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खरबूजे को भारी नुकसान पहुंचा रहा मोजेक
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पुवायां। मोजेक नाम का वायरस खरबूजे की फसल को भारी नुकसान पहुंचा रहा है, जिस कारण किसान इसे फसलों का ‘कोरोना’ कहने लगे हैं। एक बेल को चपेट में लेने के बाद यह खेत में तेजी से फैलने लगता है। इस कारण यह वायरस किसानों को बड़ा घाटा दे सकता है।
पुवायां तहसील क्षेत्र में साठा धान की खेती बड़े पैमाने पर की जाती थी। मगर साठा पर प्रतिबंध लगा तो किसानों ने विकल्प के तौर पर खरबूजा, मक्का, तुलसी, सूरजमुखी, लौकी, टमाटर आदि की खेती की ओर रुख किया है। पुवायां में खरबूजा पहले भी बड़े क्षेत्रफल में किया जाता रहा है और पुवायां का खीरा उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक सप्लाई होता है, लेकिन साठा पर रोक के बाद इसका क्षेत्रफल और भी बढ़ गया है। मगर मोजेक वायरस खरबूजा को चौपट करने में लगा है। पुवायां निवासी जल कल विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारी अशोक कुमार ने गांव इनायतपुर के पास ठेके पर खेत लेकर खरबूजा लगा रखा है। अशोक कुमार ने बताया कि इस बार खरबूजा उगाने वालों को भारी नुकसान की आशंका है। अभी फसल तैयार ही हो रही है और मोजेक ने हमला कर दिया है। मोजेक एक बेल से दूसरी बेल को तेजी से अपनी चपेट में लेना शुरू कर देता है, जिससे बेल और उसमें लगे छोटे फल सूख जाते हैं। अशोक कुमार ने बताया कि जिस बेल में मोजेक वायरस लग जाता है वे लोग उसे उखाड़कर खेत से दूर गड्ढा खोद कर दबा देते हैं, जिससे यह पूरे खेत में न फैल सके। इसके बावजूद यह वायरस फसल को भारी नुकसान पहुंचा रहा है।
स्प्रे से पाया जा सकता है काबू
कृषि विज्ञान केंद्र शाहजहांपुर के वैज्ञानिक डॉ. एसके वर्मा के अनुसार मोजेक एक प्रकार का वायरस है जो एक पौधे से दूसरे पौधे को तेजी से अपनी चपेट में लेता है। वायरस के हमले के शिकार पौधे को उखाड़ कर खेत से दूर नष्ट कर देना विकल्प तो हो सकता है लेकिन समाधान नहीं है। मोजेक का हमला होने पर यदि प्रकोप कम है तो एसीटाप्रॉमिड दो एमएल एक लीटर में घोल कर स्प्रे करना चाहिए। रोग ज्यादा है तो एसीटाप्रॉमिड दो एमएल और इमडाक्लोर एक एमएल को मिलाकर एक लीटर पानी में घोल बनाकर स्प्रे करने से लाभ होगा।
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पुवायां तहसील क्षेत्र में साठा धान की खेती बड़े पैमाने पर की जाती थी। मगर साठा पर प्रतिबंध लगा तो किसानों ने विकल्प के तौर पर खरबूजा, मक्का, तुलसी, सूरजमुखी, लौकी, टमाटर आदि की खेती की ओर रुख किया है। पुवायां में खरबूजा पहले भी बड़े क्षेत्रफल में किया जाता रहा है और पुवायां का खीरा उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक सप्लाई होता है, लेकिन साठा पर रोक के बाद इसका क्षेत्रफल और भी बढ़ गया है। मगर मोजेक वायरस खरबूजा को चौपट करने में लगा है। पुवायां निवासी जल कल विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारी अशोक कुमार ने गांव इनायतपुर के पास ठेके पर खेत लेकर खरबूजा लगा रखा है। अशोक कुमार ने बताया कि इस बार खरबूजा उगाने वालों को भारी नुकसान की आशंका है। अभी फसल तैयार ही हो रही है और मोजेक ने हमला कर दिया है। मोजेक एक बेल से दूसरी बेल को तेजी से अपनी चपेट में लेना शुरू कर देता है, जिससे बेल और उसमें लगे छोटे फल सूख जाते हैं। अशोक कुमार ने बताया कि जिस बेल में मोजेक वायरस लग जाता है वे लोग उसे उखाड़कर खेत से दूर गड्ढा खोद कर दबा देते हैं, जिससे यह पूरे खेत में न फैल सके। इसके बावजूद यह वायरस फसल को भारी नुकसान पहुंचा रहा है।
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स्प्रे से पाया जा सकता है काबू
कृषि विज्ञान केंद्र शाहजहांपुर के वैज्ञानिक डॉ. एसके वर्मा के अनुसार मोजेक एक प्रकार का वायरस है जो एक पौधे से दूसरे पौधे को तेजी से अपनी चपेट में लेता है। वायरस के हमले के शिकार पौधे को उखाड़ कर खेत से दूर नष्ट कर देना विकल्प तो हो सकता है लेकिन समाधान नहीं है। मोजेक का हमला होने पर यदि प्रकोप कम है तो एसीटाप्रॉमिड दो एमएल एक लीटर में घोल कर स्प्रे करना चाहिए। रोग ज्यादा है तो एसीटाप्रॉमिड दो एमएल और इमडाक्लोर एक एमएल को मिलाकर एक लीटर पानी में घोल बनाकर स्प्रे करने से लाभ होगा।
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