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भाइयों की कलाई पर सजा बहनों का प्यार

Sat, 29 Aug 2015 11:48 PM IST
शाहजहांपुर।
शाहजहांपुर। Updated Sat, 29 Aug 2015 11:48 PM IST
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Loving brothers and sisters on the wrist sentence
 भाई-बहन के अमर प्रेम के प्रतीक रक्षाबंधन पर्व की जिलेभर में धूम रही। हालांकि राखी बांधने का शुभ समय अपराह्न 1.49 बजे के बाद का घोषित किया गया था, इसके बावजूद चारों ओर उल्लास का वातावरण रहा। बाजारों में राखी, मिठाई, उपहार आदि खरीदने के लिए भीड़ रही। इन्हीं आइटमों की दुकानें खुली भी थीं, शेष मार्केट पूरी तरह बंद रहे। चूंकि राखी बांधने का समय काफी देर से था, इसलिए महिलाओं ने फुर्सत से घरों में तमाम प्रकार के व्यंजन पकाए गए।  
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रक्षाबंधन पर्व पर राखी बंधवाने और बांधने की तैयारियां सुबह से ही घरों में शुरू हो गई थीं। एक ओर रसोईघरों से व्यंजनों की खुशबू आ रही थी, तो दूसरी ओर बच्चे और युवा राखी बंधवाने के लिए उत्साहित दिखाई दे रहे थे। बहनों ने उपवास रखकर भाइयों को रोली तिलक कर राखी बांधी और मिष्ठान खिलाकर उनके दीर्घायु की कामना की। भाइयों ने नकद दक्षिणा के अलावा बहनों को उपहार देकर उनका आशीर्वाद लिया। राखी बांधने और बंधवाने का असली आनंद तो बच्चों ने लिया। उन्हें चाकलेट समेत कई कीमती और मनचाहे उपहार मिले।
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भाइयों को राखी बांधने के लिए गैर जनपदों से बहनों का आना सुबह से शुरू हुआ। बसें और ट्रेनें फुल थीं, भीड़ और भीषण गर्मी के बावजूद बहनों ने भाइयों के घर पहुंचकर उन्हें राखी बांधी। राखी बांधने के बाद ही सभी ने एक साथ भोजन कर पर्व की खुशियों को बांटा। तमाम व्यंजनों के साथ लगभग सभी घरों में परंपरानुसार सेवइयां भी पकाई गईं।
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मिठाई की दुकानों पर लगी रहीं कतारें
रक्षाबंधन पर जितना महत्व राखी बांधने का है, उतना ही मिष्ठान का भी है। बहनें राखी बांधने बाद भाइयों को मिठाई खिलाती हैं। इसलिए मिठाई की दुकानों पर शुक्रवार की दोपहर से जो भीड़ जुटनी शुरू हुई वह आधी रात के बाद तक बदस्तूर जारी रही। शनिवार को सुबह होते ही मिष्ठान भंडारों पर फिर भीड़ उमडनी शुरू हो गई। कुछ नामी-गिरामी दुकानदारों के यहां तो कुछ समय ही सारे आइटम साफ हो गए, कुछ शनिवार को भी देर रात तक लिए बैठे रहे।


रिक्शे और ऑटो में भी नहीं मिली जगह
त्योहार के कारण शहर में रिक्शे और ऑटो भी फुल ही चले। भीड़ के कारण इन लोगों ने मनमाफिक किराया भी वसूला, इसके बावजूद तमाम बहनों को बस अड्डे और रेलवे स्टेशन से पैदल ही जाते देखा गया। उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
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