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ग्राम न्यायालय खोले जाने के विरोध में धरने पर बैठे वकील
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ग्राम न्यायालय खोले जाने के निर्णय का विरोध करते हुए वकील शुक्रवार को कलक्ट्रेट गेट पर धरने पर बैठ गए। बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के आह्वान पर काली पट्टी बांधकर आंदोलन पर उतरे सेंट्रल बार एसोसिएशन से जुड़े वकीलों ने धरने पर शासन-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। बाद में वकीलों ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन एसडीएम सदर वेद सिंह चौहान को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य भी नहीं किया। इससे दूर-दराज से आने वाले वादकारियों को बिना मुकदमे की बहस में शामिल हुए मायूस होकर लौटना पड़ा। धरना कार्यक्रम के दौरान कलक्ट्रेट गेट पर वकीलों ने ताला लगाए रखा।
दोपहर 12 बजे से 1:45 बजे तक चले धरना प्रदर्शन के दौरान आयोजित सभा में सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बांके बिहारी मिश्रा ने कहा कि सरकार के ग्राम न्यायालयों की स्थापना के निर्णय का हम सभी अधिवक्ता विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि ग्राम न्यायालयों में मजिस्ट्रेट व वादकारी दोनों ही असुरक्षित रहेंगे, उनकी पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं हो सकेगी। ग्रामों में समुचित सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण वादकारियों को उचित न्याय नहीं मिल पाएगा। उन्होंने कहा कि यदि ग्रामों में न्यायालयों की स्थापना की गई तो सेंट्रल बार एसोसिएशन के अधिवक्तागण आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
धरना प्रदर्शन के दौरान एसोसिएशन के महासचिव दिनेश मिश्रा, जमुना प्रसाद वर्मा, प्रताप सिंह राठौर, मधु मिश्रा, राकेश कुमार शुक्ल आदि शामिल रहे।
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दोपहर 12 बजे से 1:45 बजे तक चले धरना प्रदर्शन के दौरान आयोजित सभा में सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बांके बिहारी मिश्रा ने कहा कि सरकार के ग्राम न्यायालयों की स्थापना के निर्णय का हम सभी अधिवक्ता विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि ग्राम न्यायालयों में मजिस्ट्रेट व वादकारी दोनों ही असुरक्षित रहेंगे, उनकी पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं हो सकेगी। ग्रामों में समुचित सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण वादकारियों को उचित न्याय नहीं मिल पाएगा। उन्होंने कहा कि यदि ग्रामों में न्यायालयों की स्थापना की गई तो सेंट्रल बार एसोसिएशन के अधिवक्तागण आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
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धरना प्रदर्शन के दौरान एसोसिएशन के महासचिव दिनेश मिश्रा, जमुना प्रसाद वर्मा, प्रताप सिंह राठौर, मधु मिश्रा, राकेश कुमार शुक्ल आदि शामिल रहे।