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Shahjahanpur News: दस हजार की आबादी पर खोली गई अतिरिक्त पीएचसी में कोई डॉक्टर नहीं
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परौर का नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र। संवाद
परौर। कस्बा समेत क्षेत्र के कई गांवों के हजारों ग्रामीण इलाज के लिए परौर पीएचसी पर निर्भर हैं, लेकिन लंबे समय से कोई डॉक्टर तैनात नहीं है। सिर्फ दो कर्मचारियों के सहारे संचालित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जांच की कोई सुविधा नहीं होने से तमाम मरीज 15 किमी दूर कलान पीएचसी पर जाने के लिए मजबूर हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने सन् 1996 के करीब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन निर्माण कराया था। पीएचसी में डॉक्टरों व कर्मचारियों के आवास, ऑपरेशन थिएटर, एंबुलेंस, जनरेटर, पानी की टंकी के लिए ट्यूबवेल आदि व्यवस्थाएं की गईं। निर्माण के बाद तो कुछ वर्षों तक अस्पताल अच्छा चला। उस दौरान डॉक्टर की तैनाती भी हुई, लेकिन बाद में डॉक्टर का तबादला होने पर अस्पताल लगातार बंद रहने लगा।
कलान पीएचसी के तत्कालीन प्रभारी डॉ. दिनेश सिंह को ग्रामीणों ने समस्या बताई। वह भी इस अस्पताल के लिए ज्यादा कुछ नहीं कर पाए, लेकिन दो स्वास्थ्य कर्मचारी को अस्पताल में बैठा दिया। इन दिनों कटरी के बाढ़ प्रभावित रहे गांवों में बुखार, पेट दर्द, खासी-जुकाम आदि बीमारियाें का प्रकोप चरम पर है, लेकिन पीएचसी में स्वास्थ्य जांच के लिए न तो कोई डॉक्टर है और नही जरूरी दवाएं उपलब्ध हैं।
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मरीजों की किसी प्रकार की कोई जांच भी नहीं होती है। रात में किसी को इलाज की जरूरत पड़े तो घरवाले उसे लेकर कलान पीएचसी पर अथवा झोलाछापों की ओर भागते हैं। अस्पताल में केवल जेएनएम योगेंद्र कुमार एवं एएनएम बबली चौहान की तैनाती है। एएनएम भी तभी अस्पताल पहुंचती हैं, जब टीकाकरण का काम होता है।
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इलाज को तरस रहे दो दर्जन गांवों के 50 हजार लोग
परौर। पीएचसी के लाभ क्षेत्र में पांच किमी परिधि में बसे दो दर्जन गांवों के 50 हजार लोग आते हैं। पीएचसी पर उपचार की कोई सुविधा नहीं होने से परौर समेत आसपास के 24 गांवों के ग्रामीण इलाज को तरस रहे हैं। इन सभी गांवों के ग्रामीणों को जांच और इलाज कलान के अलावा जरियनपुर पीएचसी जाना पड़ता है। संवाद
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परौर का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कलान पीएचसी के सेवा क्षेत्र में आता है। जल्द ही यहां का कार्यभार लिया है। एक-दो दिन में परौर पीएचसी की व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी करके उच्च अधिकारियों के सहयोग से उनमें सुधार कराया जाएगा।
-डॉ. आर्येंद्र कुमार, अधीक्षक, पीएचसी कलान
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स्वास्थ्य विभाग ने सन् 1996 के करीब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन निर्माण कराया था। पीएचसी में डॉक्टरों व कर्मचारियों के आवास, ऑपरेशन थिएटर, एंबुलेंस, जनरेटर, पानी की टंकी के लिए ट्यूबवेल आदि व्यवस्थाएं की गईं। निर्माण के बाद तो कुछ वर्षों तक अस्पताल अच्छा चला। उस दौरान डॉक्टर की तैनाती भी हुई, लेकिन बाद में डॉक्टर का तबादला होने पर अस्पताल लगातार बंद रहने लगा।
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कलान पीएचसी के तत्कालीन प्रभारी डॉ. दिनेश सिंह को ग्रामीणों ने समस्या बताई। वह भी इस अस्पताल के लिए ज्यादा कुछ नहीं कर पाए, लेकिन दो स्वास्थ्य कर्मचारी को अस्पताल में बैठा दिया। इन दिनों कटरी के बाढ़ प्रभावित रहे गांवों में बुखार, पेट दर्द, खासी-जुकाम आदि बीमारियाें का प्रकोप चरम पर है, लेकिन पीएचसी में स्वास्थ्य जांच के लिए न तो कोई डॉक्टर है और नही जरूरी दवाएं उपलब्ध हैं।
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मरीजों की किसी प्रकार की कोई जांच भी नहीं होती है। रात में किसी को इलाज की जरूरत पड़े तो घरवाले उसे लेकर कलान पीएचसी पर अथवा झोलाछापों की ओर भागते हैं। अस्पताल में केवल जेएनएम योगेंद्र कुमार एवं एएनएम बबली चौहान की तैनाती है। एएनएम भी तभी अस्पताल पहुंचती हैं, जब टीकाकरण का काम होता है।
इलाज को तरस रहे दो दर्जन गांवों के 50 हजार लोग
परौर। पीएचसी के लाभ क्षेत्र में पांच किमी परिधि में बसे दो दर्जन गांवों के 50 हजार लोग आते हैं। पीएचसी पर उपचार की कोई सुविधा नहीं होने से परौर समेत आसपास के 24 गांवों के ग्रामीण इलाज को तरस रहे हैं। इन सभी गांवों के ग्रामीणों को जांच और इलाज कलान के अलावा जरियनपुर पीएचसी जाना पड़ता है। संवाद
परौर का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कलान पीएचसी के सेवा क्षेत्र में आता है। जल्द ही यहां का कार्यभार लिया है। एक-दो दिन में परौर पीएचसी की व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी करके उच्च अधिकारियों के सहयोग से उनमें सुधार कराया जाएगा।
-डॉ. आर्येंद्र कुमार, अधीक्षक, पीएचसी कलान