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रोजा शुगर वर्क्स से किसानों को दिलाएं बकाया भुगतान
शाहजहांपुर।
Updated Mon, 03 Aug 2015 08:43 PM IST
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कांग्रेसजनों का शिष्टमंडल सोमवार को एडीएम वित्त एवं राजस्व पीके श्रीवास्तव से मिला। उन्हें डीएम के नाम ज्ञापन देकर कांग्रेस जिलाध्यक्ष कौशल मिश्रा ने रोजा शुगर वर्क्स में सत्र 2015-16 में पेराई सुनिश्चित कराने के साथ मिल गोदाम से बिक्री हुई चीनी के बदले किसानों को बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान कराने की मांग की।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने एडीएम को बताया कि रोजा शुगर वर्क्स को 27 हजार किसान गन्ना आपूर्ति करते हैं। मिल से करीब छह सौ कर्मचारियों के परिवारों का भी भरण-पोषण होता है। पिछले सत्र की करीब 42 करोड़ रुपये की बकाया देनदारी किसानों को चुकता नहीं कर पाने पर मिल प्रबंधन अगले सत्र में मिल नहीं चलाने की बात कह रहा है, जबकि मिल प्रबंधन ने गन्ना बीज देकर अपने क्षेत्र में हजारों हेक्टेयर गन्ना की बुवाई कराने के साथ दवाएं भी उपलब्ध कराईं। मिल नहीं चलने पर किसानों के पास जीवन-यापन का कोई रास्ता नहीं बचेगा।
ज्ञापन में कहा गया है कि प्रशासन ने गन्ना मूल्य भुगतान के लिए मिल को 80 हजार क्विंटल चीनी बेंचने की अनुमति दी। इसमें से 16.50 करोड़ रुपये की 70 हजार क्विंटल चीनी मिल प्रबंधन ने बेंची, लेकिन शासन के आदेशानुसार 85 फीसदी धनराशि से किसानों को भुगतान नहीं किया। इसलिए गन्ना किसानों के हित में मिल में पेराई सत्र सुनिश्चित कराने के साथ किसानों को बकाया गन्ना मूल्य अथवा उसके समतुल्य चीनी उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
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मिल बंद करने का नहीं हुआ निर्णय: जीएम
रोजा शुगर वर्क्स के प्रधान प्रबंधक बीके मालपाणी के अनुसार चीनी उद्योग बेशक संकट के दौर से गुजर रहा है, क्योंकि चीनी का थोक भाव गिरकर 2200 रुपये क्विंटल रह गया है। इसके बावजूद अभी तक निदेशक मंडल ने अगले सत्र में मिल नहीं चलाने जैसा कोई निर्णय नहीं किया है। उन्होंने कहा कि अब तक जितनी चीनी बिकी, उसकी 85 फीसदी धनराशि से किसानों को भुगतान किया जा चुका है।
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कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने एडीएम को बताया कि रोजा शुगर वर्क्स को 27 हजार किसान गन्ना आपूर्ति करते हैं। मिल से करीब छह सौ कर्मचारियों के परिवारों का भी भरण-पोषण होता है। पिछले सत्र की करीब 42 करोड़ रुपये की बकाया देनदारी किसानों को चुकता नहीं कर पाने पर मिल प्रबंधन अगले सत्र में मिल नहीं चलाने की बात कह रहा है, जबकि मिल प्रबंधन ने गन्ना बीज देकर अपने क्षेत्र में हजारों हेक्टेयर गन्ना की बुवाई कराने के साथ दवाएं भी उपलब्ध कराईं। मिल नहीं चलने पर किसानों के पास जीवन-यापन का कोई रास्ता नहीं बचेगा।
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ज्ञापन में कहा गया है कि प्रशासन ने गन्ना मूल्य भुगतान के लिए मिल को 80 हजार क्विंटल चीनी बेंचने की अनुमति दी। इसमें से 16.50 करोड़ रुपये की 70 हजार क्विंटल चीनी मिल प्रबंधन ने बेंची, लेकिन शासन के आदेशानुसार 85 फीसदी धनराशि से किसानों को भुगतान नहीं किया। इसलिए गन्ना किसानों के हित में मिल में पेराई सत्र सुनिश्चित कराने के साथ किसानों को बकाया गन्ना मूल्य अथवा उसके समतुल्य चीनी उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
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मिल बंद करने का नहीं हुआ निर्णय: जीएम
रोजा शुगर वर्क्स के प्रधान प्रबंधक बीके मालपाणी के अनुसार चीनी उद्योग बेशक संकट के दौर से गुजर रहा है, क्योंकि चीनी का थोक भाव गिरकर 2200 रुपये क्विंटल रह गया है। इसके बावजूद अभी तक निदेशक मंडल ने अगले सत्र में मिल नहीं चलाने जैसा कोई निर्णय नहीं किया है। उन्होंने कहा कि अब तक जितनी चीनी बिकी, उसकी 85 फीसदी धनराशि से किसानों को भुगतान किया जा चुका है।