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Shahjahanpur News: पुलिस और प्रशासन की लापरवाही ने दिया मौका...हो गया बवाल
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तिलहर/शाहजहांपुर। आर्य समाज मंदिर परिसर में रविवार सुबह मारपीट और पथराव के मामले में पुलिस और प्रशासन की लापरवाही सामने आई है। एसडीएम को बवाल की आशंका में पत्र दिया गया था लेकिन उन्होंने केवल सीओ को पत्र भेजने के बाद मामला गंभीरता से नहीं लिया। एसडीएम और सीओ के मामले को हल्के में लिए जाने से बड़ा बवाल हो गया। इस मामले में डीएम ने एडीएम प्रशासन को रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
अस्पताल रोड स्थित आर्य समाज मंदिर परिसर में 27 जून को बरात आई थी। रविवार सुबह फेरे पड़ते वक्त वहां पर आर्य समाज मंदिर में अपना दावा कर रहे दो पक्ष भिड़ गए। आधे घंटे तक लाठी-डंडे चलने और पथराव होने से सड़क पर अफरातफरी मची रही थी। 12 लोग घायल हुए थे जिनमें से तीन लोगों को राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था।
तिलहर के दातागंज मोहल्ले के रहने वाले शिकायतकर्ता लोकेश आर्य के मुताबिक, वह आर्य समाज मंदिर कमेटी के मंत्री हैं। उन्होंने पहले 15 और फिर 25 जून को आर्य समाज मंदिर कमेटी में खुद के मंत्री होने का दावा करने वाले गढ़ियारंगीन क्षेत्र के गांव सिमरिया सहसपुर निवासी शिवराम और उनके साथियों पर विवाद किए जाने की आशंका जाहिर करते हुए एसडीएम को पत्र दिया था।
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25 जून को एसडीएम जीत सिंह राय को दिए गए पत्र में उन्होंने 27 व 28 को परिसर में बरात रुकने का हवाला देते हुए दूसरे पक्ष के विवाद करने की आशंका पर पुलिस सुरक्षा की मांग की थी। इसके बावजूद सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई गई और 28 जून की सुबह दूसरे पक्ष ने उन पर हमला कर दिया। बीचबचाव कर रहे बरातियों को भी पीटा और महिलाओं को भी नहीं बख्शा।
इस मामले में एसडीएम का कहना है कि उन्होंने सीओ को पत्र भेज दिया था। इस पर सीओ इशिका सिंह ने कहा कि शिकायतकर्ता ने उन्हें कोई पत्र नहीं दिया। एसडीएम की ओर से पत्र मिलने पर उन्होंने थाना प्रभारी को मौखिक रूप से निर्देशित किया था। सीओ का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित मामला होने पर उन्हें पत्र दिया जाना चाहिए था। इस संंबंध में संबंधित थाना प्रभारी को भी पत्र नहीं दिया गया।
अगर रात में बरात रुकी हुई थी और सुरक्षा व्यवस्था नहीं उपलब्ध हुई थी तो भी शिकायतकर्ता को उन्हें बताना चाहिए था। पूर्व में 25 जून को शिकायतकर्ता ने दूसरे पक्ष से विवाद चलने की बात बताई थी जिस पर तत्काल जांच कराई गई थी। शिकायतकर्ता से यह भी कहा गया था कि अगर कोई समस्या आए तो सीधा उन्हें बताया जाए लेकिन ऐसा नहीं किया गया। वहीं, पुलिस ने सोमवार को शिवराम सिंह, उसके पुत्र आलोक सिंह और प्रतीक का चालान कर दिया। अन्य आरोपियों को नोटिस तामील कराए गए हैं।
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एसपी से शिकायत करेगा पीड़ित पक्ष
शिकायतकर्ता लोकेश आर्य ने प्रभारी निरीक्षक पर आरोपियों का पक्ष लेने और उनके साथ अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया है। वह मंगलवार को एसपी से मिलकर शिकायत करेंगे। उन्होंने बताया कि प्रभारी निरीक्षक ने मुख्य आरोपी शिवराम सिंह को थाने बुलाकर बातचीत के बाद जाने दिया और बाद में दोबारा बुलाकर अपने कार्यालय में बैठाया। उनका कहना है कि जब उन्होंने इस संबंध में प्रभारी निरीक्षक से सवाल किया तो उन्होंने अभद्र भाषा का प्रयोग किया।
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घटना के बाद मामले की रिपोर्ट दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। अगर पुलिस की लापरवाही सामने आएगी तो मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
-सौरभ दीक्षित, एसपी
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बवाल की जानकारी मिली है। इस संबंध में एडीएम प्रशासन को रिपोर्ट देने के लिए निर्देशित किया गया है।
-धर्मेंद्र प्रताप सिंह, डीएम
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अस्पताल रोड स्थित आर्य समाज मंदिर परिसर में 27 जून को बरात आई थी। रविवार सुबह फेरे पड़ते वक्त वहां पर आर्य समाज मंदिर में अपना दावा कर रहे दो पक्ष भिड़ गए। आधे घंटे तक लाठी-डंडे चलने और पथराव होने से सड़क पर अफरातफरी मची रही थी। 12 लोग घायल हुए थे जिनमें से तीन लोगों को राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था।
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तिलहर के दातागंज मोहल्ले के रहने वाले शिकायतकर्ता लोकेश आर्य के मुताबिक, वह आर्य समाज मंदिर कमेटी के मंत्री हैं। उन्होंने पहले 15 और फिर 25 जून को आर्य समाज मंदिर कमेटी में खुद के मंत्री होने का दावा करने वाले गढ़ियारंगीन क्षेत्र के गांव सिमरिया सहसपुर निवासी शिवराम और उनके साथियों पर विवाद किए जाने की आशंका जाहिर करते हुए एसडीएम को पत्र दिया था।
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25 जून को एसडीएम जीत सिंह राय को दिए गए पत्र में उन्होंने 27 व 28 को परिसर में बरात रुकने का हवाला देते हुए दूसरे पक्ष के विवाद करने की आशंका पर पुलिस सुरक्षा की मांग की थी। इसके बावजूद सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई गई और 28 जून की सुबह दूसरे पक्ष ने उन पर हमला कर दिया। बीचबचाव कर रहे बरातियों को भी पीटा और महिलाओं को भी नहीं बख्शा।
इस मामले में एसडीएम का कहना है कि उन्होंने सीओ को पत्र भेज दिया था। इस पर सीओ इशिका सिंह ने कहा कि शिकायतकर्ता ने उन्हें कोई पत्र नहीं दिया। एसडीएम की ओर से पत्र मिलने पर उन्होंने थाना प्रभारी को मौखिक रूप से निर्देशित किया था। सीओ का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित मामला होने पर उन्हें पत्र दिया जाना चाहिए था। इस संंबंध में संबंधित थाना प्रभारी को भी पत्र नहीं दिया गया।
अगर रात में बरात रुकी हुई थी और सुरक्षा व्यवस्था नहीं उपलब्ध हुई थी तो भी शिकायतकर्ता को उन्हें बताना चाहिए था। पूर्व में 25 जून को शिकायतकर्ता ने दूसरे पक्ष से विवाद चलने की बात बताई थी जिस पर तत्काल जांच कराई गई थी। शिकायतकर्ता से यह भी कहा गया था कि अगर कोई समस्या आए तो सीधा उन्हें बताया जाए लेकिन ऐसा नहीं किया गया। वहीं, पुलिस ने सोमवार को शिवराम सिंह, उसके पुत्र आलोक सिंह और प्रतीक का चालान कर दिया। अन्य आरोपियों को नोटिस तामील कराए गए हैं।
एसपी से शिकायत करेगा पीड़ित पक्ष
शिकायतकर्ता लोकेश आर्य ने प्रभारी निरीक्षक पर आरोपियों का पक्ष लेने और उनके साथ अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया है। वह मंगलवार को एसपी से मिलकर शिकायत करेंगे। उन्होंने बताया कि प्रभारी निरीक्षक ने मुख्य आरोपी शिवराम सिंह को थाने बुलाकर बातचीत के बाद जाने दिया और बाद में दोबारा बुलाकर अपने कार्यालय में बैठाया। उनका कहना है कि जब उन्होंने इस संबंध में प्रभारी निरीक्षक से सवाल किया तो उन्होंने अभद्र भाषा का प्रयोग किया।
घटना के बाद मामले की रिपोर्ट दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। अगर पुलिस की लापरवाही सामने आएगी तो मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
-सौरभ दीक्षित, एसपी
बवाल की जानकारी मिली है। इस संबंध में एडीएम प्रशासन को रिपोर्ट देने के लिए निर्देशित किया गया है।
-धर्मेंद्र प्रताप सिंह, डीएम