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Shahjahanpur News: भागवत कथा से प्रेत योनि से भी मुक्ति संभव

Tue, 16 Sep 2025 01:41 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 16 Sep 2025 01:41 AM IST
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Liberation from ghost life is also possible through Bhagwat Katha
पुवायां। बंडा के गांव पिपरिया घासी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में सोमवार को कथा व्यास मायाराम त्रिवेदी ने गोकर्ण-धुंधकारी की कथा सुनाई।
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कथा व्यास ने सुनाया कि आत्मदेव के कोई संतान नहीं थी। एक संत ने उनको दो फल दिए थे। आत्मदेव की पत्नी धुंधली ने एक फल खुद और दूसरा गाय को खिला दिया। धुंधली ने धुंधकारी और गाय ने मनुष्य जैसे गोकर्ण को जन्म दिया। गोकर्ण धर्मनिष्ठ, वेदज्ञ और तपस्वी बने, जबकि धुंधकारी क्रोधी, हिंसक, लोभी निकला।

वेश्या के जहर देने से धुंधकारी की मौत के बाद आत्मा प्रेत योनि में भटकती रही, क्योंकि उसने बहुत पाप किए थे। गोकर्ण ने अपने भाई की प्रेत योनि से मुक्ति के लिए श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया। कथा सात दिन तक चली। प्रेत आत्मा (धुंधकारी) हर दिन कथा सुनने आता, और जैसे-जैसे कथा आगे बढ़ती, उसके पाप नष्ट होते जाते। सातवें दिन जैसे ही कथा पूरी हुई, धुंधकारी की आत्मा प्रेतयोनि से मुक्त हो गई। कथा व्यास ने कहा कि, भागवत कथा को सुनने मात्र से भी प्रेत जैसी दुर्गति से मुक्ति संभव है। संवाद
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