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केेंद्र सरकार के सहयोग से होंगे जिला योजना के काम
अनूप वाजपेयी, शाहजहांपुर
Updated Sun, 31 May 2015 11:36 PM IST
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बीते वित्त वर्ष में 1.72 अरब की जिला योजना का बजट चालू वित्त वर्ष में बढ़कर 3.92 अरब रुपये हो गया है। विभागवार इस धनराशि को सरकार का अनुमोदन मिलने के बाद विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के तहत प्रस्तावित निर्माण कार्यों की केंद्र सरकार पर निर्भरता बढ़ गई है। दरअसल, जिला योजना के अनुमोदित व्यय बजट में इस वर्ष केंद्र के अंश को भी शामिल कर लिया गया है।
बीते तीन वित्त वर्षों में जिला योजना का वार्षिक बजट 1.72 अरब रुपये स्थिर रहा। हालांकि, वित्त वर्ष 2012-13, 2013-14 और 2014-15 में विभिन्न विभागों को 25 से लेकर 75 प्रतिशत तक केंद्रांश की भी मंजूरी मिली, लेकिन राज्यांश मद में पूरा भुगतान नहीं होने से कई विभागों के काम पिछड़ गए। इस वर्ष स्थिति एकदम उलट है। केंद्र की मोदी सरकार ने विकास और निर्माण के जिन कार्यक्रमों को लेकर प्रतिबद्धता दिखाई, उनसे संबंधित महकमों को मिलने वाले केंद्रांश को भी समाहित किया गया है।
विकास विभाग के अधिकारी भी मानते हैं कि अच्छे दिन आने का सपना दिखाने वाली मोदी सरकार गांवों में साक्षरता बढ़ाने को प्राइमरी और जूनियर स्कूलों की बढ़ोत्तरी, कृषि, ग्रामीण विकास, जल संसाधन, अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत आदि बिंदुओं पर काम कराने के लिए अपने हिस्से की धनराशि देने में कोई कोताही नहीं करेगी। इसलिए इन विभागों को मिलने वाला केंद्रांश भी समाहित कर लिए जाने से जिला योजना का बजट गुजरे सालों के मुकाबले दोगुने से ज्यादा हो गया है।
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इन विभागों को मिलेगी केंद्र से वित्तीय मदद
कृषि विभाग का जिला योजना बजट अभी तक आठ से 10 लाख रुपये तक सीमित रहा, लेकिन चालू वित्त वर्ष में महकमें को 32 लाख रुपये का अनुमोदन किया गया। इसमें 24 लाख रुपये केंद्रांश भी शामिल है। इसी तरह मत्स्य विकास को अनुमोदित 12.09 लाख के बजट में 9.04 लाख रुपये केंद्र सरकार देगी। इसी तरह ग्राम्य विकास के विशेष कार्यक्रमों के लिए 307.59 लाख, भूमि विकास एवं जल संसाधन विकास को 890.77 लाख, रोजगार कार्यक्रमों के लिए 6096.57 लाख, अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत के लिए 17.82 लाख, प्राथमिक शिक्षा में 2558.25 लाख, माध्यमिक शिक्षा के लिए 1219.67 लाख, परिवार कल्याण के लिए 900 लाख, ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रमों के लिए 1752.30 लाख, ग्रामीण आवास के लिए 2743.13 लाख और समाज कल्याण विभाग की विभिन्न योजनाओं के लिए 465.71 लाख रुपये केंद्रांश निर्धारित किया गया है।
इन विभागों को राज्य संसाधनों पर रहना होगा निर्भर
हमेशा की तरह इस बार भी जिला योजना में कई विभागों को लक्ष्य के अनुरूप काम कराने के लिए राज्य के संसाधनों और प्रदेश सरकार के बजट पर निर्भर रहना पड़ेगा। इनमें महिला कल्याण एवं बाल विकास, विकलांग कल्याण, आईटीआई प्रशिक्षण, सामान्य जाति के लिए समाज कल्याण की योजनाओं, सेवायोजन, उद्यान, गन्ना, पशुपालन, दुग्ध विकास, वन, सहकारिता, पंचायत राज, लघु सिंचाई, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, सड़क एवं पुल, पर्यावरण, पर्यटन, प्रादेशिक विकास दल, खेलकूद, चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य, नगर विकास, पिछड़ा वर्ग कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण आदि विभागों और मदों में काम कराने में केंद्र सरकार की कोई हिस्सेदारी नहीं रहेगी।
अनुमोदन के बाद बजट मिलने का इंतजार
चालू वित्त वर्ष के लिए 3.92 अरब 98 लाख रुपये की जिला योजना को प्रदेश सरकार से अनुमोदन मिलने के बाद अब विभिन्न विभागों को काम शुरू कराने के लिए बजट मिलने का बेसब्री से इंतजार है। प्रभारी सीडीओ पीपी त्रिपाठी के अनुसार विभागों को अनुमोदित बजट की धनराशि मिलते ही जिला योजना के प्रस्तावित काम होने शुरू हो जाएंगे।
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बीते तीन वित्त वर्षों में जिला योजना का वार्षिक बजट 1.72 अरब रुपये स्थिर रहा। हालांकि, वित्त वर्ष 2012-13, 2013-14 और 2014-15 में विभिन्न विभागों को 25 से लेकर 75 प्रतिशत तक केंद्रांश की भी मंजूरी मिली, लेकिन राज्यांश मद में पूरा भुगतान नहीं होने से कई विभागों के काम पिछड़ गए। इस वर्ष स्थिति एकदम उलट है। केंद्र की मोदी सरकार ने विकास और निर्माण के जिन कार्यक्रमों को लेकर प्रतिबद्धता दिखाई, उनसे संबंधित महकमों को मिलने वाले केंद्रांश को भी समाहित किया गया है।
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विकास विभाग के अधिकारी भी मानते हैं कि अच्छे दिन आने का सपना दिखाने वाली मोदी सरकार गांवों में साक्षरता बढ़ाने को प्राइमरी और जूनियर स्कूलों की बढ़ोत्तरी, कृषि, ग्रामीण विकास, जल संसाधन, अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत आदि बिंदुओं पर काम कराने के लिए अपने हिस्से की धनराशि देने में कोई कोताही नहीं करेगी। इसलिए इन विभागों को मिलने वाला केंद्रांश भी समाहित कर लिए जाने से जिला योजना का बजट गुजरे सालों के मुकाबले दोगुने से ज्यादा हो गया है।
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इन विभागों को मिलेगी केंद्र से वित्तीय मदद
कृषि विभाग का जिला योजना बजट अभी तक आठ से 10 लाख रुपये तक सीमित रहा, लेकिन चालू वित्त वर्ष में महकमें को 32 लाख रुपये का अनुमोदन किया गया। इसमें 24 लाख रुपये केंद्रांश भी शामिल है। इसी तरह मत्स्य विकास को अनुमोदित 12.09 लाख के बजट में 9.04 लाख रुपये केंद्र सरकार देगी। इसी तरह ग्राम्य विकास के विशेष कार्यक्रमों के लिए 307.59 लाख, भूमि विकास एवं जल संसाधन विकास को 890.77 लाख, रोजगार कार्यक्रमों के लिए 6096.57 लाख, अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत के लिए 17.82 लाख, प्राथमिक शिक्षा में 2558.25 लाख, माध्यमिक शिक्षा के लिए 1219.67 लाख, परिवार कल्याण के लिए 900 लाख, ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रमों के लिए 1752.30 लाख, ग्रामीण आवास के लिए 2743.13 लाख और समाज कल्याण विभाग की विभिन्न योजनाओं के लिए 465.71 लाख रुपये केंद्रांश निर्धारित किया गया है।
इन विभागों को राज्य संसाधनों पर रहना होगा निर्भर
हमेशा की तरह इस बार भी जिला योजना में कई विभागों को लक्ष्य के अनुरूप काम कराने के लिए राज्य के संसाधनों और प्रदेश सरकार के बजट पर निर्भर रहना पड़ेगा। इनमें महिला कल्याण एवं बाल विकास, विकलांग कल्याण, आईटीआई प्रशिक्षण, सामान्य जाति के लिए समाज कल्याण की योजनाओं, सेवायोजन, उद्यान, गन्ना, पशुपालन, दुग्ध विकास, वन, सहकारिता, पंचायत राज, लघु सिंचाई, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, सड़क एवं पुल, पर्यावरण, पर्यटन, प्रादेशिक विकास दल, खेलकूद, चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य, नगर विकास, पिछड़ा वर्ग कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण आदि विभागों और मदों में काम कराने में केंद्र सरकार की कोई हिस्सेदारी नहीं रहेगी।
अनुमोदन के बाद बजट मिलने का इंतजार
चालू वित्त वर्ष के लिए 3.92 अरब 98 लाख रुपये की जिला योजना को प्रदेश सरकार से अनुमोदन मिलने के बाद अब विभिन्न विभागों को काम शुरू कराने के लिए बजट मिलने का बेसब्री से इंतजार है। प्रभारी सीडीओ पीपी त्रिपाठी के अनुसार विभागों को अनुमोदित बजट की धनराशि मिलते ही जिला योजना के प्रस्तावित काम होने शुरू हो जाएंगे।