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नवरात्र के चौथे दिन स्कंदमाता का हुआ पूजन
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नवरात्र के चौथे दिन चौक स्थित दुर्गा माता मंदिर में देवी मां के समक्ष दीप जलाते व प्रार्थना करते ?
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। शारदीय नवरात्र के चौथे दिन मां भगवती के स्कंदमाता स्वरूप की आराधना की गई। घरों में जहां स्तवन और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया गया। वहीं देवी मंदिरों में दर्शन के लिए भक्तों का पहुंचना सुबह से ही शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं ने देवी मां के दर्शन का आर्शीवाद मांगा।
सामान्य तौर पर नवरात्र में मां स्कंदमाता की पूजा का पांचवें दिन पूजन का विधान है, लेकिन इस बार नवरात्र आठ दिन होने की वजह से रविवार को देवी मां के पांचवें स्वरूप की पूजा-अर्चना की गई। सुबह से ही देवी मंदिरों में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का का पहुंचना शुरू हो गया था। नवरात्र में प्रतिपदा से नवमी तक व्रत रखने वाले भक्तों ने देवी मां का विधिवत पूजन किया। स्तवन व दुर्गा शप्तसती का पाठ किया गया।
आचार्य सत्यम दीक्षित के अनुसार संतान प्राप्ति के लिए स्कंदमाता की पूजा लाभकारी मानी जाती है। अगर संतान की तरफ से कोई कष्ट है तो उसका भी निवारण होता है। स्कंदमाता की पूजा में पीले फूल अर्पित करने, पीली चीजों का भोग लगाने, पीले वस्त्र धारण करने का विधान है। निसंतान दंपती द्वारा संतान प्राप्ति के लिए प्रार्थना करने पर देवी मां मनोकामना पूर्ति करती हैं।
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सामान्य तौर पर नवरात्र में मां स्कंदमाता की पूजा का पांचवें दिन पूजन का विधान है, लेकिन इस बार नवरात्र आठ दिन होने की वजह से रविवार को देवी मां के पांचवें स्वरूप की पूजा-अर्चना की गई। सुबह से ही देवी मंदिरों में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का का पहुंचना शुरू हो गया था। नवरात्र में प्रतिपदा से नवमी तक व्रत रखने वाले भक्तों ने देवी मां का विधिवत पूजन किया। स्तवन व दुर्गा शप्तसती का पाठ किया गया।
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आचार्य सत्यम दीक्षित के अनुसार संतान प्राप्ति के लिए स्कंदमाता की पूजा लाभकारी मानी जाती है। अगर संतान की तरफ से कोई कष्ट है तो उसका भी निवारण होता है। स्कंदमाता की पूजा में पीले फूल अर्पित करने, पीली चीजों का भोग लगाने, पीले वस्त्र धारण करने का विधान है। निसंतान दंपती द्वारा संतान प्राप्ति के लिए प्रार्थना करने पर देवी मां मनोकामना पूर्ति करती हैं।
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