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कोई खानसामा तो कोई बना साहब का ड्राइवर

Tue, 23 May 2017 11:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो शाहजहांपुर। 
अमर उजाला ब्यूरो शाहजहांपुर।  Updated Tue, 23 May 2017 11:50 PM IST
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No cookware
गंदगी - फोटो : अमर उजाला
अधिकारियों की चाकरी में लगेे ग्रामीण सफाई कर्मचारी
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 एवजी में काम कर रहेे पति, देवर और भाई-भतीजे
ग्राम पंचायतों में स्वच्छता अभियान का बना मखौल



स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्राम पंचायतों में सफाई व्यवस्था पर हर माह करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद अधिकांश गांवों में गंदगी के हालात पहले जैसे बने हुए हैं। कई ग्राम पंचायतों में सफाई कर्मी गंदगी दूर करने के बजाय अफसरों की चाकरी में लगे हैं। कोई साहब का खानसामा है तोे कोई ड्राइवर। एवजी मेें सफाई का आधा-अधूरा काम उनके पति, देवर और भाई-भतीजे कर रहे हैं। यही वजह है कि गांवों को स्वच्छ बनाने के अभियान को पलीता लग रहा है। 

सफाई पर सालाना 84 करोड़ का खर्च
स्वच्छता मिशन के उद्देश्य की पूर्ति के लिए पंचायतीराज विभाग ने जिले की 1077 ग्राम पंचायतों में 2231 सफाई कर्मचारी नियुक्त कर रखे हैं। बड़ी ग्राम पंचायतों में अतिरिक्त सफाई कर्मी नियुक्त हैं। ऐसी ग्राम पंचायतों में चार से पांच कर्मचारी तैनात हैं। इनके वेतन पर हर माह करीब सात करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं, लेकिन अधिकांश गांवों में सड़कों से लेकर नाले-नालियों तक गंदगी से अटे पड़े हैं। ग्राम पंचायत मुख्यालयों की तुलना में उनसे संबद्ध कम आबादी वाले छोटे गांवों में सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप है क्योंकि वहां न तो प्रधान जाते हैं और न ही पंचायत सेक्रेट्री।  
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रेडीमेड कपड़े बेचते पकड़ा जा चुका है कर्मचारी
सदर तहसील के विभिन्न गांवों में ऐसे तमाम सफाई कर्मचारी नियुक्त हैं, जो सफाई का अपना मूल काम छोड़कर साहबों की चाकरी में लगे हैं या फिर उन्हें खुश करके अपने निजी धंधों में रमे हैं। मसलन, कंप्यूटर के जानकार झाड़ू-तसला छोड़कर विभिन्न दफ्तरों में माउस थामे बैठे रहते हैं। नौकरी मिलने से पहले पेंटिंग, प्लंबिंग, कारपेंटरी आदि करने वाले दस्तकार अफसरों के बंगलोें पर यही काम करके सरकारी खजाने से तनख्वाह ले रहे हैं। अभी ज्यादा समय नहीं हुआ, जब एक सफाई कर्मचारी को तत्कालीन डीपीआरओ ने बहादुुरगंज बुध बाजार में फुटपाथ पर रेडीमेड कपड़ों की दुकान सजाए पकड़ा था। उसे निलंबित भी किया गया, लेकिन सबक किसी ने नहीं लिया।  
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तिलहर क्षेत्र में बेपटरी हुई सफाई व्यवस्था
विकास खंड की 71 ग्राम पंचायतों में 149 सफाई कर्मी नियुक्त हैं, लेकिन 80 फीसदी गांवों में गंदगी का साम्राज्य है। अमनपुर की ग्राम प्र्रधान साबिरा बेगम केवल रवींद्र्र के सफाई कार्य से संतुष्ट हैं, जबकि चार अन्य दिखावे की नौकरी कर रहे हैं। एक कर्मचारी रोजाना शहर से आता-जाता है। इसी गांव की महिला कर्मचरी की ड्यूटी उसका पति निभा रहा है। जनिउरी के प्रधान धर्मवीर के अनुसार महिला कर्मचारी के अपने देेवर से सफाई कार्य कराने की शिकायत ब्लॉक कार्यालय जाकर की, लेकिन हुआ कुछ नहीं। मोहनपुर परसेली में बहन की जिम्मेदारी भाई निभा रहा है। इसी पंचायत के मझरा अइयापुर में हफ्ते में सिर्फ दो दिन झाड़ू लगती है। गुरगिया बहादुरपुर के प्रधान भी लचर सफाई व्यवस्था से नाराज हैं, लेकिन अफसरों की बला से।

कटरा-खुदागंज का सफाई स्टाफ इधर-उध
कटरा-खुदागंज ब्लॉक में कहनेे को 92 सफाई कर्मचारी तैनात हैं, लेकिन उनमें से कई अफसरों के इशारे पर इधर-उधर हैं। ग्राम पंचायत पहाड़ीपुर भोपत का एक सफाई कर्मचारी बरेली में एक अपर आयुक्त के यहां खाना बनाने की ड्यूटी बजा रहा है, लेकिन मामला बड़े हाकिम से जुड़ा होने के कारण प्रधान माया देवी खामोश रहना बेहतर मानती हैं। गांव मियुना के ग्राम प्रधान महेंद्र पाल के अनुसार गांव का एक सफाई कर्मी मुख्यालय पर साहब के ऑफिस में अटैच है। जलालपुर गांव का एक सफाई कर्मी विकास विभाग की गाड़ी चला रहा है। कपूरनगला, भौना, सादिकपुर आदि गांवों का भी यही हाल है।

कलान में गंदगी से संक्रामक रोगों की आशंका
कलान। गांवों में लचर सफाई व्यवस्था को जाने दें, तहसील मुख्यालय पर नियमित सफाई नहीं होती, जबकि कसबे में चार कर्मचारी नियुक्त हैं। गांव रुकनपुर में तीन सफाई कर्मचारी तैनात हैं, लेकिन वहां भी कोई कर्मचारी सफाई करने नहीं आता है। ग्राम प्रधान सोनी गुप्ता के अनुसार इसकी शिकायत बीडीओ और एडीओ पंचायत से कर चुकी हैं। बाराखुर्द और बाराकलां में दो माह में एक बार में सफाई कर्मी मजदूरों को बुलाकर सफाई कराते हैं। विक्रमपुर गांव में होली से अभी तक सफाई नहीं हुई है। छिदपुरी, मोहनपुर कलुआपुर, भुन्नीखेड़ा, भुड़ेली, जखिया, एतमादपुर, सथरी, मिल्किया आदि गांवों में भी सफाई की यही हालत है।

मखौल बनी नमामि गंगे योजना 
केंद्र सरकार की नमामि गंगे योजना में शामिल गंगा के तटवर्ती जहानाबाद, खमरिया, हेतमपुर आदि गांवों में सफाई कर्मी तैनात हैं, लेकिन वहां सफाई करने कभी-कभार जाते हैं। वह इन गावों में तभी दिखते हैं जब कोई अधिकारी दौरे पर जाता है। इन गांवों में भी सफाई व्यवस्था दयनीय है। जगह-जगह कूडे़ के ढेर लग गए हैं। एडीओ पंचायत श्रीपाल के अनुसार कई कर्मचारियों को निलंबित किए जाने पर भी उनके कार्य में सुधार नहीं देख उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जा रही है। 


व्हाट्सऐप पर फोटो से प्रमाणित होगी ड्यूटी
सफाई कर्मियों के अपनी एवजी में अन्य लोगों को सफाई कार्य में लगाए जाने के मामलों में निलंबन की कार्यवाही लगातार हो रही है। ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए डीएम के निर्देश पर सफाई कर्मियों का व्हाट्सऐप ग्रुप बना दिया गया है। इस व्यवस्था से कर्मचारियों की ड्यूटी प्रमाणित होने के साथ एवजी पर भी रोक लग सकेगी। 
-अजय प्रकाश, प्र्रभारी सीडीओ
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