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भाजपा का फिर निर्विरोध ब्लॉक प्रमुख बनना लगभग तय
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शाहजहांपुर। अविश्वास प्रस्ताव पास होने के बाद फिर से निर्विरोध ब्लॉक प्रमुख बनना लगभग तय है। सचिन वर्मा को भाजपा ने ही निर्विरोध निगोही का ब्लॉक प्रमुख बनवाया था। तब सचिन के पिता रोशनलाल वर्मा भाजपा से विधायक थे। रोशनलाल वर्मा के सपा में जाने और चुनाव हारने के बाद ही तय हो गया था कि उनके बेटे सचिन वर्मा ज्यादा समय ब्लॉक प्रमुख नहीं रह पाएंगे। सोमवार को आशंकाएं सही साबित हो गईं।
2021 में हुए ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में भाजपा ने 15 में से दस ब्लॉकों में निर्विरोध निर्वाचन कराया था। सिर्फ पांच ब्लॉक में सपा चुनौती दे सकी थी। इन पांच ब्लॉक में मतदान कराया गया था। परिणाम में पांचों ब्लॉकों में भाजपा को बड़ी जीत हासिल हुई थी। निगोही ब्लॉक प्रमुख के लिए हुए चुनाव में सचिन वर्मा निर्विरोध जीते थे। सपा प्रत्याशी के तौर पर अजयपाल सिंह ने पर्चा भरा था लेकिन उनका नामांकन खारिज कर दिया गया था। तब सचिन वर्मा के पिता रोशनलाल वर्मा भाजपा के विधायक थे। सपा ने तब भाजपाइयों पर सत्ता का दुरुपयोग का आरोप लगाया था। यहां तक कि जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में सपा प्रत्याशी के अचानक पाला बदल लेने से सपाई हाथ मलते रह गए थे। रोशनलाल वर्मा के सपा में जाकर चुनाव हारने और भाजपा की दोबारा सरकार बनते ही ब्लॉक प्रमुख की उल्टी गिनती शुरू हो गई थी। जिस तरह 75 में से 65 बीडीसी सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया है, इससे तय माना जा रहा है कि भाजपा का ब्लॉक प्रमुख प्रत्याशी का चुनाव निर्विरोध होगा। सोमवार को हुए अविश्वास प्रस्ताव में सपा या रोशनलाल वर्मा के समर्थक आठ बीडीसी सदस्यों ने मतदान से दूरी बनाए रखी थी। अब सपा आलाकमान पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए ब्लॉक प्रमुख के लिए प्रत्याशी उतारने या न उतारने के लिए मंथन कर रहा है।
दोबारा भाजपा सरकार बनते ही शुरू हुए दुर्दिन
इसके बाद 2022 में विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही रोशनलाल वर्मा सपा में चले गए। तब उनका स्थानीय सपाइयों ने जमकर विरोध किया था। तिलहर विधानसभा से सपा का टिकट मांग रहीं सलोना कुशवाहा भाजपा में आ गईं। सपा ने रोशलाल वर्मा को चुनाव लड़ाया जबकि भाजपा ने सलोना कुशवाहा पर दांव लगाया। चुनाव के वक्त कई बार सलोना और रोशनलाल वर्मा के समर्थक आमने-सामने आते रहे। दोनों ओर से गंभीर धाराओं में मुकदमे तक दर्ज हुए। सलोना जीतकर विधायक बन गईं। दोबारा भाजपा की सरकार बनते ही रोशनलाल वर्मा के दुर्दिन शुरू हो गए। पहले उनकी बहू के घर को जेसीबी से तोड़ा गया। इसके बाद रोशनलाल वर्मा का गढ़ माने जाने वाले निगोही क्षेत्र में उनका प्रभाव कम किया जाने लगा। अब बेटे को ब्लॉक प्रमुख के पद से बेदखल होना पड़ रहा है।
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क्षेत्र पंचायत सदस्यों के प्रस्ताव के बिना फर्जी तरीके से बनाई कार्य योजना
निगोही ब्लॉक प्रमुख सचिन वर्मा को कुर्सी से बेदखल करने में भाजपा नेता और बीडीसी सदस्य भानु प्रताप सिंह ने अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने एक-एक क्षेत्र पंचायत सदस्य को अपने पक्ष में करते हुए पूरी रणनीति के साथ मोर्चा खोला और अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया। अपने सदस्यों को पूरी तरह से एकजुट करने के लिए भानु पूरी तरह से निगरानी बनाए हुए हैं। भानु प्रताप सिंह ने कहा कि रोशन लाल वर्मा के खिलाफ आंधी चल रही है। उसी का नतीजा रहा कि पहले रोशन लाल विधानसभा चुनाव हारे और अब उनके पुत्र के खिलाफ सभी सदस्य एकजुट हो गए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने उनसे संपर्क कर नेतृत्व करने का अनुरोध किया था। नियम के अनुसार हर दो महीने में बैठक होना चाहिए, लेकिन एक साल से कोई बैठक नहीं हुई। विकास का पहिया पूरी तरह से थम गया। अपने चहेतों के प्रस्ताव पर काम कराया गया। उसमें भी घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग किया। कार्य योजना भी बिना क्षेत्र पंचायत सदस्यों के प्रस्ताव के फर्जी तरीके से बना दी गई। उन्होंने बताया कि वह पार्टी के सच्चे सिपाही हैं। उनके लिए जो आदेश होगा, उसे पूरी निष्ठा के साथ करेंगे।
जैसा बोया, वैसा काटा
निगोही के बीडीसी सदस्यों ने अपना अविश्वास जताया है। यह सदस्यों का आपसी मसला है। इस पर मैं ज्यादा टिप्पणी नहीं करना चाहती हूं। लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि और समझदार है। किसका ताज उतार दे, किसको ताज पहना दे। जिसने जैसी राजनीति की फसल बोई है, वैसी काटेगा।
सलोना कुशवाहा, विधायक तिलहर
धमकाए गए बीडीसी सदस्य
सत्ता के बल पर बीडीसी सदस्यों को डरा-धमकाकर अविश्वास प्रस्ताव कराया गया है। यह लोकतंत्र के साथ अन्याय है। आगे रणनीति बनाकर काम किया जाएगा।
तनवीर खां, निवर्तमान जिलाध्यक्ष सपा
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2021 में हुए ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में भाजपा ने 15 में से दस ब्लॉकों में निर्विरोध निर्वाचन कराया था। सिर्फ पांच ब्लॉक में सपा चुनौती दे सकी थी। इन पांच ब्लॉक में मतदान कराया गया था। परिणाम में पांचों ब्लॉकों में भाजपा को बड़ी जीत हासिल हुई थी। निगोही ब्लॉक प्रमुख के लिए हुए चुनाव में सचिन वर्मा निर्विरोध जीते थे। सपा प्रत्याशी के तौर पर अजयपाल सिंह ने पर्चा भरा था लेकिन उनका नामांकन खारिज कर दिया गया था। तब सचिन वर्मा के पिता रोशनलाल वर्मा भाजपा के विधायक थे। सपा ने तब भाजपाइयों पर सत्ता का दुरुपयोग का आरोप लगाया था। यहां तक कि जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में सपा प्रत्याशी के अचानक पाला बदल लेने से सपाई हाथ मलते रह गए थे। रोशनलाल वर्मा के सपा में जाकर चुनाव हारने और भाजपा की दोबारा सरकार बनते ही ब्लॉक प्रमुख की उल्टी गिनती शुरू हो गई थी। जिस तरह 75 में से 65 बीडीसी सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया है, इससे तय माना जा रहा है कि भाजपा का ब्लॉक प्रमुख प्रत्याशी का चुनाव निर्विरोध होगा। सोमवार को हुए अविश्वास प्रस्ताव में सपा या रोशनलाल वर्मा के समर्थक आठ बीडीसी सदस्यों ने मतदान से दूरी बनाए रखी थी। अब सपा आलाकमान पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए ब्लॉक प्रमुख के लिए प्रत्याशी उतारने या न उतारने के लिए मंथन कर रहा है।
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दोबारा भाजपा सरकार बनते ही शुरू हुए दुर्दिन
इसके बाद 2022 में विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही रोशनलाल वर्मा सपा में चले गए। तब उनका स्थानीय सपाइयों ने जमकर विरोध किया था। तिलहर विधानसभा से सपा का टिकट मांग रहीं सलोना कुशवाहा भाजपा में आ गईं। सपा ने रोशलाल वर्मा को चुनाव लड़ाया जबकि भाजपा ने सलोना कुशवाहा पर दांव लगाया। चुनाव के वक्त कई बार सलोना और रोशनलाल वर्मा के समर्थक आमने-सामने आते रहे। दोनों ओर से गंभीर धाराओं में मुकदमे तक दर्ज हुए। सलोना जीतकर विधायक बन गईं। दोबारा भाजपा की सरकार बनते ही रोशनलाल वर्मा के दुर्दिन शुरू हो गए। पहले उनकी बहू के घर को जेसीबी से तोड़ा गया। इसके बाद रोशनलाल वर्मा का गढ़ माने जाने वाले निगोही क्षेत्र में उनका प्रभाव कम किया जाने लगा। अब बेटे को ब्लॉक प्रमुख के पद से बेदखल होना पड़ रहा है।
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क्षेत्र पंचायत सदस्यों के प्रस्ताव के बिना फर्जी तरीके से बनाई कार्य योजना
निगोही ब्लॉक प्रमुख सचिन वर्मा को कुर्सी से बेदखल करने में भाजपा नेता और बीडीसी सदस्य भानु प्रताप सिंह ने अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने एक-एक क्षेत्र पंचायत सदस्य को अपने पक्ष में करते हुए पूरी रणनीति के साथ मोर्चा खोला और अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया। अपने सदस्यों को पूरी तरह से एकजुट करने के लिए भानु पूरी तरह से निगरानी बनाए हुए हैं। भानु प्रताप सिंह ने कहा कि रोशन लाल वर्मा के खिलाफ आंधी चल रही है। उसी का नतीजा रहा कि पहले रोशन लाल विधानसभा चुनाव हारे और अब उनके पुत्र के खिलाफ सभी सदस्य एकजुट हो गए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने उनसे संपर्क कर नेतृत्व करने का अनुरोध किया था। नियम के अनुसार हर दो महीने में बैठक होना चाहिए, लेकिन एक साल से कोई बैठक नहीं हुई। विकास का पहिया पूरी तरह से थम गया। अपने चहेतों के प्रस्ताव पर काम कराया गया। उसमें भी घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग किया। कार्य योजना भी बिना क्षेत्र पंचायत सदस्यों के प्रस्ताव के फर्जी तरीके से बना दी गई। उन्होंने बताया कि वह पार्टी के सच्चे सिपाही हैं। उनके लिए जो आदेश होगा, उसे पूरी निष्ठा के साथ करेंगे।
जैसा बोया, वैसा काटा
निगोही के बीडीसी सदस्यों ने अपना अविश्वास जताया है। यह सदस्यों का आपसी मसला है। इस पर मैं ज्यादा टिप्पणी नहीं करना चाहती हूं। लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि और समझदार है। किसका ताज उतार दे, किसको ताज पहना दे। जिसने जैसी राजनीति की फसल बोई है, वैसी काटेगा।
सलोना कुशवाहा, विधायक तिलहर
धमकाए गए बीडीसी सदस्य
सत्ता के बल पर बीडीसी सदस्यों को डरा-धमकाकर अविश्वास प्रस्ताव कराया गया है। यह लोकतंत्र के साथ अन्याय है। आगे रणनीति बनाकर काम किया जाएगा।
तनवीर खां, निवर्तमान जिलाध्यक्ष सपा