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लापता व्यक्ति का शव कब्रिस्तान में मिला, हत्या का आरोप
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शाहजहांपुर। गांव के पास स्थित कब्रिस्तान में चार दिन से लापता व्यक्ति की बृहस्पतिवार सुबह लाश मिली। शव काफी फूल चुका था और पास में खून भी पड़ा था। घरवाले हत्या की आशंका जता रहे हैं। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया है। अभी घरवालों ने कोई तहरीर नहीं दी है।
जलालाबाद से सटे गांव सिकंदरपुर अफगानान निवासी 54 वर्षीय राकेश कोटेदार के यहां गल्ला तुलाई का काम करते थे। उनके बेटे गौरव ने बताया कि 11 अक्तूबर को दोपहर उसके पिता घर से निकले थे। शाम तक न लौटने पर उन्हें तलाश किया लेकिन कोई पता नहीं चला। कुछ लोगों ने बताया कि शाम को उन्हें बारहपत्थर चौराहे के पास नशे की हालत में देखा था। इसके बाद घरवाले सुबह होने का इंतजार करने लगे। अगले दिन शाम तक उनका कोई सुराग न लगने पर गौरव ने पुलिस को सूचना दी। जलालाबाद थाने की पुलिस ने राकेश की गुमशुदगी दर्ज कर ली गई। बृहस्पतिवार सुबह गांव के एक व्यक्ति ने शाहजहांपुर रोड से सिकंदरपुर गांव को जाने वाले रोड के किनारे कब्रिस्तान की बाउंड्रीवाल के किनारे राकेश का शव पड़ा देखा। कुछ देर में परिजन भी वहां पहुंच गए। गौरव के अनुसार पिता की पीठ पर चोट के निशान थे और गर्दन भी काफी सूजी हुई थी। जहां लाश मिली वहां कोई झाड़ी भी नहीं है। उसके घर से आधा किलोमीटर दूर है और वहां लोगों का आना-जाना रहता है। शव के पास खून भी पड़ा था। सीओ अरविंद सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। घरवालों ने कोई तहरीर नहीं दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
राकेश के तीन बेटे और दो बेटियां हैं। पत्नी की कई साल पहले मौत हो चुकी है। बड़े बेटे और दो बेटियों की शादी हो चुकी है। दो बेटे अभी छोटे हैं। राकेश के पास सिर्फ तीन बीघा जमीन है। ऐसे में बच्चों के सामने पिता की मौत के बाद बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
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गुमशुदगी को गंभीरता से नही लेती पुलिस
किसी के गायब होने की सूचना मिलने पर पुलिस गुमशुदगी दर्ज करने के बाद उस मामले में कोई जांच आगे नहीं बढ़ाती। बुधवार को बरामद हुए व्यापारी अंकित गुप्ता के शव का मामला हो या फिर राकेश का। अंकित के न मिलने पर उसके पिता हरिओम ने 12 सितम्बर को बाइक समेत गायब होने की गुमशुदगी दर्ज कराई थी जिसमें बाइक का नंबर भी दिया था। 13 सितम्बर की शाम पुलिस ने बरेली हाइवे के किनारे सुनसान जगह पर एक बाइक लावारिस हालत में बरामद की परंतु गुमशुदगी में दर्ज नंबर की तरफ ध्यान देने की जरूरत नहीं समझी। सिकंदरपुर से गायब हुए राकेश की भी 12 अक्तूबर को गुमशुदगी दर्ज कर ली गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
शव रखे वाहन को परिसर में लाने के लिए परिजनों को बुलानी पड़ी पुलिस
राकेश कुमार का शव जब पिकअप वाहन से पोस्टमार्टम हाउस लाया गया। तब उनके शव को पोस्टमार्टम हाउस परिसर में आने से रोक दिया गया। काफी कहने के बावजूद कर्मचारियों ने वाहन में रखे शव को अंदर नहीं आने दिया। परिजनों ने डायल 112 पर फोन करके शिकायत की। इसके बाद दो पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और वाहन को परिसर में लाया गया।
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जलालाबाद से सटे गांव सिकंदरपुर अफगानान निवासी 54 वर्षीय राकेश कोटेदार के यहां गल्ला तुलाई का काम करते थे। उनके बेटे गौरव ने बताया कि 11 अक्तूबर को दोपहर उसके पिता घर से निकले थे। शाम तक न लौटने पर उन्हें तलाश किया लेकिन कोई पता नहीं चला। कुछ लोगों ने बताया कि शाम को उन्हें बारहपत्थर चौराहे के पास नशे की हालत में देखा था। इसके बाद घरवाले सुबह होने का इंतजार करने लगे। अगले दिन शाम तक उनका कोई सुराग न लगने पर गौरव ने पुलिस को सूचना दी। जलालाबाद थाने की पुलिस ने राकेश की गुमशुदगी दर्ज कर ली गई। बृहस्पतिवार सुबह गांव के एक व्यक्ति ने शाहजहांपुर रोड से सिकंदरपुर गांव को जाने वाले रोड के किनारे कब्रिस्तान की बाउंड्रीवाल के किनारे राकेश का शव पड़ा देखा। कुछ देर में परिजन भी वहां पहुंच गए। गौरव के अनुसार पिता की पीठ पर चोट के निशान थे और गर्दन भी काफी सूजी हुई थी। जहां लाश मिली वहां कोई झाड़ी भी नहीं है। उसके घर से आधा किलोमीटर दूर है और वहां लोगों का आना-जाना रहता है। शव के पास खून भी पड़ा था। सीओ अरविंद सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। घरवालों ने कोई तहरीर नहीं दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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राकेश के तीन बेटे और दो बेटियां हैं। पत्नी की कई साल पहले मौत हो चुकी है। बड़े बेटे और दो बेटियों की शादी हो चुकी है। दो बेटे अभी छोटे हैं। राकेश के पास सिर्फ तीन बीघा जमीन है। ऐसे में बच्चों के सामने पिता की मौत के बाद बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
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गुमशुदगी को गंभीरता से नही लेती पुलिस
किसी के गायब होने की सूचना मिलने पर पुलिस गुमशुदगी दर्ज करने के बाद उस मामले में कोई जांच आगे नहीं बढ़ाती। बुधवार को बरामद हुए व्यापारी अंकित गुप्ता के शव का मामला हो या फिर राकेश का। अंकित के न मिलने पर उसके पिता हरिओम ने 12 सितम्बर को बाइक समेत गायब होने की गुमशुदगी दर्ज कराई थी जिसमें बाइक का नंबर भी दिया था। 13 सितम्बर की शाम पुलिस ने बरेली हाइवे के किनारे सुनसान जगह पर एक बाइक लावारिस हालत में बरामद की परंतु गुमशुदगी में दर्ज नंबर की तरफ ध्यान देने की जरूरत नहीं समझी। सिकंदरपुर से गायब हुए राकेश की भी 12 अक्तूबर को गुमशुदगी दर्ज कर ली गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
शव रखे वाहन को परिसर में लाने के लिए परिजनों को बुलानी पड़ी पुलिस
राकेश कुमार का शव जब पिकअप वाहन से पोस्टमार्टम हाउस लाया गया। तब उनके शव को पोस्टमार्टम हाउस परिसर में आने से रोक दिया गया। काफी कहने के बावजूद कर्मचारियों ने वाहन में रखे शव को अंदर नहीं आने दिया। परिजनों ने डायल 112 पर फोन करके शिकायत की। इसके बाद दो पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और वाहन को परिसर में लाया गया।