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कृभको: युवा कर्मियों, गृहिणियों और बच्चों ने मंच पर किरदार किए जीवंत
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कृभको फर्टिलाइजर्स में रामलीला का मंचन करते कलाकार। स्रोत : आयोजक
- फोटो : mathura
शाहजहांपुर। कृभको रामलीला कमेटी की ओर से कृभको फर्टिलाइजर्स, पिपरौला में सातवें वर्ष रामलीला का सफल मंचन किया गया। युवा कर्मियों, गृहिणियों और बच्चों ने मंचन के जरिये श्रद्धालुओं को भक्ति से सराबोर कर दिया। रामायण के प्रसंगों पर मंचन के जरिये कलाकारों ने कभी रोमांच भरा तो कई बार भावुक कर दिया।
मंचन के दौरान तीन घंटे की अवधि में रामकथा के सभी प्रमुख प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। प्रख्यात कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कालजयी रचना राम की शक्तिपूजा के प्रसंग ने दर्शकों के मन को मोह लिया। हनुमानजी के उड़ते हुए संजीवनी बूटी लाने के दृश्य को दर्शकों ने खूब सराहा।
इससे पहले मंचन का शुभारंभ मुख्य अतिथि केएफएल के प्रबंध निदेशक रवि कुमार चोपड़ा और यूनिट प्रमुख विजय बांगर, सुमन चोपड़ा और सुदेश बांगर ने दीप जलाकर किया। मंचन प्रबंधक जेपी श्रीवास्तव ने बताया कि साल 2018 में इस अनूठी रामलीला की परिकल्पना तत्कालीन महिला प्रमुख सुमन चोपड़ा ने की थी। इसका निर्देशन लगातार सातवीं बार राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, त्रिपुरा से प्रशिक्षित वरिष्ठ रंगकर्मी आलोक सक्सेना ने किया।
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मंच पर श्रीराम-अजीत सिंह, सीता राजकन्या-हरमीत कौर, सीता वनगामिनी- अरुंधति देव, लक्ष्मण-विभोर सिंह, भरत व विभीषण-रोहित सती, शत्रुघ्न व मेघनाद- सुशोभित त्रिवेदी, हनुमानजी-आकाश शर्मा, रावण- शिवम् भारद्वाज, परशुराम, गुरु वशिष्ठ व तपस्वीवेशी रावण- सचिन शर्मा, जनक व सुमंत- पुनीत कुमार, कौशल्या, सुनयना, मंदोदरी- ज्योति देव, मां दुर्गा- वंदना श्रीवास्तव आदि ने अभिनय किया।
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45 दिन की रंगमंचीय कार्यशाला में निखरा अभिनय
कृभको खाद फैक्टरी में कार्य करने वाले ही मंच पर रामलीला के विभिन्न किरदारों को करने के लिए उतरे। वरिष्ठ नाट्य निर्देशक आलोक सक्सेना और यूनिट प्रमुख विजय बांगर के मार्गदर्शन में 45 दिन तक रंगमंचीय कार्यशाला शुरू की गई, जिसमें कलाकारों ने अपने अभिनय को निखारा।
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हठ के कारण दुर्योधन का कुल और राजपाट हो गया नष्ट
कुर्रियाकलां। पल्हौरा गांव में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में रविवार को हरदोई से आए कथावाचक पंडित अजीत द्विवेदी ने दुर्योधन के हठ के प्रसंग को सुनाया। उन्होंने कहा कि वनवास एवं अज्ञातवास काटकर लौटे पांडवों ने दुर्योधन से अपना राज्य मांगा, किंतु उसने अज्ञातवास भंग होने की बात कहकर दोबारा वनवास पर जाने के लिए कहा। विदुर और भीष्म पितामह ने दुर्योधन को समझाया कि वनवास का समय पूरा हो चुका है, लेकिन दुर्योधन नहीं माना। पांडवों ओर से शांतिदूत बनकर गए भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों के लिए पांच गांव मांगे, किंतु दुर्योधन ने सुई की नोक के बराबर भूमि देने से भी इन्कार कर दिया। दुर्योधन ने श्रीकृष्ण को बंदी बनाना चाहा, तो भगवान ने अपने विराट रूप के सभी को दर्शन कराए। इस प्रसंग से कथा वाचक ने संदेश दिया कि बेटा कितना भी प्यारा हो, किंतु उसकी करतूतों को चुपचाप नहीं देखना चाहिए। धृतराष्ट्र ने अपने प्रिय पुत्र दुर्योधन की किसी भी बात का विरोध नहीं किया। इसीलिए दुर्योधन अपने सौ भाइयों समेत कुल और राजपाट के नाश का कारण बना। कथा के श्रवण में शेर सिंह, सुरेश कुशवाहा, अवनीश, रवि कुमार आदि श्रद्धालु शामिल रहे। संवाद
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मंचन के दौरान तीन घंटे की अवधि में रामकथा के सभी प्रमुख प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। प्रख्यात कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कालजयी रचना राम की शक्तिपूजा के प्रसंग ने दर्शकों के मन को मोह लिया। हनुमानजी के उड़ते हुए संजीवनी बूटी लाने के दृश्य को दर्शकों ने खूब सराहा।
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इससे पहले मंचन का शुभारंभ मुख्य अतिथि केएफएल के प्रबंध निदेशक रवि कुमार चोपड़ा और यूनिट प्रमुख विजय बांगर, सुमन चोपड़ा और सुदेश बांगर ने दीप जलाकर किया। मंचन प्रबंधक जेपी श्रीवास्तव ने बताया कि साल 2018 में इस अनूठी रामलीला की परिकल्पना तत्कालीन महिला प्रमुख सुमन चोपड़ा ने की थी। इसका निर्देशन लगातार सातवीं बार राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, त्रिपुरा से प्रशिक्षित वरिष्ठ रंगकर्मी आलोक सक्सेना ने किया।
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मंच पर श्रीराम-अजीत सिंह, सीता राजकन्या-हरमीत कौर, सीता वनगामिनी- अरुंधति देव, लक्ष्मण-विभोर सिंह, भरत व विभीषण-रोहित सती, शत्रुघ्न व मेघनाद- सुशोभित त्रिवेदी, हनुमानजी-आकाश शर्मा, रावण- शिवम् भारद्वाज, परशुराम, गुरु वशिष्ठ व तपस्वीवेशी रावण- सचिन शर्मा, जनक व सुमंत- पुनीत कुमार, कौशल्या, सुनयना, मंदोदरी- ज्योति देव, मां दुर्गा- वंदना श्रीवास्तव आदि ने अभिनय किया।
45 दिन की रंगमंचीय कार्यशाला में निखरा अभिनय
कृभको खाद फैक्टरी में कार्य करने वाले ही मंच पर रामलीला के विभिन्न किरदारों को करने के लिए उतरे। वरिष्ठ नाट्य निर्देशक आलोक सक्सेना और यूनिट प्रमुख विजय बांगर के मार्गदर्शन में 45 दिन तक रंगमंचीय कार्यशाला शुरू की गई, जिसमें कलाकारों ने अपने अभिनय को निखारा।
हठ के कारण दुर्योधन का कुल और राजपाट हो गया नष्ट
कुर्रियाकलां। पल्हौरा गांव में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में रविवार को हरदोई से आए कथावाचक पंडित अजीत द्विवेदी ने दुर्योधन के हठ के प्रसंग को सुनाया। उन्होंने कहा कि वनवास एवं अज्ञातवास काटकर लौटे पांडवों ने दुर्योधन से अपना राज्य मांगा, किंतु उसने अज्ञातवास भंग होने की बात कहकर दोबारा वनवास पर जाने के लिए कहा। विदुर और भीष्म पितामह ने दुर्योधन को समझाया कि वनवास का समय पूरा हो चुका है, लेकिन दुर्योधन नहीं माना। पांडवों ओर से शांतिदूत बनकर गए भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों के लिए पांच गांव मांगे, किंतु दुर्योधन ने सुई की नोक के बराबर भूमि देने से भी इन्कार कर दिया। दुर्योधन ने श्रीकृष्ण को बंदी बनाना चाहा, तो भगवान ने अपने विराट रूप के सभी को दर्शन कराए। इस प्रसंग से कथा वाचक ने संदेश दिया कि बेटा कितना भी प्यारा हो, किंतु उसकी करतूतों को चुपचाप नहीं देखना चाहिए। धृतराष्ट्र ने अपने प्रिय पुत्र दुर्योधन की किसी भी बात का विरोध नहीं किया। इसीलिए दुर्योधन अपने सौ भाइयों समेत कुल और राजपाट के नाश का कारण बना। कथा के श्रवण में शेर सिंह, सुरेश कुशवाहा, अवनीश, रवि कुमार आदि श्रद्धालु शामिल रहे। संवाद

कृभको फर्टिलाइजर्स में रामलीला का मंचन करते कलाकार। स्रोत : आयोजक- फोटो : mathura