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107 सालों के सफर में बड़ा बदलाव, आयुध वस्त्र निर्माणी आज से निगम के हवाले

Fri, 01 Oct 2021 01:13 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 01 Oct 2021 01:13 AM IST
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ordnance cloding factory
शाहजहांपुर की आर्डनेंस वस्त्र फैक्टरी का मुख्यद्वार। संवाद - फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। आयुध वस्त्र निर्माणी का अब निगमीकरण हो गया है। आर्डिनेंस क्लोदिंग फैक्टरी (ओसीएफ) के गेट पर निगम का बोर्ड लग जाएगा। फैक्टरी अब भी केंद्र सरकार के अधीन रहेगी। अधिकारी रक्षा मंत्रालय की गाइडलाइन का इंतजार कर रहे हैं।
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क्लोदिंग फैक्टरी की शाहजहांपुर में स्थापना 1914 में हुई थी। बाद में इसका विलय आर्डिनेंस में हो गया था। अब तक ओसीएफ रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य कर रही है। अब ओसीएफ बोर्ड को भंग कर दिया है। ओसीएफ शाहजहांपुर को ट्रूप कम्फर्ट्स लिमिटेड की इकाई होगी। एक अक्तूबर से ओसीएफ का मैनेजमेंट इस लिमिटेड के अधीन हो जाएगा। दरअसल केंद्र सरकार के अधीन आने वाली 41 आयुध निर्माणी को सात कंपनियों के अधीन किया गया है। ये कंपनियां केंद्र के स्वामित्व में हैं। निगमीकरण के बावजूद आने वाले दो साल तक ओसीएफ इसी तरह रक्षा मंत्रालय के अधीन काम करती रहेगी।
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ऐसा रहा ओसीएफ का सफर
107 साल पुरानी ओसीएफ का अब तक का सफर शानदार रहा है। 1927 में क्लोदिंग फैक्टरी का आयुध में विलय हुआ था। बताया जाता है कि तब महज 175 कर्मचारी कार्यरत थे। 1964 में यहां पर कर्मचारियों की संख्या 13 हजार तक पहुंच गई थी। फिलवक्त 1936 अधिकारी और कर्मचारी यहां पर कार्यरत हैं। द्वितीय विश्व युद्ध, 1962 का भारत-चीन युद्ध, 1999 के कारगिल युद्ध में सैनिकों के लिए वस्त्र तैयार कर ओसीएफ ने दिए हैं।
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इनका होता है यहां निर्माण
आयुध वस्त्र फैक्टरी में काम्बैट यूनिफार्म, काम्बैट कोट, एक्स्ट्रीम कोल्ड क्लाइमेट जैकेट, ओवरऑल कांबिनेशन बैग किट, मच्छरदानी, गद्दे, कंबल, विंडचीटर आदि का यहां पर निर्माण किया जाता है। यहां पर निर्मित सामान आईटीबीपी, एयरफोर्स समेत कई अर्द्धसैनिक बलों को भेजा जाता है। यहां के उच्च क्वालिटी के उत्पाद विदेशी सामान को भी टक्कर देते हैं।
विरोध में काला दिवस मनाएंगे ओसीएफ कर्मी
आर्डिनेंस वस्त्र फैक्टरीका निगमीकरण कर दिया गया दिया है। जोकि शुक्रवार से लागू हो जाएगा। निगमीकरण किए जाने का ओसीएफ कर्मचारियों द्वारा लंबे समय से विरोध कर रहे थे। लेकिन सरकार ने ओसीएफ को एजेंसी के हाथ में दे दिया है। निगमीकरण के विरोध में को काला दिवस मनाया जाएगा। जिसमें ओसीएफ की दो यूनियन शामिल होंगी, जबकि एक इससे दूर रहेगी।
केंद्र सरकार दो साल तक प्रतिनियुक्ति पर रखेगी। इसके बाद विकल्प दिया जाएगा सेंट्रल में रहना है या फिर निगम में जाना है। निगमीकरण के बाद ओसीएफ कर्मचारियों को क्या सुविधाएं मिलेगी और किस तरह से ड्यूटी करनी होगी, इसको लेकर अभी कोई गाइडलाइन नहीं आई है। गाइडलाइन आने का इंतजार है। ऑडिनेंस फैक्टरी मजदूर संघ और प्रतिरक्षा कर्मचारी यूनियन की ओर से निगमीकरण के विरोध में शुक्रवार को काला दिवस मनाया जाएगा।
- दिनेश सिंह, अध्यक्ष, ऑर्डिनेंस फैक्टरी मजदूर संघ
निगमीकरण होने से वेतन समय से मिलेगा या नहीं किसकी कोई गारंटी नहीं है। इसके आलवा अन्य सभी तरह के भत्ते और सुविधाएं भी बंद हो सकती हैं। हालांकि अभी इस तरह की कोई गाइडलाइन नहीं आई है। निगमीकरण के विरोध में भारतीय प्रतिरक्षा संघ व ऑल इंडिया डिफेंस इम्पलाइज यूनियन से जुड़ी ओसीएफ की यूनियनों ने काला दिवस मनाने का निर्णय लिया है। सुबह सात बजे ओसीएफ गेट पर प्रदर्शन किया जाएगा। इसके साथ ही काला फीता बांधकर विरोध जताया जाएगा। निगमीकरण नहीं होना चाहिए था। जो कुछ हुआ है वह कर्मचारी हित में नहीं है।
- माजिद रफीक, महामंत्री, प्रतिरक्षा कर्मचारी यूनियन
इंटक काफी समय से ओसीएफ के निगमीकरण का विरोध करती आ रही है। लेकिन अब सरकार ने इसको अति आवश्यक सेवा में शामिल कर दिया है। इसलिए शुक्रवार को मनाए जाने वाले काला दिवस व विरोध में इंटक के पदाधिकारी व सदस्य शामिल नहीं होंगे। बताया जा रहा है कि वर्तमान समय में जो भी सेवा शर्तें लागू हैं, वह निगमीकरण के बाद भी जारी रहेगी। सरकार ने भी अगले दो साल तक प्रतिनियुक्ति पर रखने की घोषणा की है। एक अक्टूबर से होने वाले विरोध में शामिल नहीं हैं। - वसीम अहमद, महामंत्री, इडेक इंटक
पहले दो तरह के कर्मचारी होते थे। एक वे जिनको पूरा वेतन मिल जाता था, इनमें लिपिक संवर्ग के कर्मचारी आते थे। दूसरे टेलरिंग से संबंधित कर्मचारी थे। जिनको काम के लक्ष्य की पूर्ति और ओवरटाइम के हिसाब से भुगतान किया जाता था। लक्ष्य से कम काम होने पर वेतन कटता था और ओवरटाइम पर वेतन बढ़कर मिलता था। इसके साथ ही स्वास्थ्य सेवाएं और भत्ता आदि का लाभ भी प्राप्त हो रहा था। निगमीकरण के बाद यह सब मिलना बंद हो सकता है। हालांकि अभी सरकार ने दो साल तक उसी तरह से फैक्ट्री को चलाने की बात कही है, जिस तरह से अभी चल रही है। - हरिसरन गंगवार, रिटायर कर्मचारी
निगमीकरण होने के बाद ओसीएफ कर्मचारियों का नुकसान हो जाएगा। पहले डूयटी समय से रहती थी और ओवरटाइम मिलता था। काम भरपूर था, उसी के अनुसार वेतन भी अधिक मिल जाता था। लेकिन निगमीकरण में समय और काम अधिक होगा, लेकिन वेतन सीमित ही होगा। निगमीकरण के बाद ओसीएफ का 160 साल पुराना लोगो तक बदल दिया गया है। नियम, कायदे और कानून भी बदलने में समय नहीं लगेगा। ओसीएफ कर्मचारियों के हित में निगमीकरण नहीं है। - नेमचरन, रिटायर कर्मचारी
मैं जब ओसीएफ में कर्मचारी था, तब तीन-तीन शिफ्टों में काम होता था। उस समय इतना ज्यादा काम था। 24 घंटे तक काम चलता रहता था। करीब 16 हजार कर्मचारी काम करते थे। सेना के लिए वर्दी, कंबल आदि बनाने का काम होता था। शाहजहांपुर की ओसीएफ फैक्ट्री सबसे पुरानी है, इसका निगमीकरण करना ठीक नहीं है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को समझना चाहिए कि ओसीएफ को खत्म न किया जाए। जो नई फैक्ट्रियां बनाई गई हैं, तो उनमें परिवर्तन किया जा सकता है। - सफदर खान, रिटायर कर्मचारी

ओसीएफ का निगमीकरण होने के बाद कुछ भी बदलने वाला नहीं है। हम डिफेंस के अंतर्गत ही काम करेंगे। अभी जिस तरह से कर्मचारी काम कर रहे हैं, उसी तरह से करते रहेंगे। इसके साथ ही उन्हें वे सभी सुविधाएं भी प्राप्त होती रहेंगी, जो कि वर्तमान में मिल रही हैं। दो साल तक कोई परिवर्तन नहीं होना है। इसके बाद भी सरकारी सेवा या निगम में रहने के लिए कर्मचारी को विकल्प दिया जाएगा। वर्तमान समय में 1936 सभी संवर्गों के अधिकारी व कर्मचारी ओसीएफ में हैं। - अनूप शुक्ला, महाप्रबंधक, ओसीएफ
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