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नवजात पुत्री और विवाहिता की इलाज के दौरान मौत
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पुवायां। बंडा के गांव पड़रिया दलेलपुर निवासी सीताराम ने इलाज के दौरान पुत्री की मौत के मामले में पुत्री की ससुराल के आरोपियों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए तहरीर दी है।
सीताराम के अनुसार उन्होंने अपनी पुत्री कौशल्या देवी की शादी एक वर्ष पूर्व पुवायां के गांव गंगाई निवासी रूपचंद्र के साथ की थी। शादी के बाद से पुत्री की ससुराल के लोग दहेज में बाइक और एक लाख रुपये मांग रहे थे। जानकारी होने के बाद उन्होंने पुत्री की ससुराल के लोगों को समझाया, लेकिन रिश्तेदारी के कारण कार्रवाई नहीं की थी।
गर्भवती होने और काफी कमजोर होने के कारण आठ जनवरी को उन्होंने कौशल्या देवी को बरेली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। इलाज में रुपये वहीं खर्च कर रहे थे और जरूरत पड़ने पर उन्होंने पुत्री को ब्लड भी दिया था। दामाद रूपचंद्र ने उनको फोन किया कि 50 हजार रुपये लेकर आ जाओ। कौशल्या देवी ने एक पुत्री को जन्म दिया। वह रुपये लेकर गए तो पता चला कि कौशल्या देवी को ससुराल के लोग अस्पताल से ले जा चुके थे और शाहजहांपुर के सरकारी अस्पताल में भर्ती करा दिया था।
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निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने कौशल्या को छुट्टी कराने से मना किया था। फिर भी छुट्टी कराने और इलाज में लापरवाही के चलते जिला अस्पताल में कौशल्या देवी और उसकी नवजात पुत्री की मौत हो गई। सीताराम ने आरोप लगाया कि दामाद सहित उसके परिवार के पांच लोगों के पुत्री के जबरिया छुट्टी कराने के कारण ही कौशल्या देवी की मौत हुई है। इंस्पेक्टर केबी सिंह ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
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सीताराम के अनुसार उन्होंने अपनी पुत्री कौशल्या देवी की शादी एक वर्ष पूर्व पुवायां के गांव गंगाई निवासी रूपचंद्र के साथ की थी। शादी के बाद से पुत्री की ससुराल के लोग दहेज में बाइक और एक लाख रुपये मांग रहे थे। जानकारी होने के बाद उन्होंने पुत्री की ससुराल के लोगों को समझाया, लेकिन रिश्तेदारी के कारण कार्रवाई नहीं की थी।
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गर्भवती होने और काफी कमजोर होने के कारण आठ जनवरी को उन्होंने कौशल्या देवी को बरेली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। इलाज में रुपये वहीं खर्च कर रहे थे और जरूरत पड़ने पर उन्होंने पुत्री को ब्लड भी दिया था। दामाद रूपचंद्र ने उनको फोन किया कि 50 हजार रुपये लेकर आ जाओ। कौशल्या देवी ने एक पुत्री को जन्म दिया। वह रुपये लेकर गए तो पता चला कि कौशल्या देवी को ससुराल के लोग अस्पताल से ले जा चुके थे और शाहजहांपुर के सरकारी अस्पताल में भर्ती करा दिया था।
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निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने कौशल्या को छुट्टी कराने से मना किया था। फिर भी छुट्टी कराने और इलाज में लापरवाही के चलते जिला अस्पताल में कौशल्या देवी और उसकी नवजात पुत्री की मौत हो गई। सीताराम ने आरोप लगाया कि दामाद सहित उसके परिवार के पांच लोगों के पुत्री के जबरिया छुट्टी कराने के कारण ही कौशल्या देवी की मौत हुई है। इंस्पेक्टर केबी सिंह ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी।