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महज कुछ पलों ने बख्श दी परिवार को जिंदगी

Mon, 04 May 2015 12:23 AM IST
शाहजहांपुर।
शाहजहांपुर। Updated Mon, 04 May 2015 12:23 AM IST
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Only a few moments the Baksh The family life
नेपाल में आए भूकंप में हजारों लोग मारे गए लेकिन दास परिवार खुशनसीब रहा। यह परिवार जिस भवन में रहता था वह तो जमींदोज हुआ लेकिन चंद पलों ने इस परिवार को जिंदगी बख्श दी। दरअसल, भूकंप का झटका महसूस होते ही यह परिवार बिल्ंिडग से निकल भागा था। अभी यह लोग कुछ कदम आगे ही बढ़े थे कि पूरा भवन धराशाई हो गया। भूकंप के बाद इस परिवार ने पांच दिन तक भूखे-प्यासे रहकर गुजारे।
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मोहल्ला लाला तेली बजरिया के मूल निवासी राजकिशोर दास, उनक ी पत्नी छवि दास और बेटी गर्वितादास नेपाल के काठमांडू जिले के नया बानेश्वर क्षेत्र के थापा गांव में करीब 21 वर्ष से किराए पर रह रहे थे। दास एक दवा कंपनी में एरिया मैनेजर थे। साथ ही इलेक्ट्रिकल्स गुड्स की एक दुकान भी खोल रखी थी। दास के मुताबिक 25 अप्रैल को दिन में 11:56 बजे जब भूकंप आया तो वह दुकान छोड़कर सड़क पर आ गए। कहते हैं कि 21 मीटर चौड़ी सड़क पर भूकंप के दौरान वाहन कभी इस छोर पर पहुंच जाते थे तो कभी उस छोर पर। करीब एक मिनट के भूकंप में सबकुछ आंखों के सामने तबाह हो गया। छवि दास कहती हैं जब भूकंप आया तो वह खाना बना रही थीं। जैसे ही उनका घर हिला तो फौरन सबकुछ छोड़कर बेटी को लेकर नीचे की ओर भागीं। कहती हैं कि घर से निकलने के एक पल बाद ही पड़ोस की बिल्डिंग उनके मकान पर आ गिरी। यदि एक पल की भी देर हो जाती तो शायद वह नहीं बच पातीं।
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मोदी सरकार की हो रही जय-जयकार
दास फैमिली कहती है कि नेपाल में राहत सामग्री पहुंचाने की वजह से मोदी सरकार की जय-जयकार हो रही है, लेकिन तमाम सामग्री गोरखपुर रेलवे स्टेशन के आसपास पड़ी हुई है, जो पीड़ितों तक नहीं पहुंच पा रही है। नेपाल सरकार ने इसके लिए कोई खास इंतजाम नहीं किया है। कहते हैं कि भारत सरकार की ओर से चलाई गई बस से वह गोरखपुर तक आए। वहां से नि:शुल्क यात्रा के तीन टिकट मिले साथ ही खाने-पीने की वस्तुएं भी दी गईं। कहते हैं कि भारत की बस पर शुक्रवार सुबह सात बजे बैठे थे, शनिवार शाम करीब छह बजे तक शहर में पहुंच सके। यहां अपने बड़े भाई के घर में रुके हैं।
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दो दिन नहीं मिला पानी और पांच दिन खाना
दास कहते हैं कि भूकंप आने की वजह से वाटर सप्लाई की पाइप लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इससे दो दिन तक तो पीने के लिए पानी नहीं मिल सका और चार दिन तक खाना नहीं मिला। दास कहते हैं कि गोरखपुर रेलवे स्टेशन के पास सैकड़ों ट्रक राहत सामग्री एकत्रित है, जिसे पीड़ितों तक नहीं पहुंचाया जा पा रहा है। गोरखपुर पहुंचने पर सही ढंग से खाना मिल सका। इससे पहले बिस्कुट और लइया चना के थोड़े-थोड़े दाने खाकर जिंदगी को बचाया।

हर कदम पर पड़ीं क्षत-विक्षत लाशें
दास कहते हैं कि घर से बाहर निकलने पर जिधर नजर जाती है, उधर लाशों के ढेर नजर आ रहे थे। दो दिन बाद लाशों से बदबू आनी शुरू हो गई थी। इससे वहां पर जीना मुहाल हो गया। कोई भी किसी को कुछ खाद्य सामग्री देने को तैयार नहीं था। कई लोग अपने घरों के लाशों को जला रहे थे। ऐसा वीभत्स दृश्य देखकर जिंदा बचने की उम्मीद कम ही बची थी।


करीब 25 लाख का हुआ नुकसान
छवि दास कहती हैं कि उनकी करीब 20 लाख रुपये की ज्वैलरी और पांच लाख के करीब घरेलू सामान मलबे में तब्दील हो गया। नुकसान और वहां के दृश्य को देखकर उनकी आंखों में आंसू भर आए। सुबकते हुए बोलीं कि 21 साल तक कड़ी मेहनत करने के बाद ये सब जोड़ा था। कहती हैं कि भगवान का लाख-लाख शुक्र है कि उनका परिवार सुरक्षित बच गया। कहती हैं कि अब जीविका की चिंता सता रही है।
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