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मानसून एक्सप्रेस की तेजी से बाढ़ की आशंका बढ़ी
ब्यूरो /शाहजहांपुर
Updated Tue, 02 Aug 2016 11:07 PM IST
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जुलाई के अंतिम सप्ताह में मानसून एक्सप्रेस की रफ्तार में आई तेजी से जिले से होकर बहने वाली गंगा, रामगंगा समेत अन्य सहायक नदियों में बाढ़ की आशंका बढ़ गई है। इसीलिए जलालाबाद क्षेत्र के विकास खंड मिर्जापुर और कलान मेंगंगा, रामगंगा, बहगुल आदि नदियों के तटवर्ती गांवों के बाशिंदों ने सुरक्षित ठिकाने तलाश करने शुरू कर दिए हैं। पिछले 48 घंटे से कलान के भैंसार बांध पर गंगा 142.70 मीटर पर स्थिर है, लेकिन गर्रा का जल स्तर 25 सेमी बढ़ गया है।
बता दें कि गंगा और उसकी सहायक रामगंगा जिले के मिज्रापुर और कलान ब्लॉक समेत तिलहर तहसील के जैतीपुर ब्लॉक में एक-दूसरे के समानान्तर बहती हैं। बारिश में दोनों नदियां एकाकार होने पर उनके किनारे बसे सैकड़ों गांव टापू में बदल जाते हैं। स्थिति तब और खराब हो जाती है जब इन दोनों नदियों का पानी बहगुल नदी मेें पहुंच जाता है। वर्ष 2010 और 2011 में आई बाढ़ से तमाम गावों के लोगों को विस्थापन की त्रासदी का सामना करना पड़ा था।
इस वर्ष बाढ़ से परिवारों के विस्थापित होने की अभी नौबत नहीं आई है। इसके बावजूद नदियों के तेवर देख ग्रामीणों ने अपना कीमती सामान बाढ़ से बचाने के लिए दूरदराज की रिश्तेदारियों में पहुंचाना शुरू कर दिया है। प्रशासन ने जलालाबाद समेत तिलहर और सदर तहसील में 481 ऐसे गांव चिन्हित किए हैं जो सबसे पहले बाढ़ की चपेट में आते हैं। इन गांवों पर नजदीकी बाढ़ चौकियों का स्टाफ पैनी नजर रखे है।
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इधर, सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष को प्राप्त सूचनाओं के अनुसार मंगलवार को विभिन्न बैराजों से 1.63 लाख क्यूसेक पानी बहाया गया है। नरौरा से गंगा में 1.22 लाख क्यूसेक पानी रिलीज होने से भैंसार में गंगा का जल स्तर घटने के आसार नहीं हैं। बरेली के चौबारी में रामगंगा 13 सेमी बढ़कर 160.57 मीटर पर बह रही है। शहर के नजदीक गर्रा 25 सेमी बढ़कर 147.30 मीटर पर पहुंच गई है। ड्यूनी डॉम से 22251 क्यूसेक पानी बहाए जाने से गर्रा का वाटर लेवल और बढ़ने की आशंका है।
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बता दें कि गंगा और उसकी सहायक रामगंगा जिले के मिज्रापुर और कलान ब्लॉक समेत तिलहर तहसील के जैतीपुर ब्लॉक में एक-दूसरे के समानान्तर बहती हैं। बारिश में दोनों नदियां एकाकार होने पर उनके किनारे बसे सैकड़ों गांव टापू में बदल जाते हैं। स्थिति तब और खराब हो जाती है जब इन दोनों नदियों का पानी बहगुल नदी मेें पहुंच जाता है। वर्ष 2010 और 2011 में आई बाढ़ से तमाम गावों के लोगों को विस्थापन की त्रासदी का सामना करना पड़ा था।
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इस वर्ष बाढ़ से परिवारों के विस्थापित होने की अभी नौबत नहीं आई है। इसके बावजूद नदियों के तेवर देख ग्रामीणों ने अपना कीमती सामान बाढ़ से बचाने के लिए दूरदराज की रिश्तेदारियों में पहुंचाना शुरू कर दिया है। प्रशासन ने जलालाबाद समेत तिलहर और सदर तहसील में 481 ऐसे गांव चिन्हित किए हैं जो सबसे पहले बाढ़ की चपेट में आते हैं। इन गांवों पर नजदीकी बाढ़ चौकियों का स्टाफ पैनी नजर रखे है।
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इधर, सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष को प्राप्त सूचनाओं के अनुसार मंगलवार को विभिन्न बैराजों से 1.63 लाख क्यूसेक पानी बहाया गया है। नरौरा से गंगा में 1.22 लाख क्यूसेक पानी रिलीज होने से भैंसार में गंगा का जल स्तर घटने के आसार नहीं हैं। बरेली के चौबारी में रामगंगा 13 सेमी बढ़कर 160.57 मीटर पर बह रही है। शहर के नजदीक गर्रा 25 सेमी बढ़कर 147.30 मीटर पर पहुंच गई है। ड्यूनी डॉम से 22251 क्यूसेक पानी बहाए जाने से गर्रा का वाटर लेवल और बढ़ने की आशंका है।