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Shahjahanpur News: रोजा रखकर रोजमर्रा के फर्ज की कर रहे अदायगी
Mon, 27 Mar 2023 01:34 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Mon, 27 Mar 2023 01:34 AM IST
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शहंशाह बेगम, रोजे वाली खबर का फोटो।
शाहजहांपुर। रमजान मुबारक के पाक महीने में हर व्यक्ति इबादत में लगा है। बच्चों से लेकर बड़े तक नमाज और रोजा रख रहे हैं। सुबह सहरी में उठना। इसके बाद करीब 13 घंटे से अधिक बिना कुछ खाये-पीए लोग अल्लाह की इबादत में जुटे हैं। मुबारक महीने में कुछ लोग ऐसे हैं, जो रोजे रखने के साथ अपना फर्ज निभा रहे हैं। वे रोजा और नमाज के साथ गर्मी की परवाह किए बिना अपना काम भी निपटाते हैं। इसमें सबसे ज्यादा दिक्कत महिलाओं को आती है, जो घर से लेकर बाहर तक अपनी जिम्मेदारी को निभा रही हैं। रोजेदारों के अनुसार, रोजा रखने के लिए खुदा ताकत देता है। इसलिए बिना थके उनका समय आसानी से कट जाता है।
कुरआन पाक की तिलावत भी करती शहंशाह बेगम
-पुलिस विभाग में उपनिरीक्षक शहंशाह बेगम वर्तमान में फुटबाल की टीम को लेकर बरेली गईं हैं। अपने घर से बाहर होने के बाद भी उनके पूरे रोजे हो रहे हैं। वह पांच वक्त की नमाज के साथ कुरआन पाक की तिलावत भी करती हैं। शहंशाह बेगम बताती हैं कि रमजान बरकतों वाला महीना है। उनके पति इकरार उल हक और बेटा भी रोजे रखता है। रमजान के दौरान उन्हें दिन का पता ही नहीं चलता है।
बचपन से रखते आए हैं रोजा
-राजकीय मेडिकल कॉलेज की ब्लड बैंक के पैथोलॉजिस्ट डॉ. शबाहत हुसैन रमजान माह में सभी रोजे रखते हैं। वह पांचों वक्त के नमाजी भी हैं। रोजे और नमाज के साथ अपने कार्य को भी बखूबी अंजाम देते हैं। डॉ.शबाहत ने बताया कि रोजा फर्ज है। इसे रखना जरूरी है। रोजे को लेकर कभी नौकरी में दिक्कत नहीं आती है। वह बचपन से रोजा रखते आए हैं।
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लंबी यात्रा करना पड़ती, तब भी नहीं छोड़ते रोजा
शेयर मार्केट में ट्रेनिंग मोहम्मद जुनैद को लंबी यात्रा करना पड़ती है। उसके बाद भी रमजान के महीने में अल्लाह की इबादत से मुंह नहीं मोड़ते हैं। वह सभी रोजे रखते हैं। कुरआन की तिलावत और नमाज भी अदा करते हैं। जुनैद ने बताया कि साल में एक बार रमजान का महीना आता है। नौकरी में रोजा रखने में कभी कठिनाई नहीं आती है। अपने फर्ज को अंजाम देने के साथ नौकरी भी करते हैं।
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कुरआन पाक की तिलावत भी करती शहंशाह बेगम
-पुलिस विभाग में उपनिरीक्षक शहंशाह बेगम वर्तमान में फुटबाल की टीम को लेकर बरेली गईं हैं। अपने घर से बाहर होने के बाद भी उनके पूरे रोजे हो रहे हैं। वह पांच वक्त की नमाज के साथ कुरआन पाक की तिलावत भी करती हैं। शहंशाह बेगम बताती हैं कि रमजान बरकतों वाला महीना है। उनके पति इकरार उल हक और बेटा भी रोजे रखता है। रमजान के दौरान उन्हें दिन का पता ही नहीं चलता है।
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बचपन से रखते आए हैं रोजा
-राजकीय मेडिकल कॉलेज की ब्लड बैंक के पैथोलॉजिस्ट डॉ. शबाहत हुसैन रमजान माह में सभी रोजे रखते हैं। वह पांचों वक्त के नमाजी भी हैं। रोजे और नमाज के साथ अपने कार्य को भी बखूबी अंजाम देते हैं। डॉ.शबाहत ने बताया कि रोजा फर्ज है। इसे रखना जरूरी है। रोजे को लेकर कभी नौकरी में दिक्कत नहीं आती है। वह बचपन से रोजा रखते आए हैं।
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लंबी यात्रा करना पड़ती, तब भी नहीं छोड़ते रोजा
शेयर मार्केट में ट्रेनिंग मोहम्मद जुनैद को लंबी यात्रा करना पड़ती है। उसके बाद भी रमजान के महीने में अल्लाह की इबादत से मुंह नहीं मोड़ते हैं। वह सभी रोजे रखते हैं। कुरआन की तिलावत और नमाज भी अदा करते हैं। जुनैद ने बताया कि साल में एक बार रमजान का महीना आता है। नौकरी में रोजा रखने में कभी कठिनाई नहीं आती है। अपने फर्ज को अंजाम देने के साथ नौकरी भी करते हैं।

शहंशाह बेगम, रोजे वाली खबर का फोटो।