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लापरवाही : पुवायां में जिला बदर करता रहा मनरेगा में मजदूरी
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पुवायां (शाहजहांपुर)। पुवायां थाना क्षेत्र के बगड़ेर में जिला बदर एक व्यक्ति मनरेगा में मजदूरी करता रहा। 12 दिन की मजदूरी के रुपये भी उसके खाते में डाले गए। इस दौरान पुलिस अनजान बनी रही। बाद में मामला चर्चा में आने पर पुलिस की किरकिरी शुरू हुई तो उसे पकड़ने के लिए दबिश दी गई, लेकिन वह घर से भाग गया।
गांव बगड़ेर के हरिओम पर मारपीट के चार मुकदमे दर्ज होने के बाद पुवायां पुलिस ने उसे जिला बदर करने की फाइल तैयार की थी। 10 जून को हरिअेाम को छह महीने के लिए जिला बदर करने का आदेश किया गया। नौ दिसंबर तक उसे जिले से बाहर रहने का फरमान है, लेकिन पुवायां की बड़ागांव चौकी पुलिस की लापरवाही के चलते हरिओम न सिर्फ घर में रहता रहा, बल्कि मनरेगा में मजदूरी भी की। बगड़ेर के रोजगार सेवक बबलू ने बताया कि हरिओम ने मनरेगा में 18 से 31 अगस्त के बीच 12 दिन काम किया है, जिसका भुगतान भी किया गया है। ड्यूटी लगाने का काम मेट का होता है। मजदूरी की राशि 3024 रुपये का भुगतान दो सितंबर को उसके बैंक एकाउंट में भेजा गया। खास बात यह है कि पुवायां की बड़ागांव पुलिस चौकी से बगड़ेर की दूर केवल ढाई किमी है।
सीओ पुवायां प्रवीण मलिक ने बताया कि जिला बदर हरिओम के गांव में रहने और मनरेगा में काम करने की चर्चा फैलने पर थाना पुलिस सात सितंबर की रात हरिओम की तलाश में गांव गई थी, मगर वह हत्थे नहीं चढ़ा। उसकी तेजी से तलाश कराई जा रही है।
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दर्ज हैं मारपीट और एससीएसटी एक्ट के मुकदमे
हरिओम पर चार मुकदमे पुवायां थाने में दर्ज हैं। उस पर 2020 में दो, 2021 में एक और 2024 में मारपीट, एससीएसटी एक्ट का एक मुकदमा दर्ज हुआ था। हरिओम के जिला बदर होने के बाद भी मनरेगा में काम करने की जानकारी गांव के तमाम लोगों को थी, लेकिन उसके डर से कोई भी इस संबंध में बात करने और जानकारी देने को तैयार नहीं हुआ।
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पुलिस जिला बदर की तलाश कर रही है। मनरेगा में काम करने और घर पर रहने के पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। संबंधित चौकी पुलिस से जवाबदेही तय करते हुए लापरवाही बरतने वाले दोषी पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई कराई जाएगी।
-प्रवीण मलिक, सीओ पुवायां
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गांव बगड़ेर के हरिओम पर मारपीट के चार मुकदमे दर्ज होने के बाद पुवायां पुलिस ने उसे जिला बदर करने की फाइल तैयार की थी। 10 जून को हरिअेाम को छह महीने के लिए जिला बदर करने का आदेश किया गया। नौ दिसंबर तक उसे जिले से बाहर रहने का फरमान है, लेकिन पुवायां की बड़ागांव चौकी पुलिस की लापरवाही के चलते हरिओम न सिर्फ घर में रहता रहा, बल्कि मनरेगा में मजदूरी भी की। बगड़ेर के रोजगार सेवक बबलू ने बताया कि हरिओम ने मनरेगा में 18 से 31 अगस्त के बीच 12 दिन काम किया है, जिसका भुगतान भी किया गया है। ड्यूटी लगाने का काम मेट का होता है। मजदूरी की राशि 3024 रुपये का भुगतान दो सितंबर को उसके बैंक एकाउंट में भेजा गया। खास बात यह है कि पुवायां की बड़ागांव पुलिस चौकी से बगड़ेर की दूर केवल ढाई किमी है।
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सीओ पुवायां प्रवीण मलिक ने बताया कि जिला बदर हरिओम के गांव में रहने और मनरेगा में काम करने की चर्चा फैलने पर थाना पुलिस सात सितंबर की रात हरिओम की तलाश में गांव गई थी, मगर वह हत्थे नहीं चढ़ा। उसकी तेजी से तलाश कराई जा रही है।
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दर्ज हैं मारपीट और एससीएसटी एक्ट के मुकदमे
हरिओम पर चार मुकदमे पुवायां थाने में दर्ज हैं। उस पर 2020 में दो, 2021 में एक और 2024 में मारपीट, एससीएसटी एक्ट का एक मुकदमा दर्ज हुआ था। हरिओम के जिला बदर होने के बाद भी मनरेगा में काम करने की जानकारी गांव के तमाम लोगों को थी, लेकिन उसके डर से कोई भी इस संबंध में बात करने और जानकारी देने को तैयार नहीं हुआ।
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पुलिस जिला बदर की तलाश कर रही है। मनरेगा में काम करने और घर पर रहने के पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। संबंधित चौकी पुलिस से जवाबदेही तय करते हुए लापरवाही बरतने वाले दोषी पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई कराई जाएगी।
-प्रवीण मलिक, सीओ पुवायां