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उत्तराखंड वन डिपो से कोलाघाट पैंटून पुल को नहीं पहुंचे नए स्लीपर
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शाहजहांपुर। जलालाबाद तहसील को कटरी इलाके के मिर्जापुर व कलान क्षेत्र से जोड़ने वाले कोलाघाट पैंटून पुल यातायात लायक बनाने को नए स्लीपरों का लोक निर्माण विभाग के ठेकेदार समेत क्षेत्र के लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। लोनिवि अभियंताओं के अनुसार पुल के लिए मंगाए गए नए स्लीपर वन विभाग के उत्तराखंड स्थित काष्ठ डिपो से रवाना हो चुके हैं। हालांकि अभी तक पहुंचने नहीं हैं। इस बीच, क्षेत्र के लोगों को पैंटून पुल बंद होने के कारण जान जोखिम में डालकर छोटी मोटर बोट के सहारे रामगंगा पार करनी पड़ रही है।
29 नवंबर को जब से कोलाघाट पुल का सात नंबर का पिलर जमीन में धंसने से क्षतिग्रस्त हुआ है, रामगंगा पार कटरी क्षेत्र में बसे करीब 200 गांवों के हजारों लोगों को जिला व तहसील मुख्यालय आने-जाने में तमाम दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। 18 दिसंबर को जिला मुख्यालय पर हुई प्रधानमंत्री की रैली से पहले कोलाघाट पर जल्दबाजी में पुराने स्लीपर और पैंटून के सहारे अस्थायी पुल बनाया गया, लेकिन तीन दिन पहले उसके बोल्ट टूटने से कई स्लीपर क्षतिग्रस्त हो गए। इससे पैंटून पुल भी आवागमन लायक नहीं रहा।
पैंटून पुल के स्लीपर खिसकने और टूटने के दिन ही लोनिवि के अभियंताओं ने दो दिन में नए स्लीपर आ जाने का दावा किया था, लेकिन बृहस्पतिवार को तीसरे दिन भी स्थिति जस की तस बनी रही। इस कारण लोगों को दिल थामकर कर डगमगाती छोटी नाव से रामगंगा नदी पार करनी पड़ रही है। बता दें कि कोलाघाट पर पक्का पुल बनने से पहले रामगंगा नदी में लकड़ी की बड़ी नावें चलती थीं और उन पर बैठकर नदी पार करना सुगम था। लेकिन इन दिनों रामगंगा में चल रहीं टीन की छोटी नावें मामूली भार से असंतुलित होकर डगमगाने लगती हैं। कुछ वर्ष पहले ऐसी ही छोटी नाव नदी में असंतुलित होकर पलटने से कई लोग डूब गए थे। नाव चालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने पर प्रशासन ने छोटी नाव के संचालन पर रोक लगा दी थी।
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नए स्लीपर की मांग बरेली स्थित मुख्य अभियंता कार्यालय भेजी गई थी, लेकिन उचित माप के स्लीपर उत्तराखंड में वन विभाग के विभिन्न काष्ठ डिपो से आने हैं। जानकारी मिली है कि नए स्लीपर वहां से चल चुके हैं और शुक्रवार दोपहर तक कोलाघाट पहुंच जाएंगे। इस बीच, पैंटून पुल के लिए नदी के दोनों तटों पर एप्रोच रोड
ठीक कराने का काम करा लिया गया है ताकि स्लीपर मिलते ही दो दिन में पुल तैयार किया जा सके। प्रभावित क्षेत्र के लोग धैर्य बनाए रखें क्योंकि पैंटून पुल पर यातायात जल्द शुरू कराया जाएगा।
-राजेश चौधरी, अधिशासी अभियंता, लोनिवि (निर्माण खंड-1)
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29 नवंबर को जब से कोलाघाट पुल का सात नंबर का पिलर जमीन में धंसने से क्षतिग्रस्त हुआ है, रामगंगा पार कटरी क्षेत्र में बसे करीब 200 गांवों के हजारों लोगों को जिला व तहसील मुख्यालय आने-जाने में तमाम दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। 18 दिसंबर को जिला मुख्यालय पर हुई प्रधानमंत्री की रैली से पहले कोलाघाट पर जल्दबाजी में पुराने स्लीपर और पैंटून के सहारे अस्थायी पुल बनाया गया, लेकिन तीन दिन पहले उसके बोल्ट टूटने से कई स्लीपर क्षतिग्रस्त हो गए। इससे पैंटून पुल भी आवागमन लायक नहीं रहा।
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पैंटून पुल के स्लीपर खिसकने और टूटने के दिन ही लोनिवि के अभियंताओं ने दो दिन में नए स्लीपर आ जाने का दावा किया था, लेकिन बृहस्पतिवार को तीसरे दिन भी स्थिति जस की तस बनी रही। इस कारण लोगों को दिल थामकर कर डगमगाती छोटी नाव से रामगंगा नदी पार करनी पड़ रही है। बता दें कि कोलाघाट पर पक्का पुल बनने से पहले रामगंगा नदी में लकड़ी की बड़ी नावें चलती थीं और उन पर बैठकर नदी पार करना सुगम था। लेकिन इन दिनों रामगंगा में चल रहीं टीन की छोटी नावें मामूली भार से असंतुलित होकर डगमगाने लगती हैं। कुछ वर्ष पहले ऐसी ही छोटी नाव नदी में असंतुलित होकर पलटने से कई लोग डूब गए थे। नाव चालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने पर प्रशासन ने छोटी नाव के संचालन पर रोक लगा दी थी।
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नए स्लीपर की मांग बरेली स्थित मुख्य अभियंता कार्यालय भेजी गई थी, लेकिन उचित माप के स्लीपर उत्तराखंड में वन विभाग के विभिन्न काष्ठ डिपो से आने हैं। जानकारी मिली है कि नए स्लीपर वहां से चल चुके हैं और शुक्रवार दोपहर तक कोलाघाट पहुंच जाएंगे। इस बीच, पैंटून पुल के लिए नदी के दोनों तटों पर एप्रोच रोड
ठीक कराने का काम करा लिया गया है ताकि स्लीपर मिलते ही दो दिन में पुल तैयार किया जा सके। प्रभावित क्षेत्र के लोग धैर्य बनाए रखें क्योंकि पैंटून पुल पर यातायात जल्द शुरू कराया जाएगा।
-राजेश चौधरी, अधिशासी अभियंता, लोनिवि (निर्माण खंड-1)