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Shahjahanpur News: नदियों में प्रदूषण की मार, हवा की गुणवत्ता भी प्रभावित

Sat, 02 Dec 2023 12:31 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर Updated Sat, 02 Dec 2023 12:31 AM IST
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Pollution hits rivers, air quality also affected
शाहजहांपुर। कभी प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर शाहजहांपुर जल और वायु प्रदूषण की चपेट में आता जा रहा है। शहर से गुजरने वाली नदियाें का पानी नहाने योग्य तक भी नहीं बचा। भू-गर्भ जल भले ही अभी प्रदूषित की श्रेणी में न हो लेकिन इसकी गुणवत्ता में गिरावट आ रही है। अवैध कटान के कारण जंगल धीरे-धीरे कर बाग में तब्दील होते जा रहे हैं जिन पर पर्यावरण बचाने और प्रदूषण रोकने की जिम्मेदारी है, वे इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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जिले का एक्यूआई औसत 98 है जो कि फिलहाल ठीक है। हालांकि शुक्रवार को एक्यूआई 218 था जो कि एक खतरनाक स्तर है। हालांकि विशेषज्ञों के मुताबिक, सर्दी के मौसम में वायु गुणवत्ता प्रभावित रहती है। वहीं शहर में वाहनों के धुएं, कूड़े के अनियोजित निस्तारण, औद्योगिक कचरे ने जलवायु प्रभावित की है। नदियों में नालों के गिराए जाने और औद्योगिक इकाइयों के अपशिष्ट ने जलीय जीवन नष्ट कर दिया है। गरई, भैंसी, सुखेता जैसी नदियां नष्ट होने की कगार पर हैं। एसएस कॉलेज के इतिहास विभागाध्यक्ष और पृथ्वी संस्था के निदेशक डॉ. विकास खुराना ने बताया कि संस्था ने पूर्व में पानी की गुणवत्ता की टेस्टिंग कराई थी। भूमिगत जल सौ फीट के आसपास है। गर्रा की बायो केमिकल ऑक्सीजन मांग 30 एमजी प्रति लीटर निकली थी जबकि एक एमजी प्रति लीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। 2021 में भावलखेड़ा और ददरौल के बंथरा, लालपुर और खानपुर में लगे हैंडपंपों के 34 सैंपल लिए गए थे। इनमें आर्सेनिक और फ्लोराइड की मात्रा मानक से तीन से चार गुना ज्यादा पाई गई। वहीं शहर में बाबा विश्वनाथ मंदिर, घंटाघर, हनुमत धाम के हैंडपंप में आयरन की मात्रा ज्यादा मिली थी। शहर के मध्य हरियाली बिलकुल गायब है। शहर में बढ़ते प्रदूषण, ध्वनि के अनियंत्रित प्रसार से होने वाले शोर, अस्वच्छता से निपटने के लिए शहरवासियों को भी जागरूक होना पड़ेगा।
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तीन महीने में नष्ट हो गए एक लाख 18 हजार पौधे
जनपद में वृहद पौधरोपण महाअभियान के तहत निर्धारित लक्ष्य 55 लाख 10 हजार के सापेक्ष कुल 55 लाख 33 हजार पौधे लगाए गए। वन विभाग समेत 27 सरकारी विभागों ने इसमें सहभागिता की। पौधरोपण 22 जुलाई और 15 अगस्त दो तिथियों में किया गया। वन विभाग के मुताबिक तीन माह में कुल 54 लाख 15 हजार पौधे ही जीवित बचे हैं। लगभग एक लाख 18 हजार पौधे नष्ट हो गए। इसमें वन विभाग पौध संरक्षण में प्रथम स्थान पर है। विभाग की ओर से लगभग 14 लाख एक हजार दो सौ पौधे 802 हेक्टेयर भूमि पर लगाए गए थे। इनमें से 13 लाख 73 हजार पौधे जीवित हैं। वन विभाग का सफलता प्रतिशत 98 है।
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कभी प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण था शाहजहांपुर

एसएस कॉलेज के इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. विकास खुराना ने बताया कि शाहजहांपुर जिले में ट्रांस हिमालयन तथा गंगा जलवायु मिलती है। सौ वर्ष पूर्व जलवायु काफी बेहतर थी। यहां के जंगल 70 हजार हेक्टेयर भूमि पर फैले थे और विश्व के दो तिहाई बारहसिंघा यहां पाए जाते थे। ब्रिटिश गजेटियर संकलन काल तक जिले के हिस्से में 33 हजार हेक्टेयर भूमि पर ही जंगल था। अब यह घटकर पांच हजार हेक्टेयर तक ही सीमित हो गया है। कुएं जल के प्रधान स्रोत थे। पानी की उपलब्धता मात्र दस फीट पर थी। यहां की नदियों का जल स्वच्छ था और यह समृद्ध जलीय जीवन का केंद्र था।
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