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भक्ति को देखने के लिए लीन होना पड़ता है : ब्रजदास
Wed, 21 Feb 2024 05:01 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Wed, 21 Feb 2024 05:01 PM IST
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शाहजहांपुर में बुधवार को सुनाते अंकुर शुक्ला ब्रजदास। जागरुक: पाठक
शाहजहांपुर। टाउन हाल ओवरब्रिज के नजदीक सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद भावगत कथा के दूसरे दिन बुधवार को कथा व्यास पंडित अंकुर शुक्ला ब्रजदास ने मोक्ष प्राप्ति की कथा सुनाई।
ब्रजदास ने कहा कि जीवन जीना श्रीरामायण से सीखें। त्रिवेणी संगम में गंगा, जमुना, सरस्वती का मिलन होता है। गंगा-जमुना तो दिखाई देती है, लेकिन सरस्वती को कोई नहीं देख पाता। सरस्वती को देखने के लिए कई बार प्रयास करने पड़ते हैं, लेकिन सफलता नहीं मिलती। इसी तरह गीता में विज्ञान, वैराग्य और भक्ति है। विज्ञान और वैराग्य तो दिखाई देता है, लेकिन भक्ति नहीं दिखाई देती। भक्ति को देखने के लिए लीन होना पड़ता है। कथा व्यास ने कहा कि जीव का कल्याण भगवत भजन से होगा। जीव का जन्म प्रभु की भक्ति के लिए हुआ। प्रभु का भजन जो जीव नहीं करता है, पशु के समान होता है। आचार्य पं. डॉ. कान्हा कृष्ण शुक्ल ने मुख्य यजमान राम दास सक्सेना से व्यास पीठ का पूजन कराया। कथा में श्रवण शास्त्री, डीके सक्सेना, नरेश चंद्र, भगवान दास, वीरेंद्र, सर्वेश, विक्रम, आशीष, विजय, शुभम, शशि, रामकली, निशा, रानी आदि मौजूद रहे।
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ब्रजदास ने कहा कि जीवन जीना श्रीरामायण से सीखें। त्रिवेणी संगम में गंगा, जमुना, सरस्वती का मिलन होता है। गंगा-जमुना तो दिखाई देती है, लेकिन सरस्वती को कोई नहीं देख पाता। सरस्वती को देखने के लिए कई बार प्रयास करने पड़ते हैं, लेकिन सफलता नहीं मिलती। इसी तरह गीता में विज्ञान, वैराग्य और भक्ति है। विज्ञान और वैराग्य तो दिखाई देता है, लेकिन भक्ति नहीं दिखाई देती। भक्ति को देखने के लिए लीन होना पड़ता है। कथा व्यास ने कहा कि जीव का कल्याण भगवत भजन से होगा। जीव का जन्म प्रभु की भक्ति के लिए हुआ। प्रभु का भजन जो जीव नहीं करता है, पशु के समान होता है। आचार्य पं. डॉ. कान्हा कृष्ण शुक्ल ने मुख्य यजमान राम दास सक्सेना से व्यास पीठ का पूजन कराया। कथा में श्रवण शास्त्री, डीके सक्सेना, नरेश चंद्र, भगवान दास, वीरेंद्र, सर्वेश, विक्रम, आशीष, विजय, शुभम, शशि, रामकली, निशा, रानी आदि मौजूद रहे।
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