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अपराध स्वीकार कर प्ली बार्गेनिंग का लाभ ले सकते हैं बंदी : सत्यवीर
Thu, 11 Jan 2024 12:56 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Thu, 11 Jan 2024 12:56 AM IST
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जिला कारागार में आयोजित विधिक साक्षरता एवं जागरुकता शिविर में बोलते अधिकारी। संस्था
शाहजहांपुर। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से जिला कारागार में विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर लगाया गया। इसमें बंदियों को ‘प्ली बार्गेनिंग’ का लाभ लेने के लिए जागरूक किया गया।
स्थायी लोक अदालत अध्यक्ष सत्यवीर यादव ने कहा कि सात वर्ष या उससे ऊपर के मामलों में प्ली बार्गेनिंग कर सकते हैं। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी दंडनीय अपराध के लिए आरोपी व्यक्ति अपना अपराध स्वीकार कर प्ली बार्गेनिंग की प्रक्रिया के माध्यम से कानून के तहत निर्धारित सजा से कम सजा प्राप्त करने के लिए अभियोजन से सहायता लेता है। इसमें मुख्य रूप से अभियुक्त और अभियोजक के बीच ट्रायल के पूर्व वार्ता को शामिल किया जाता है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/प्राधिकरण सचिव पीयूष तिवारी ने कहा कि यदि आपने अपराध नहीं किया है तो खुद को निर्दोष साबित करिए। अगर मजबूरी या धोखे में अपराध हो गया हो और भविष्य में ऐसा अपराध नहीं करने के लिए प्ली-बार्गेनिंग का लाभ ले सकते हैं। इसके लिए संबंधित न्यायालय में प्रार्थना पत्र देना होगा। इसके बाद संबंधित न्यायालय प्ली-बारगेनिंग का लाभ देकर बंदी को रिहा भी कर सकता है। डिप्टी जेलर सुभाष यादव ने बताया कि बंदी को किस अपराध में गिरफ्तार किया है, यह जानने का उसको अधिकार है। पैनल लॉयर नीरज श्रीवास्तव, लोक अदालत लिपिक मोहम्मद अफजल, जेल अधीक्षक मिजाजी लाल, डिप्टी जेलर कृष्ण मुरारी गुप्ता, सुरेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
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स्थायी लोक अदालत अध्यक्ष सत्यवीर यादव ने कहा कि सात वर्ष या उससे ऊपर के मामलों में प्ली बार्गेनिंग कर सकते हैं। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी दंडनीय अपराध के लिए आरोपी व्यक्ति अपना अपराध स्वीकार कर प्ली बार्गेनिंग की प्रक्रिया के माध्यम से कानून के तहत निर्धारित सजा से कम सजा प्राप्त करने के लिए अभियोजन से सहायता लेता है। इसमें मुख्य रूप से अभियुक्त और अभियोजक के बीच ट्रायल के पूर्व वार्ता को शामिल किया जाता है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/प्राधिकरण सचिव पीयूष तिवारी ने कहा कि यदि आपने अपराध नहीं किया है तो खुद को निर्दोष साबित करिए। अगर मजबूरी या धोखे में अपराध हो गया हो और भविष्य में ऐसा अपराध नहीं करने के लिए प्ली-बार्गेनिंग का लाभ ले सकते हैं। इसके लिए संबंधित न्यायालय में प्रार्थना पत्र देना होगा। इसके बाद संबंधित न्यायालय प्ली-बारगेनिंग का लाभ देकर बंदी को रिहा भी कर सकता है। डिप्टी जेलर सुभाष यादव ने बताया कि बंदी को किस अपराध में गिरफ्तार किया है, यह जानने का उसको अधिकार है। पैनल लॉयर नीरज श्रीवास्तव, लोक अदालत लिपिक मोहम्मद अफजल, जेल अधीक्षक मिजाजी लाल, डिप्टी जेलर कृष्ण मुरारी गुप्ता, सुरेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
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