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लिपुलेख-भिंड हाईवे के गड्ढे तो भरे, लेकिन पुलिया बनी खतरा
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निगोही के बलेली मछली फार्म के निकट कटा हुआ मागज् । संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर/निगोही। शहर से निगोही की ओर निकलते ही गदियाना से लेकर सतवां खुर्द तक लिपुलेख-भिंड हाईवे गड्ढों में तब्दील हो चुका है। उधर, चौड़ीकरण कार्य के तहत निगोही-तिलहर मार्ग सात मीटर चौड़ा किया जा चुका है, लेकिन पिपरिया खुशाली गांव के पास पुलिया अभी तक नहीं बन सकी। इसका देर से प्रस्ताव जाने के कारण मंजूरी भी बाद में मिली, लेकिन काम की रफ्तार अभी तक सुस्त बनी हुई है। ज्ञात हो कि योगी सरकार ने पिछले कार्यकाल की शुरुआत में राष्ट्रीय व राजकीय राजमार्गों के अलावा जिला मार्गों को गड्ढा मुक्त करने का विशेष अभियान चलाया था।
दो राजमार्गों के यातायात के बोझ से जर्जर हुई सड़क
आवागमन की बेहतर सुविधा देने के लिए लखनऊ-दिल्ली हाईवे को फोरलेन निर्मित करने की स्वीकृति मिलने के बाद उसके निर्माण कार्य में रुकावट बनी रही। निर्माण शुरू होने में करीब 11 वर्ष का समय लग गया। इस दौरान हुलासनगरा क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज के नहीं बन पाने से वहां पनपी जाम की समस्या से बचने के लिए दिल्ली-लखनऊ जाने वाले अधिकांश भारी वाहन लिपुलेख-भिंड राष्ट्रीय राजमार्ग से शाहजहांपुर, निगोही, वाया बीसलपुर होते हुए बरेली से होकर निकलने लगे। चूंकि, चीन सीमा से जुड़ने वाले सामरिक महत्व के लिपुलेख-भिंड हाईवे पर पहले से ही वाहनों का दबाव था। इसलिए, लखनऊ-दिल्ली हाईवे के वाहन इस रोड पर निकलने शुरू हुए तो दो हाईवे के यातायात का बोझ पड़ने से यह मार्ग कई जगह छलनी हो गया।
बलेली से शाहजहांपुर तक गड्ढों से पहुंचना मुश्किल
बीते वर्ष इस हाईवे पर बीसलपुर-शाहजहांपुर के बीच गांव गुलेंदा से गुरगवां तक मार्ग की मरम्मत करा दी गई थी। बीते विधानसभा चुनाव से पहले गांव गुरगवां से शाहजहांपुर की ओर कुछ दूरी तक गहरे गड्ढे रोड़ी और ऊपर से बजरी-कोलतार का मिश्रण डालकर भरवा दिये गए, लेकिन निगोही- शाहजहांपुर के बीच गांव बलेली से शाहजहांपुर के बीच आठ किमी मार्ग यातायात के दोहरे दबाव से जीर्ण-शीर्ण हो चुका है। इस वजह से मार्ग के इस हिस्से में आवागमन में भारी समस्या बनी हुई है। मार्ग पर बने गड्ढों से वाहन गुजरने पर झटके लगने से प्रसव पीड़ित महिलाओं को नजदीकी अस्पताल तक ले जाने में भारी दिक्कत होती है। कई बार प्रसव एंबुलेंस में ही हो चुका है। गड्ढों से मार्ग के इस हिस्से में दुर्घटनाएं होना आम बात हो चुकी है।
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राघवपुर के पास पुलिया की टूटी रेलिंग
लिपुलेख-भिंड राजमार्ग पर निगोही-शाहजहांपुर के बीच गांव राघवपुर सिकंदरपुर के पास बनी पुलिया के दोनों ओर की रेलिंग किसी वाहन की टक्कर से गत एक वर्ष से टूटी हुई है। ऊंचाई पर स्थित इस पुलिया के दोनों ओर गहरे खड्ड है। इसलिए पुलिया पर आमने-सामने वाहन आ जाने से अक्सर दुर्घटनाएं हो जाना आम बात है। इसी मार्ग पर बलेली मछली फार्म के सामने मार्ग पर गहरा गड्ढा दुर्घटनाओं की वजह बन गया है।
एक माह में नहीं पड़ा पुलिया का लिंटर
निगोही-तिलहर मार्ग के चौड़ीकरण का काम कई माह पहले पूर्ण हो चुका है, लेकिन रास्ते की पुलियों के निर्माण में लोक निर्माण विभाग के ठेकेदार सुस्त गति से काम करा रहे हैं। इससे आवागमन में भारी समस्या बनी हुई है। इसी मार्ग पर गांव पिपरिया खुशाली व बिरासिन गांव के बीच पुलिया का निर्माण बमुश्किल एक वर्ष में पूर्ण हो सका। वर्तमान में पिपरिया खुशाली के नजदीक शारदा नहर माइनर की पुलिया का निर्माण एक माह से चल रहा है, लेकिन काम की गति बहुत धीमी होने से अभी तक कंक्रीट की स्लैब नहीं पड़ सकी। इससे लोगों को आवागमन में कठिनाई हो रही है।
सड़कों की मरम्मत और उनके रखरखाव का काम हर साल नियमित रूप से कराया जाता है, लेकिन यातायात इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि वाहनों के दबाव से वह जल्दी खराब हो रही हैं। ठेकेदारों के स्तर से कराए जाने वाले कामों की गुणवत्ता जांच के बाद ही उन्हें भुगतान किया जाता है। जो रास्ते क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, उनका सर्वे कराया जा रहा है, ताकि उन्हें जन प्रतिनिधियों के प्रस्ताव अथवा विभाग की कार्य योजना में शामिल किया जा सके। -राजकुमार पिथौरिया, अधिशासी अभियंता, लोनिवि (प्रांतीय खंड)
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दो राजमार्गों के यातायात के बोझ से जर्जर हुई सड़क
आवागमन की बेहतर सुविधा देने के लिए लखनऊ-दिल्ली हाईवे को फोरलेन निर्मित करने की स्वीकृति मिलने के बाद उसके निर्माण कार्य में रुकावट बनी रही। निर्माण शुरू होने में करीब 11 वर्ष का समय लग गया। इस दौरान हुलासनगरा क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज के नहीं बन पाने से वहां पनपी जाम की समस्या से बचने के लिए दिल्ली-लखनऊ जाने वाले अधिकांश भारी वाहन लिपुलेख-भिंड राष्ट्रीय राजमार्ग से शाहजहांपुर, निगोही, वाया बीसलपुर होते हुए बरेली से होकर निकलने लगे। चूंकि, चीन सीमा से जुड़ने वाले सामरिक महत्व के लिपुलेख-भिंड हाईवे पर पहले से ही वाहनों का दबाव था। इसलिए, लखनऊ-दिल्ली हाईवे के वाहन इस रोड पर निकलने शुरू हुए तो दो हाईवे के यातायात का बोझ पड़ने से यह मार्ग कई जगह छलनी हो गया।
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बलेली से शाहजहांपुर तक गड्ढों से पहुंचना मुश्किल
बीते वर्ष इस हाईवे पर बीसलपुर-शाहजहांपुर के बीच गांव गुलेंदा से गुरगवां तक मार्ग की मरम्मत करा दी गई थी। बीते विधानसभा चुनाव से पहले गांव गुरगवां से शाहजहांपुर की ओर कुछ दूरी तक गहरे गड्ढे रोड़ी और ऊपर से बजरी-कोलतार का मिश्रण डालकर भरवा दिये गए, लेकिन निगोही- शाहजहांपुर के बीच गांव बलेली से शाहजहांपुर के बीच आठ किमी मार्ग यातायात के दोहरे दबाव से जीर्ण-शीर्ण हो चुका है। इस वजह से मार्ग के इस हिस्से में आवागमन में भारी समस्या बनी हुई है। मार्ग पर बने गड्ढों से वाहन गुजरने पर झटके लगने से प्रसव पीड़ित महिलाओं को नजदीकी अस्पताल तक ले जाने में भारी दिक्कत होती है। कई बार प्रसव एंबुलेंस में ही हो चुका है। गड्ढों से मार्ग के इस हिस्से में दुर्घटनाएं होना आम बात हो चुकी है।
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राघवपुर के पास पुलिया की टूटी रेलिंग
लिपुलेख-भिंड राजमार्ग पर निगोही-शाहजहांपुर के बीच गांव राघवपुर सिकंदरपुर के पास बनी पुलिया के दोनों ओर की रेलिंग किसी वाहन की टक्कर से गत एक वर्ष से टूटी हुई है। ऊंचाई पर स्थित इस पुलिया के दोनों ओर गहरे खड्ड है। इसलिए पुलिया पर आमने-सामने वाहन आ जाने से अक्सर दुर्घटनाएं हो जाना आम बात है। इसी मार्ग पर बलेली मछली फार्म के सामने मार्ग पर गहरा गड्ढा दुर्घटनाओं की वजह बन गया है।
एक माह में नहीं पड़ा पुलिया का लिंटर
निगोही-तिलहर मार्ग के चौड़ीकरण का काम कई माह पहले पूर्ण हो चुका है, लेकिन रास्ते की पुलियों के निर्माण में लोक निर्माण विभाग के ठेकेदार सुस्त गति से काम करा रहे हैं। इससे आवागमन में भारी समस्या बनी हुई है। इसी मार्ग पर गांव पिपरिया खुशाली व बिरासिन गांव के बीच पुलिया का निर्माण बमुश्किल एक वर्ष में पूर्ण हो सका। वर्तमान में पिपरिया खुशाली के नजदीक शारदा नहर माइनर की पुलिया का निर्माण एक माह से चल रहा है, लेकिन काम की गति बहुत धीमी होने से अभी तक कंक्रीट की स्लैब नहीं पड़ सकी। इससे लोगों को आवागमन में कठिनाई हो रही है।
सड़कों की मरम्मत और उनके रखरखाव का काम हर साल नियमित रूप से कराया जाता है, लेकिन यातायात इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि वाहनों के दबाव से वह जल्दी खराब हो रही हैं। ठेकेदारों के स्तर से कराए जाने वाले कामों की गुणवत्ता जांच के बाद ही उन्हें भुगतान किया जाता है। जो रास्ते क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, उनका सर्वे कराया जा रहा है, ताकि उन्हें जन प्रतिनिधियों के प्रस्ताव अथवा विभाग की कार्य योजना में शामिल किया जा सके। -राजकुमार पिथौरिया, अधिशासी अभियंता, लोनिवि (प्रांतीय खंड)