रखे गए लोग सामाजिक दूरी का ख्याल नहीं रख रहे हैं और पास ही बैठते हैं। ऐसे में यदि कोई भी व्यक्ति बीमार हुआ तो अन्य लोगों में भी बीमारी फैलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। उधर पड़रिया दलेलपुर गांव में बाहर से आए 33 लोगों में केवल 20 लोग ही स्कूल में रह रहे हैं। प्रधान वीरपाल ने बताया कि 13 लोग शिविर में रहने को तैयार नहीं हैं। प्रशासन को सूचना दे दी है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने की जांच
पुवायां। गांव जलालपुर के स्कूल में बनाए गए शिविर में दूसरे प्रांतों से आए गांव के एक व्यक्ति को रखा गया है। बृहस्पतिवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने स्कूल पहुंचकर शिविर में युवक के स्वास्थ्य की जांच की तो उसका स्वास्थ्य ठीक निकला।
कोरोना वायरस को लेकर लोगों को जागरूक किया गया है लेकिन कुछ लोग फिर भी नहीं मान रहे हैं। बाहर से आए लोगों को शिविर में रखने के लिए पुलिस के माध्यम से सख्ती कराई जाएगी।
दशरथ कुमार, एसडीएम पुवायां
फोटो - 27
गांव में खुलेआम घूम रहे लोग
निगोही। क्षेत्र में बने 79 शेल्टर होम का हाल भी अन्य क्षेत्रों की तरह है, इनमें भी बाहर से आए लोग नहीं रुक रहे और गांवों में खुलेआम बेपरवाह घूम रहे हैं। खंड विकास अधिकारी गोविंद बल्लभ पाठक के मुताबिक क्षेत्र में करीब 2600 लोग बाहर से आए है, इनमें से 260 शेल्टर होम में ठहरे हुए हैं।
11 विदेश और हजारों लोग दिल्ली एनसीआर से लौटे, मगर शेल्टर होम खाली
जलालाबाद। तहसील क्षेत्र की सभी 81 ग्राम पंचायतों के अलावा कस्बे में दो शेल्टर होम बनाए गए हैं, जिनकी देखरेख का जिम्मा प्रधान और सेक्रेटरी पर है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि किसी भी शेल्टर होम में एक भी व्यक्ति मौजूद नहीं है, जबकि कस्बा समेत क्षेत्र के विभिन्न गांवों में एक अप्रैल तक बाहर से आए लोगों की तादाद तीन हजार से ज्यादा है, जिनमें 11 लोग विदेशों से आए हैं।
ग्राम पंचायत कोला, सिकंदरपुर, नूरपुर करही, रुस्तमपुर आदि गांवों के प्रधानों का कहना है कि उन लोगों ने प्रशासन के निर्देशानुसार स्कूल अथवा पंचायत भवन में शेल्टर होम बनाकर लोगों को वहां रुकने के लिए सूचना भिजवा दी है, लेकिन वहां कोई नहीं पहुंचा है। एक अप्रैल तक क्षेत्र में 3027 लोग अन्य जिलों से आए हैं, जबकि 9 लोग नेपाल, एक स्पेन और एक फिलीपींस से आया है। नेपाल से आए 8 गांव उबरिया के रहने वाले हैं और एक गुलड़िया गांव का। स्पेन का युवक यहां रिश्तेदारी में आया था जो वापस जा चुका है। फिलीपींस से आने वाला अल्लाहगंज का रहने वाला है।