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पीएचसी लोहगवां : दस बजे तक नहीं आते डॉक्टर
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निगोही की लोहरगवां पीएचसी में सूना पड़ा दवा काउंटर। संवाद
निगोही। 25 हजार की आबादी पर बनाई गई पीएचसी लोहरगवां को खुद ही उपचार की जरूरत है। पीएचसी पर एक डॉक्टर और एक वार्ड बॉय तैनात है। सुबह आठ बजे से अस्पताल खुलने का समय होने के बावजूद दस बजे तक डॉक्टर नहीं पहुंचते हैं। इसके चलते मरीजों को मायूस होकर लौटना पड़ता है।
लोहपरगवां पीएचसी की स्थापना हरैया, तालगांव, सफौरा, इदारतपुर, जिंदपुरा, धुलिया आदि ग्रामों की 25 हजार आबादी का उपचार करने के लिए की गई थी। इसमें आयुष डॉक्टर गिरीश और वार्ड बॉय की नियुक्ति की गई। बुधवार को सुबह दस बजे तक डॉक्टर नहीं आए थे। यहां कुर्सियां टूटी होने के चलते बैठने की व्यवस्था नहीं थी। डॉक्टर के नहीं होने पर वार्ड बॉय ही मरीजों को दवा दे रहा था।
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पीएचसी में ही शिफ्ट कर दिया अस्पताल
लोहरगवां पीएचसी में ही ग्राम ऊनकलां में संचालित आयुर्वेदिक अस्पताल को शिफ्ट किया गया है। दोनों गांवों के बीच करीब छह किलोमीटर का फासला है। ऊनकलां की आबादी करीब आठ हजार है। ग्रामीणों के अनुसार गांव वालों की रजामंदी के बिना ही अस्पताल शिफ्ट किया गया है। ऐसे में मरीजों को झोलाछाप की शरण में जाना पड़ता है। आयुर्वेदिक अस्पताल में भी रोजाना डॉक्टर नहीं मिलते हैं। यहां पर तीन दिन ही डॉक्टर के आने के बारे में बताया गया।
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पीएचसी में डॉक्टर के समय से नहीं आने की बात गंभीर है। इस संबंध में जानकारी की जाएगी और संबंधित को निर्देश दिए जाएंगे।
- डॉ.पीपी श्रीवास्तव, एसीएमओ
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लोहपरगवां पीएचसी की स्थापना हरैया, तालगांव, सफौरा, इदारतपुर, जिंदपुरा, धुलिया आदि ग्रामों की 25 हजार आबादी का उपचार करने के लिए की गई थी। इसमें आयुष डॉक्टर गिरीश और वार्ड बॉय की नियुक्ति की गई। बुधवार को सुबह दस बजे तक डॉक्टर नहीं आए थे। यहां कुर्सियां टूटी होने के चलते बैठने की व्यवस्था नहीं थी। डॉक्टर के नहीं होने पर वार्ड बॉय ही मरीजों को दवा दे रहा था।
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पीएचसी में ही शिफ्ट कर दिया अस्पताल
लोहरगवां पीएचसी में ही ग्राम ऊनकलां में संचालित आयुर्वेदिक अस्पताल को शिफ्ट किया गया है। दोनों गांवों के बीच करीब छह किलोमीटर का फासला है। ऊनकलां की आबादी करीब आठ हजार है। ग्रामीणों के अनुसार गांव वालों की रजामंदी के बिना ही अस्पताल शिफ्ट किया गया है। ऐसे में मरीजों को झोलाछाप की शरण में जाना पड़ता है। आयुर्वेदिक अस्पताल में भी रोजाना डॉक्टर नहीं मिलते हैं। यहां पर तीन दिन ही डॉक्टर के आने के बारे में बताया गया।
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पीएचसी में डॉक्टर के समय से नहीं आने की बात गंभीर है। इस संबंध में जानकारी की जाएगी और संबंधित को निर्देश दिए जाएंगे।
- डॉ.पीपी श्रीवास्तव, एसीएमओ

निगोही की लोहरगवां पीएचसी में सूना पड़ा दवा काउंटर। संवाद