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इस बार नहीं होगा खुटार का ऐतिहासिक रामलीला मेला
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खुटार की रामलीला में राम बारात में शिव, पार्वती रूप में कलाकार (फाइल फोटो)
- फोटो : POWAYAN
खुटार। कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है। सरकार भी आयोजनों की अनुमति कोरोना गाइडलाइन के तहत ही दे रही है। इस कारण खुटार की रामलीला कमेटी के संरक्षक राजा विजय शाह जू देव ने इस बार भी रामलीला मेले के आयोजन को स्थगित करने का निर्णय लिया है।
सन 1935 के आसपास खुटार क्षेत्र में भयंकर हैजा फैला था। तमाम लोगों के काल कवलित होने पर खुटार रियासत के तत्कालीन राजा गजेंद्र शाह को किसी ने रोग की भयावहता रोकने के लिए महा मृत्युंजय जाप कराने की सलाह दी। धार्मिक प्रवृत्ति के राजा ने लोक कल्याण की भावना से जोगराजपुर के महामंडलेश्वर स्वामी श्री कोमलदास से मंत्र का जाप करने का अनुरोध किया।
स्वामी जी ने उनके अनुरोध को स्वीकार करते हुए नगर के पूर्व स्थित फुलवारी में डेरा जमा कर महामंत्र का जाप करना शुरू कर दिया। बताया जाता है कि थोड़े ही दिन में क्षेत्र को हैजा जैसे खतरनाक रोग से मुक्ति मिल गई। जाप समाप्त होने के बाद जब राजा ने स्वामी जी से जाप की दक्षिणा मांगने को कहा तो उन्होंने दक्षिणा स्वरूप नगर में रामलीला मेला लगवाए जाने की इच्छा जाहिर की। उन दिनों नैनीताल प्रवास पर आए गवर्नर छतारी स्टेट पहुंचे तो राजा साहब ने सीधे गवर्नर से स्वीकृति लेकर मेला लगवाया। तब से मेले का लगातार आयोजन हो रहा है।
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कोरानो संक्रमण के चलते पिछले वर्ष भी मेले का आयोजन नहीं हो सका था। रामलीला कमेटी के संरक्षक राजा विजय शाह जू देव ने बताया कि जिस मेले को संक्रामक रोग से मुक्ति के बाद शुरू किया गया था, उस रामलीला का आयोजन कोरोना जैसे संक्रामक रोग के चलते किया जाना ठीक नहीं है। श्री रामलीला समिति के सदस्यों से विचार कर इस बार भी मेला निरस्त रखे जाने का निर्णय लिया गया है। अगले वर्ष सब ठीक रहने पर भव्य तरीके से मेले का आयोजन किया जाएगा।
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सन 1935 के आसपास खुटार क्षेत्र में भयंकर हैजा फैला था। तमाम लोगों के काल कवलित होने पर खुटार रियासत के तत्कालीन राजा गजेंद्र शाह को किसी ने रोग की भयावहता रोकने के लिए महा मृत्युंजय जाप कराने की सलाह दी। धार्मिक प्रवृत्ति के राजा ने लोक कल्याण की भावना से जोगराजपुर के महामंडलेश्वर स्वामी श्री कोमलदास से मंत्र का जाप करने का अनुरोध किया।
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स्वामी जी ने उनके अनुरोध को स्वीकार करते हुए नगर के पूर्व स्थित फुलवारी में डेरा जमा कर महामंत्र का जाप करना शुरू कर दिया। बताया जाता है कि थोड़े ही दिन में क्षेत्र को हैजा जैसे खतरनाक रोग से मुक्ति मिल गई। जाप समाप्त होने के बाद जब राजा ने स्वामी जी से जाप की दक्षिणा मांगने को कहा तो उन्होंने दक्षिणा स्वरूप नगर में रामलीला मेला लगवाए जाने की इच्छा जाहिर की। उन दिनों नैनीताल प्रवास पर आए गवर्नर छतारी स्टेट पहुंचे तो राजा साहब ने सीधे गवर्नर से स्वीकृति लेकर मेला लगवाया। तब से मेले का लगातार आयोजन हो रहा है।
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कोरानो संक्रमण के चलते पिछले वर्ष भी मेले का आयोजन नहीं हो सका था। रामलीला कमेटी के संरक्षक राजा विजय शाह जू देव ने बताया कि जिस मेले को संक्रामक रोग से मुक्ति के बाद शुरू किया गया था, उस रामलीला का आयोजन कोरोना जैसे संक्रामक रोग के चलते किया जाना ठीक नहीं है। श्री रामलीला समिति के सदस्यों से विचार कर इस बार भी मेला निरस्त रखे जाने का निर्णय लिया गया है। अगले वर्ष सब ठीक रहने पर भव्य तरीके से मेले का आयोजन किया जाएगा।