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महियावर में खेतों से घरों को लौटे लोग

मदनापुर (शाहजहांपुर)। Updated Fri, 11 Dec 2015 11:29 PM IST
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Mahiavr people returned to the homes of farms
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मदनापुर थाना क्षेत्र के गांव महियावर में गन्ने की खेत में धरने पर बैठे हिस्ट्रीशीटर करन सिंह और सत्यपाल सिंह के परिवारवाले और समर्थक शुक्रवार को घरों को लौट गए। एसडीएम सदर एपी श्रीवास्तव और सीओ सदर अनुराग दर्शन ने क्षेत्र के कुछ संभ्रांत लोगों को साथ ले जाकर खेतों में बैठी महिलाओं और ग्रामीणों से वार्ता कर उन्हें भरोसा दिलाया कि निर्दोष लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी और प्रकरण की वैज्ञानिक तरीके से निश्चयात्मक जांच कर निर्दोषों का नाम केस से अलग कर दिया जाएगा।
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ग्राम पंचायत चुनाव के दूसरे चरण के मतदान के दौरान एक दिसंबर को मतदान के आखिरी क्षणों में कुछ दबंग बूथ पर पहुंच गए थे और मतदान कर्मचारियों से जबरन मतदाता सूची छीनकर बाकी बचे वोट डालने की कोशिश की, लेकिन ड्यूटी पर तैनात दरोगा रामचंद्र ने इसका विरोध किया तो दबंगों ने दरोगा की पिटाई कर दी थी। इस मामले में पुलिस ने 11 लोगों को नामजद और 25 अज्ञात हमलावरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। गन्ने की खेत में बैठे लोगों कहा कि उन्हें यह डर सता रहा है कि ये उस प्रकरण में थे भी नहीं और फिर भी कहीं पुलिस इन्हें फंसा न दे।  


भाजपा ने न्यायिक जांच की मांग की
शाहजहांपुर। मदनापुर के महियावर गांव में पुलिस के भय से खेतों में बैठे ग्रामीणों से मिलने शुक्रवार को भाजपा का एक प्रतिनिधिमंडल क्षेत्रीय महामंत्री जेपीएस राठौर की अगुवाई में पहुंचा। ग्रामीणों से वार्ता के बाद क्षेत्रीय महामंत्री ने गत एक दिसंबर को दारोगा की पिटाई के आरोप में गिरफ्तार राजेंद्र को निर्दोष बताया और उसे रिहा करने की मांग की। उन्होंने कहा कि राजेंद्र के घर पर बेटी का जन्मोत्सव मनाया जा रहा था और दबिश देने पहुंची पुलिस ने पूरे आयोजन में खलल डाला एवं निर्दोष को गिरफ्तार कर ले गई। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की न्यायिक जांच कराई जाए। प्रतिनिधिमंडल में जिलाध्यक्ष वीरेंद्र पाल सिंह यादव, रजनीश दीक्षित आदि शामिल थे।
सपा विधायक का वर्जन
मदनापुर, कलान और तिलहर थाने की पुलिस बेलगाम हो गई है। महियावर में जो हिस्ट्रीशीटर हैं, उनके परिवारवाले तो अपराध में लिप्त नहीं हैं तो उन्हें क्यों आतंकित किया जा रहा है। पूरे भय का माहौल बनाया गया है। यह गांव अपने विधानसभा क्षेत्र में नहीं पड़ता लेकिन व्यापक जनहित में इस प्रकरण में अखबारों में छपी खबरों की कटिंग लेकर लखनऊ आया हूं लेकिन मुख्यमंत्री के दिल्ली में होने के चलते मुलाकात नहीं हो पाई। अब इस मामले में 15 को डीजीपी से मुलाकात करूंगा।
- राजेश यादव, कटरा से सपा विधायक।

दो हिस्ट्रीशीटरों का है क्षेत्र में आतंक
शाहजहांपुर। मदनापुर के गांव महियावर में पुलिस के आतंक से ग्रामीणों के घर से पलायन और खेतों में जाकर छुपे होने की कहानी की जमीनी हकीकत कुछ और ही है। ठंड की रात में खुले आसमान के नीचे गन्ने की खेत में रुकने की बात यहां बैठी महिलाओं ने ही नकार दी। प्रधान पद के जिस प्रत्याशी राहुल सिंह ने मतदान खत्म होने के दौरान दारोगा द्वारा सिर पर डंडे से वार करने के चलते गिरने का आरोप लगाया था, उसकी मेडिकल जांच रिपोर्ट में नो इंजरी मार्क का जिला अस्पताल में उल्लेख है। इसके पिता सत्यपाल और ताऊ करन सिंह मदनापुर थाना के हिस्ट्रीशीटर हैं और दोनों ही दो हत्याओं के मामले में आजीवन कारावास की सजायाफ्ता मुजरिम हैं एवं पंचायत चुनाव से पहले हाईकोर्ट के आदेश पर जमानत में छूटकर गांव आए थे।
हत्या, बलवा, जानलेवा हमले आदि के 40 केस करन पर दर्ज हैं तो सत्यपाल पर 26। मौजूदा प्रकरण की पूरी कहानी की शुरूआत गत 13 अक्तूबर को जिला पंचायत चुनाव के मतदान के आखिरी समय में बूथ में मतपत्र लेकर फाड़ने की घटना से हुई। उस मामले में पुलिस ने करन सिंह और सपा विधायक राजेश यादव के रिश्ते के भाई सुरेश यादव जेल भेजे गए थे। बाद में सभी जमानत पर छूटे। सत्ताधारी होने के बावजूद पुलिस में अपनी सुनवाई न होने नाखुश इन लोगों ने प्रधानी के चुनाव तक शांति धारण कर रखा था। गत एक दिसंबर को प्रधानी के लिए वोटिंग के दौरान राहुल सिंह और परिवारवालों ने नाबालिग वोटरों से मतदान कराने की कई बार कोशिश की थी और हर बार वहां तैनात दारोगा रामचंद्र ने कड़ाई से उसका विरोध किया। उसी पर मतदान खत्म होने से ऐन पहले राहुल और उसके समर्थक बूथ पर पहुंचे मतपेटिकाएं लेकर पोलिंग पार्टियों की वापसी के दौरान अचानक दारोगा के समक्ष जाकर राहुल गिरा और दारोगा पर पिटाई करने का आरोप लगाया। उसी पर आक्रोशित साथी ग्रामीणों ने पोलिंग पार्टी को घेर लिया और दारोगा की पिटाई कर दी थी। पोलिंग पार्टी की पहचान पर पुलिस ने राहुल को उसी रात गांव से गिरफ्तार कर लिया था। उसके साथ रहने की आशंका में गांव के रामचंद्र को भी पुलिस उठा ले गई थी। बाद में करन सिंह समेत अन्य चार आरोपियों ने कोर्ट में सरेंडर किया और इस समय सभी जेल में हैं।
गांव में गत दो अक्तूबर के बाद पुलिस की दबिश नहीं पड़ी, लेकिन उस मामले में नामजद इन हिस्ट्रीशीटरों के परिवारवालों को अपने गिरफ्तारी की आशंका सता रही थी। उसी क्रम में पुलिस के आतंक की कहानी गढ़ी गई। सीओ सदर अनुराग दर्शन ने कहा कि कहानी कुछ भी रही हो लेकिन अब इसका पटाक्षेप हो गया है। निष्पक्ष विवेचना कराई जा रही है और सारे तथ्य सामने आ जाएंगे।
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