{"_id":"59055c2eb293af8bb245b48381f7401d","slug":"late-in-the-crazy-common-cold-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ठंड में हुई देर तो बौराए आम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ठंड में हुई देर तो बौराए आम
शाहजहांपुर।
Updated Fri, 22 Jan 2016 07:51 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इस बार कड़ाके की सर्दी जनवरी मध्य के बाद शुरू हुई तो उसका असर फसलों के अलावा फलदार पेड़ों पर भी पड़ा है। मकर संक्रांति तक रात का तापमान पांच डिग्री सेल्सियस से ऊपर ही रहने और दिन का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे यदाकदा ही होने के चलते जिले में आम के पेड़ों में बौर की फुनगी निकल आई है। शहर और देहात इलाकों में भी यह दृश्य देखने को मिल रहे हैं। इसके चलते इस बार गर्मियों के मौसमें आम का उत्पादन करीब 20 से 25 फीसदी तक प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
विज्ञापन
जिले में कुल करीब 1500 हेक्टेयर भूभाग में आम के पेड़ हैं। क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे ज्यादा आम जिले के निगोही, पुवायां, कांट और तिलहर ब्लॉक में हैं। चालू जाड़े के मौसम में समय से पहले ही आम के बौरा जाने से जिला उद्यान विभाग भी चिंतित है। करीब एक तिहाई पेड़ों में यह नजारा दिखा है। इसकी वजह की पड़ताल करते हुए जिला उद्यान अधिकारी राम नारायण वर्मा ने बताया कि आम के पेड़ों में सामान्यत: जनवरी के अंतिम हफ्ते से लेकर फरवरी के पहले पखवारे में बौर आते हैं। इस बार चालू मौसम में कड़ाके की सर्दी का चक्र देर से प्रभावी होने का असम सीधे तौर पर आम पर पड़ा। अमूमन 25 दिसंबर से 15 जनवरी तक पड़ने वाली कड़ाके की सर्दी और फिर 26 जनवरी के आसपास से तापक्रम में सुधार होने की दशा में आम में फ्लावरिंग की प्रक्रिया सुसुप्तावस्था से बाहर निकलना शुरू होती है। लेकिन इस बार 15 जनवरी तक कड़ाके की सर्दी नहीं पड़ी और फ्लावरिंग के अनुकूल वाला तापमान पहले ही मिलने पर कई पेड़ों में बौर आ गए हैं।
विज्ञापन
विशेषज्ञ की राय
जिन पेड़ों में बौर निकल आए हैं, उन पेड़ों में बौर वाली फुनगियों को काटकर निकाल दें तो बगल से कुछ ही दिनों बौर की नई फुनगी विकसित हो जाएगी। इस माह के अंत तक आम के पेड़ों के पत्तियों, तनों और जड़ तक के स्थान की धुलाई खास घोल से छिड़काव के मार्फत करें। पहला छिड़काव क्लोरीपायरीफाश 20 ईसी के डेढ़ मी.लि. और सल्फर 80 फीसदी तीन किग्रा को प्रति लीटर मिलाकर घोल तैयार करें। सल्फर के इस्तेमाल से बौर का ठूंठा आना शुरू होगा। फिर दूसरा छिड़काव मोनोप्रोटोफाश एक मी.लि. और कारबंडाजीन फंफूदनाश एक ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर घोल का करना है। बौर जब विकसित हो जाए और मटर के दाने का आकार टिकोरा दिखने लगे तो कीटनाशक इमिडाक्लोप्रिड और कारबंडाजिन फफूंदनाशक का छिड़काव करें तो उत्पादन दर सही मिलेगा। -- राधाकृष्ण यादव, उप निदेशक, कृषि विभाग, शाहजहांपुर।
विज्ञापन