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दर्द से कराहते चालक को नहीं दिया सिक मेमो
ब्यूरो, अमर उजाला शाहजहांपुर
Updated Sun, 23 Oct 2016 12:08 AM IST
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दर्द से कराहते रेल ड्राइवर को चालकों की कमी के चलते सिक मेमो नहीं दिया गया। गंभीर हालत में चालक को जिला अस्पताल भर्ती कराया गया। सिक मेमो को लेकर लोको निरीक्षक और क्यू कंट्रोलर के बीच हाटटॉक भी हुई। बीमार ड्राइवर आवंटित काठगोदाम एक्सप्रेस को नहीं ले जा सका, इसकी शिकायत लोको प्रभारी ने मुरादाबाद के उच्चाधिकारियों को भेजी है। इससे रेल चालकों में आक्रोश है।
वाकया शुक्रवार रात करीब एक बजे का है। हावड़ा से काठगोदाम जाने वाली एक्सप्रेस ट्रेन के संचालन के लिए पीएस मीना को बुक किया गया था, रात करीब 11 बजे उन्हें सीने में तीव्र दर्द के चलते रेलवे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां कोई डाक्टर नहीं था। यहां तैनात कंपाउंडर ने सिक मेमो मांगते हुए जिला अस्पताल रेफर कराने की बात की।
मीना ने बताया कि जब सिक मेमो के लिए क्यू कंट्रोलर एनके राठौर से बात की तो उन्होंने कहा कि उच्चाधिकारियों ने सिक मेमो देने से मना किया है, आप ट्रेन का संचालन करें। मीना ने लोको निरीक्षक ओमप्रकाश को अवगत कराया। ओमप्रकाश ने मुरादाबाद कंट्रोल से बात कर चालक मीना को सिक मेमो देने की मांग की, लेकिन मेमो नहीं दिया गया। मेमो को लेकर लोको निरीक्षक और क्यू कंट्रोलर के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।
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उधर चालक मीना की हालत बिगड़ती देख घरवाले खुद उन्हें रेलवे अस्पताल से उठाकर जिला अस्पताल ले गए जहां उनको गंभीर हालत में भर्ती कर लिया गया। ऐसे में मीना आवंटित ट्रेन का संचालन नहीं कर सके और ड्यूटी से गैरहाजिर हो गए। इसकी शिकायत लोको प्रभारी ने मुरादाबाद के मंडलीय अधिकारियों से की है।
हमारे सीने में दर्द था। हमने सिक मेमो की मांगा तो क्यू कंट्रोलर ने मेमो नहीं दिया। ट्रेन चलाने में खुद को असहज महसूस कर रहा था। हालत बिगड़ने पर हमें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां पूर्ण विश्राम की सलाह दी गई है।- पीएस मीना, पीड़ित चालक
शेडयूल काठगोदाम एक्सप्रेस के लिए चालक टर्नअप नहीं हुए। उनकी गैरहाजिरी में पीछे से आ रहे चालक से ही गाड़ी को चलवाया गया, इसकी रिपोर्ट मंडलीय कार्यालय भेज दी गई है। उनकी बीमारी की सूचना हमारे संज्ञान में बाद में लाई गई है।
हरि कुमार त्रिवेदी, लोको प्रभारी
आखिर यात्रियों की सुरक्षा का कौन होगा जिम्मेदार
रोजा। रेल में चालकों की भारी कमी है, जिसके चलते यहां के चालक भारी तनाव में रहते हैं। बीमार होने की दशा में उन्हें रेलवे से चिकित्सा सुविधा तक नहीं मिल पाती। पीएस मीना प्रकरण से साफ हो गया है कि ट्रेनों के संचालन में चालकों के हितों की अनदेखी की जा रही है। सवाल यह है कि बीमार चालक एक्सप्रेस संचालन करें और कोई हादसा हो जाये तो यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किस पर होगी, इसका जवाब फिलहाल रेल अधिकारियों के पास नहीं है।
रामभरोसे चल रही रेल
रोजा। कहने को तो रेलवे ने यहां एक्सप्रेस चालक के 22 पद, पैसेंजर चालक के 44 पद और मालगाड़ी चालक के 141 पद स्वीकृत किए हैं, लेकिन इनके सापेक्ष एक्सप्रेस के मात्र 18, पैसेंजर के 34 और मालगाड़ी के 70 चालकों को तैनाती दी गई है। कुल 207 चालको के स्थान पर मात्र 122 चालकों से संचालन कराया जा रहा है। सह चालकों के 203 पदों के सापेक्ष 148 सह चालक ही काम कर रहे हैं। चर्चा है कि संरक्षा नियमों की अनदेखी कर चालकों को पूर्ण विश्राम तक नहीं दिया जाता।
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वाकया शुक्रवार रात करीब एक बजे का है। हावड़ा से काठगोदाम जाने वाली एक्सप्रेस ट्रेन के संचालन के लिए पीएस मीना को बुक किया गया था, रात करीब 11 बजे उन्हें सीने में तीव्र दर्द के चलते रेलवे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां कोई डाक्टर नहीं था। यहां तैनात कंपाउंडर ने सिक मेमो मांगते हुए जिला अस्पताल रेफर कराने की बात की।
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मीना ने बताया कि जब सिक मेमो के लिए क्यू कंट्रोलर एनके राठौर से बात की तो उन्होंने कहा कि उच्चाधिकारियों ने सिक मेमो देने से मना किया है, आप ट्रेन का संचालन करें। मीना ने लोको निरीक्षक ओमप्रकाश को अवगत कराया। ओमप्रकाश ने मुरादाबाद कंट्रोल से बात कर चालक मीना को सिक मेमो देने की मांग की, लेकिन मेमो नहीं दिया गया। मेमो को लेकर लोको निरीक्षक और क्यू कंट्रोलर के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।
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उधर चालक मीना की हालत बिगड़ती देख घरवाले खुद उन्हें रेलवे अस्पताल से उठाकर जिला अस्पताल ले गए जहां उनको गंभीर हालत में भर्ती कर लिया गया। ऐसे में मीना आवंटित ट्रेन का संचालन नहीं कर सके और ड्यूटी से गैरहाजिर हो गए। इसकी शिकायत लोको प्रभारी ने मुरादाबाद के मंडलीय अधिकारियों से की है।
हमारे सीने में दर्द था। हमने सिक मेमो की मांगा तो क्यू कंट्रोलर ने मेमो नहीं दिया। ट्रेन चलाने में खुद को असहज महसूस कर रहा था। हालत बिगड़ने पर हमें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां पूर्ण विश्राम की सलाह दी गई है।- पीएस मीना, पीड़ित चालक
शेडयूल काठगोदाम एक्सप्रेस के लिए चालक टर्नअप नहीं हुए। उनकी गैरहाजिरी में पीछे से आ रहे चालक से ही गाड़ी को चलवाया गया, इसकी रिपोर्ट मंडलीय कार्यालय भेज दी गई है। उनकी बीमारी की सूचना हमारे संज्ञान में बाद में लाई गई है।
हरि कुमार त्रिवेदी, लोको प्रभारी
आखिर यात्रियों की सुरक्षा का कौन होगा जिम्मेदार
रोजा। रेल में चालकों की भारी कमी है, जिसके चलते यहां के चालक भारी तनाव में रहते हैं। बीमार होने की दशा में उन्हें रेलवे से चिकित्सा सुविधा तक नहीं मिल पाती। पीएस मीना प्रकरण से साफ हो गया है कि ट्रेनों के संचालन में चालकों के हितों की अनदेखी की जा रही है। सवाल यह है कि बीमार चालक एक्सप्रेस संचालन करें और कोई हादसा हो जाये तो यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किस पर होगी, इसका जवाब फिलहाल रेल अधिकारियों के पास नहीं है।
रामभरोसे चल रही रेल
रोजा। कहने को तो रेलवे ने यहां एक्सप्रेस चालक के 22 पद, पैसेंजर चालक के 44 पद और मालगाड़ी चालक के 141 पद स्वीकृत किए हैं, लेकिन इनके सापेक्ष एक्सप्रेस के मात्र 18, पैसेंजर के 34 और मालगाड़ी के 70 चालकों को तैनाती दी गई है। कुल 207 चालको के स्थान पर मात्र 122 चालकों से संचालन कराया जा रहा है। सह चालकों के 203 पदों के सापेक्ष 148 सह चालक ही काम कर रहे हैं। चर्चा है कि संरक्षा नियमों की अनदेखी कर चालकों को पूर्ण विश्राम तक नहीं दिया जाता।