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शुरू नहीं हुआ मृदा परीक्षण का कार्य, पैंटून पुल का निर्माण तेज
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जलालाबाद में रामगंगा नदी पार करने को नाव के ईनतजार में यात्री। सं
- फोटो : SHAHJAHANPUR
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जलालाबाद। कोलाघाट पुल के गिरने का कारण पता लगाने के लिए मृदा परीक्षण (सॉयल टेस्टिंग) का कार्य छठवें दिन भी शुरू नहीं हो सका है। जबकि वैकल्पिक रास्ते को दुरुस्त करने तथा नदी पर पैंटून पुल के निर्माण के लिए सामग्री इकट्ठी करने का कार्य शुक्रवार को भी जारी रहा।
29 नवंबर को एक पिलर धंसने से कोलाघाट पुल तीन टुकड़ों में बंट गया था। मामले की जांच के लिए लखनऊ से पहुंची सेतु निर्माण निगम व पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों की टीम किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी थी। जमीन तक धंसे पिलर के ऊपर कई टन वजनी पुल का हिस्सा मौजूद था, जिससे पिलर समेत उस हिस्से की जांच मृदा परीक्षण की मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर करने की सहमति अधिकारियों की बीच बनी थी।
एक दिसंबर को यहां पहुंची सेतु निर्माण निगम लखनऊ की सॉयल इंवेस्टिगेशन टीम ने डेरा डालकर बोरिंग के जरिए विभिन्न सतहों के 12 नमूने एकत्र किए थे, परंतु अगले दिन ही यह काम रुक गया और टीम भी लौट गई। पांच दिसंबर को दोनों विभाग के अधिकारियों की टीम ने पुन: कोलाघाट का दौरा किया और सॉयल टेस्टिंग के जरिये ही पुल गिरने का कारण सामने आने की बात दोहराई।
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साथ ही कहा कि अन्य पिलर की जांच भी इसी तकनीक कराई जाएगी, जिसके लिए शीघ्र ही यहां जांच टीम पहुंचेगी, परंतु छह दिन बाद भी इस दिशा में कोई कार्य आगे न बढ़ने से पुल टूटने की वजह सामने आने में अब ज्यादा समय लगना तय है। यात्रियों की सहूलियत के लिए रास्ते और पैंटून पुल निर्माण को लेकर लोक निर्माण विभाग के ठेकेदार के बीते तीन दिनों से चल रहे प्रयास शुक्रवार को भी जारी रहे।
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29 नवंबर को एक पिलर धंसने से कोलाघाट पुल तीन टुकड़ों में बंट गया था। मामले की जांच के लिए लखनऊ से पहुंची सेतु निर्माण निगम व पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों की टीम किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी थी। जमीन तक धंसे पिलर के ऊपर कई टन वजनी पुल का हिस्सा मौजूद था, जिससे पिलर समेत उस हिस्से की जांच मृदा परीक्षण की मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर करने की सहमति अधिकारियों की बीच बनी थी।
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एक दिसंबर को यहां पहुंची सेतु निर्माण निगम लखनऊ की सॉयल इंवेस्टिगेशन टीम ने डेरा डालकर बोरिंग के जरिए विभिन्न सतहों के 12 नमूने एकत्र किए थे, परंतु अगले दिन ही यह काम रुक गया और टीम भी लौट गई। पांच दिसंबर को दोनों विभाग के अधिकारियों की टीम ने पुन: कोलाघाट का दौरा किया और सॉयल टेस्टिंग के जरिये ही पुल गिरने का कारण सामने आने की बात दोहराई।
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साथ ही कहा कि अन्य पिलर की जांच भी इसी तकनीक कराई जाएगी, जिसके लिए शीघ्र ही यहां जांच टीम पहुंचेगी, परंतु छह दिन बाद भी इस दिशा में कोई कार्य आगे न बढ़ने से पुल टूटने की वजह सामने आने में अब ज्यादा समय लगना तय है। यात्रियों की सहूलियत के लिए रास्ते और पैंटून पुल निर्माण को लेकर लोक निर्माण विभाग के ठेकेदार के बीते तीन दिनों से चल रहे प्रयास शुक्रवार को भी जारी रहे।