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सलाखों के पीछे भी फैल रहा शिक्षा का उजियारा

Fri, 22 Apr 2022 12:34 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 22 Apr 2022 12:34 AM IST
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Light of education spreading even behind bars
शाहजहांपुर जिला कारागार । संवाद - फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। जिला कारागार के बंदी न सिर्फ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने को बेताब हैं, बल्कि जेल से बाहर आकर समाज की मुख्य धारा में भी शामिल होने की चाह रखते हैं। जेल प्रशासन भी उनके भविष्य की राह दिखाने में प्रयासरत है। तमाम बंदियों ने हाईस्कूल से बीए तक अकादमिक पढ़ाई में दिलचस्पी दिखाई तो कई ऐसे बंदी भी हैं, जिन्होंने कमाई करने के लिए व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को अपनाने में रुचि दिखाई है।
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जिला कारागार में 1500 पुरुष बंदी, 55 महिलाएं बंद हैं। इनके साथ आठ बच्चे भी रह रहे हैं। जेल में तमाम बंदी गंभीर अपराध तो कुछ छोटे मामलों में विचाराधीन हैं। अपराधियों के बीच में रहने के बाद भी छोटी सजा में निरुद्ध बंदियों ने भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए आत्मनिर्भर बनने के लिए अपनी पढ़ाई पर विराम नहीं लगाया। इग्नू के जरिये छोटे मामलों में कैद बंदी व्यावसायिक कोर्स कर शिक्षा को आगे बढ़ा रहे हैं।
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सर्टिफिकेट इन टूरिज्म, सर्टिफिकेट इन फूड एंड न्यूटीशियन, सर्टिफिकेट इन ह्यूमन राइट, सर्टिफिकेट इन गाइडेंस, सर्टिफिकेट इन इनवॉयरमेंट स्टडी, बैचलर इन प्रीपैंट्री प्रोग्राम, सर्टिफिकेट इन रूरल डेवलपमेंट जैसे व्यावसायिक कोर्स को चुनकर बंदी भविष्य के रास्ते खोल रहे हैं। जेल प्रशासन भी ऐसे बंदियों की निसंकोच मदद कर रहा है। पढ़ाई के लिए फार्म भरवाने से लेकर अन्य संसाधनों को भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
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473 बंदियों ने तीन साल में किया व्यावसायिक कोर्स
जिला कारागार के 473 बंदियों ने तीन साल में व्यावसायिक कोर्स कर अंक तालिका को हासिल किया। 2019 के इग्नू के जनवरी से जून के सत्र में 201 बंदियों ने विभिन्न कोर्स किए। जुलाई से दिसंबर का सत्र कोरोना की भेंट चढ़ गया। 2020 में पहले सत्र में 103 और दूसरे में 51 और 2021 में जून के सत्र में 118 बंदियों ने परीक्षा पास की है। जबकि जुलाई का सत्र कोरोना के कारण पूरा नहीं हो सका।

जिला कारागार में इग्नू का स्टडी सेंटर पंजीकृत हैं। व्यावसायिक कोर्स कराने के लिए बंदियों से इग्नू फीस नहीं लेता है। बंदी का शपथपत्र, फोटो आदि में जेल प्रशासन सहयोग करता है। जेल में पढ़ाई करने वाले गंभीर अपराधी नहीं है, बल्कि छोटी सजा में निरुद्ध बंदी है। -वीडी पांडेय, जेल अधीक्षक
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