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Shahjahanpur News: आतंंकवाद के समय सबसे ज्यादा प्रभावित थे खुटार और बंडा क्षेत्र
Tue, 24 Dec 2024 12:51 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Tue, 24 Dec 2024 12:51 AM IST
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पुवायां। तराई में आतंकवाद के दौर में शाहजहांपुर का खुटार और बंडा थाना क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित रहा था। पीलीभीत और लखीमपुर के बार्डर पर बसे खुटार और पीलीभीत की सीमा से जुड़े बंडा क्षेत्र में आतंकवादियों के कई शरणदाता थे। पूरनपुर में तीन आतंकवादियों के मारे जाने के बाद इस क्षेत्र में खुफिया एजेंसियों के अधिकारी सतर्क हो गए हैं। कई लोगों की निगहबानी शुरू कर दी गई है।
इन दोनों क्षेत्रों में वर्ष 1985 से लेकर 1997 के बीच आतंकवादियों ने कई बड़ी वारदात की थीं। खुटार में राइस मिल स्वामी मदनलाल का अपहरण कर फिरौती वसूली थी। पीलीभीत का पूरनपुर और लखीमपुर का मैलानी व भीरा इलाका खालिस्तानी आतंकवादियों का गढ़ बन गया था। आतंकवादियों ने मैलानी में दरोगा की हत्या कर दी थी। पुवायां में एक व्यापारी पुत्र ने आतंकवादियों को भागते समय घेरा तो उन्हें गोली मार दी गई थी।
खुटार के जंगल में तीन आतंकवादी पुलिस मुठभेड़ में मारे गए थे। भिडंरावाले टाइगर्स फोर्स से जुड़े सतनाम सिंह छीना की पत्नी को बंडा से गिरफ्तार किया गया था। वह बंडा में एक स्थान पर दबाए गए रुपये निकालने आई थी। खुटार और बंडा क्षेत्र के कई लोगों पर आतंकवादियों को शरण देने के आरोप में कई लोगों को टांडा की धारा के तहत गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। 90 के दशक के अंत में तराई इलाके से खालिस्तानी आतंकवाद का सफाया हो गया था।
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पंजाब के बदमाशों ने पुवायां की स्टेट बैंक में डाला था डाका
11 मई, 2011 को पंजाब के बदमाशों ने कस्बे की एसबीआई शाखा से 44 लाख रुपये की रकम लूट ली थी। एके-47 जैसे हथियारों से फायरिंग करते हुए फरार हो गए थे। डकैतों की फायरिंग में थाने में तैनात हेड कांस्टेबल देवराज घायल हो गए थे। डकैती में पंजाब के जनपद अमृतसर के गांव ख्याला निवासी सरताज सिंह उर्फ सरपंच, तरनतारन के गांव ठठिया महातान निवासी दारा सिंह, भिंड निवासी सर्वजीत सिंह उर्फ छब्बा, अमृतसर देहात के कोटला निवासी निशान सिंह, अमृतसर के थाना कम्मो के गांव नगली निवासी अमरजीत सिंह, उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर के कस्बा मझोला निवासी रूपेंद्र सिंह, पीलीभीत के थाना अमरिया क्षेत्र निवासी स्वर्ण सिंह, शाहजहांपुर के थाना रोजा के गांव दमदौर निवासी बलजीत उर्फ बबलू और खुटार के गांव मैनिया निवासी बलवंत सिंह को भी जेल भेजा गया था। सर्वजीत बैंक डकैती के लिए पंजाब से एके-47 लेकर आया था।
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नानकमता के बाबा तरसेम सिंह की हत्या में शामिल था अमरजीत
पुवायां की बैंक डकैती में शामिल रहे अमरजीत सिंह ने 28 मार्च 2024 को नानकमत्ता गुरुद्वारा के डेरा कार सेवा प्रमुख बाबा तरसेम सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी। अमृतसर के थाना कम्मो के गांव नगली का मूल निवासी और वर्तमान में जनपद रामपुर के थाना बिलासपुर के गांव सिहौरा निवासी अमरजीत सिंह उर्फ बिट्टू उर्फ गंडा को बैंक डकैती में 17 जुलाई 2011 को गिरफ्तार किया गया था। उसके पास से लूट के 6.20 लाख रुपये भी बरामद हुए थे। बाबा तरसेम सिंह की हत्या में शामिल अमरजीत सिंह को पुलिस ने नौ अप्रैल 2024 को एनकाउंटर में मार गिराया था। बंडा क्षेत्र के कुछ अन्य लोगों के नाम भी बाबा की हत्या में सामने आए थे, उनको भी जेल भेजा गया था।
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बीएसएफ के हवाले कर दिए गए थे थाने
वर्ष 1985 से 1992 तक खालिस्तानी आतंकवादी चरम पर था। इस दौरान खुटार व बंडा थाने बीएसएफ के हवाले रहते थे। मुख्य गेट पर बीएसएफ के जवान मोर्चा संभालते थे। शाम के बाद किसी को भी थाने के अंदर जाने नहीं दिया जाता था। रात में अर्द्धसैनिक बलों के जवान गश्त करते थे। इस दौरान कई फार्म हाउसों से आतंकवादियों का भारी रुपया, असलहा आदि भी बरामद किया गया था।
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नागालैंड की फोर्स ने मार दिए थे तमाम पक्षी
आतंकवाद के चरम पर होने पर नागालैंड की फोर्स भी यहां तैनात की गई थी। नागालैंड के जवान हिंदी कम समझते थे। खुखरी व गुलेल लेकर घूमते थे। जवान अक्सर गुलेल से पक्षियों को मारने के बाद पकाकर खा जाते थे। उस समय अफवाह उड़ी थी कि जवान कुत्तों को भी मारकर खा जाते हैं। क्षेत्र के लोग भी नागालैंड की फोर्स से भयभीत रहते थे।
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इन दोनों क्षेत्रों में वर्ष 1985 से लेकर 1997 के बीच आतंकवादियों ने कई बड़ी वारदात की थीं। खुटार में राइस मिल स्वामी मदनलाल का अपहरण कर फिरौती वसूली थी। पीलीभीत का पूरनपुर और लखीमपुर का मैलानी व भीरा इलाका खालिस्तानी आतंकवादियों का गढ़ बन गया था। आतंकवादियों ने मैलानी में दरोगा की हत्या कर दी थी। पुवायां में एक व्यापारी पुत्र ने आतंकवादियों को भागते समय घेरा तो उन्हें गोली मार दी गई थी।
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खुटार के जंगल में तीन आतंकवादी पुलिस मुठभेड़ में मारे गए थे। भिडंरावाले टाइगर्स फोर्स से जुड़े सतनाम सिंह छीना की पत्नी को बंडा से गिरफ्तार किया गया था। वह बंडा में एक स्थान पर दबाए गए रुपये निकालने आई थी। खुटार और बंडा क्षेत्र के कई लोगों पर आतंकवादियों को शरण देने के आरोप में कई लोगों को टांडा की धारा के तहत गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। 90 के दशक के अंत में तराई इलाके से खालिस्तानी आतंकवाद का सफाया हो गया था।
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पंजाब के बदमाशों ने पुवायां की स्टेट बैंक में डाला था डाका
11 मई, 2011 को पंजाब के बदमाशों ने कस्बे की एसबीआई शाखा से 44 लाख रुपये की रकम लूट ली थी। एके-47 जैसे हथियारों से फायरिंग करते हुए फरार हो गए थे। डकैतों की फायरिंग में थाने में तैनात हेड कांस्टेबल देवराज घायल हो गए थे। डकैती में पंजाब के जनपद अमृतसर के गांव ख्याला निवासी सरताज सिंह उर्फ सरपंच, तरनतारन के गांव ठठिया महातान निवासी दारा सिंह, भिंड निवासी सर्वजीत सिंह उर्फ छब्बा, अमृतसर देहात के कोटला निवासी निशान सिंह, अमृतसर के थाना कम्मो के गांव नगली निवासी अमरजीत सिंह, उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर के कस्बा मझोला निवासी रूपेंद्र सिंह, पीलीभीत के थाना अमरिया क्षेत्र निवासी स्वर्ण सिंह, शाहजहांपुर के थाना रोजा के गांव दमदौर निवासी बलजीत उर्फ बबलू और खुटार के गांव मैनिया निवासी बलवंत सिंह को भी जेल भेजा गया था। सर्वजीत बैंक डकैती के लिए पंजाब से एके-47 लेकर आया था।
नानकमता के बाबा तरसेम सिंह की हत्या में शामिल था अमरजीत
पुवायां की बैंक डकैती में शामिल रहे अमरजीत सिंह ने 28 मार्च 2024 को नानकमत्ता गुरुद्वारा के डेरा कार सेवा प्रमुख बाबा तरसेम सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी। अमृतसर के थाना कम्मो के गांव नगली का मूल निवासी और वर्तमान में जनपद रामपुर के थाना बिलासपुर के गांव सिहौरा निवासी अमरजीत सिंह उर्फ बिट्टू उर्फ गंडा को बैंक डकैती में 17 जुलाई 2011 को गिरफ्तार किया गया था। उसके पास से लूट के 6.20 लाख रुपये भी बरामद हुए थे। बाबा तरसेम सिंह की हत्या में शामिल अमरजीत सिंह को पुलिस ने नौ अप्रैल 2024 को एनकाउंटर में मार गिराया था। बंडा क्षेत्र के कुछ अन्य लोगों के नाम भी बाबा की हत्या में सामने आए थे, उनको भी जेल भेजा गया था।
बीएसएफ के हवाले कर दिए गए थे थाने
वर्ष 1985 से 1992 तक खालिस्तानी आतंकवादी चरम पर था। इस दौरान खुटार व बंडा थाने बीएसएफ के हवाले रहते थे। मुख्य गेट पर बीएसएफ के जवान मोर्चा संभालते थे। शाम के बाद किसी को भी थाने के अंदर जाने नहीं दिया जाता था। रात में अर्द्धसैनिक बलों के जवान गश्त करते थे। इस दौरान कई फार्म हाउसों से आतंकवादियों का भारी रुपया, असलहा आदि भी बरामद किया गया था।
नागालैंड की फोर्स ने मार दिए थे तमाम पक्षी
आतंकवाद के चरम पर होने पर नागालैंड की फोर्स भी यहां तैनात की गई थी। नागालैंड के जवान हिंदी कम समझते थे। खुखरी व गुलेल लेकर घूमते थे। जवान अक्सर गुलेल से पक्षियों को मारने के बाद पकाकर खा जाते थे। उस समय अफवाह उड़ी थी कि जवान कुत्तों को भी मारकर खा जाते हैं। क्षेत्र के लोग भी नागालैंड की फोर्स से भयभीत रहते थे।