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पुलिया क्षतिग्रस्त, चार दर्जन गांवों का आवागमन बाधित
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परौर के ग्राम हरनोखा में टूटी पुलिया। संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
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परौर (शाहजहांपुर)। सड़कें विकास की जीवन रेखा मानी जाती हैं, लेकिन विकास की कसौटी पर सबसे पिछड़ी कलान तहसील के परौर इलाके में हरनोखा गांव की पुलिया बारिश में ढह जाने से आसपास के करीब चार दर्जन गांवों की जीवन रेखा कट गई है। पुलिया क्षतिग्रस्त होने से हरनोखा से शहीद नायक जदुनाथ सिंह के पैतृक गांव खजुरी और दूसरी ओर उसावां (बदायूं) जाने वाले रास्तों के किनारे बसे करीब चार दर्जन गांवों का सीधा सड़क संपर्क टूट गया है।
इन गांवों के ग्रामीणों को फिलहाल 20 से 30 किमी का फेरा लगाकर अन्य रास्तों से तहसील और जिला मुख्यालय आना-जाना पड़ रहा है।
क्षतिग्रस्त हुई पुलिया हरनोखा गांव में बहने वाले नाले पर बनाई गई थी। यह नाला आठ महीने तो सूखा रहता है, लेकिन बरसात के दिनों में उग्र रूप धारण कर लेता है। नाले से बरसाती पानी रुकनपुर गांव के पास अरिल नदी में मिल जाता है। कई दशक पहले जब सड़क और पुलिया की व्यवस्था नहीं थी तो ग्रामीण अपनी व्यवस्थाओं से किसी तरह नाला पार करते थे।
बाद में जिला पंचायत ने ग्राम बम्हौरा से हरनोखा तक खड़ंजा डाला तो नाले पर पुलिया की जरूरत महसूस हुई। जिला पंचायत ने पुलिया का निर्माण करा दिया, लेकिन उसकी ऊंचाई बहुत कम रखी। इस वजह से नाले में थोड़ा पानी आने पर ही पुलिया भरने लगी। ऐसे में पैदल और वाहनों का आवागमन प्रभावित होने लगा। इस समस्या को देखते हुए विधायक निधि से ग्रामीण अभियंत्रण विभाग ने पुलिया का दोबारा निर्माण कराया, लेकिन उसकी ऊंचाई बड़ाने की केवल खाना पूरी की गई। नतीजा यह हुआ कि इस बार बरसात में यह पुलिया टूट गई और उसके चारों तरफ पानी ही पानी हो गया।
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गत एक सप्ताह से नाले से होकर आवागमन बंद है। गांव के वीरपाल सिंह, मुल्लू सिंह, सपन कुमार सिंह, रईस पाल सिंह, नन्हे सिंह, मुरारी लाल, देव सिंह आदि ने पुलिया की मरम्मत जल्द कराने की मांग की है।
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जन सामान्य की बात
पुलिया का निर्माण जिला पंचायत से कराया गया जो दो साल में ही खराब हो गई। इससे ग्रामीणों को आवागमन में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
-वीरपाल सिंह, हरनोखा
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पुलिया में घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया था और उसे बहुत निचले स्तर पर बनाया गया। इसीलिए पुलिया ढह गई। आबादी के साथ आवागमन बढ़ने से मजबूत पुलिया बननी चाहिए।
-पवन कुमार, हरनोखा
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पुलिया क्षतिग्रस्त होने के बाद ग्रामीणों को कौमी गांव होकर तहसील और जिला मुख्यालय जाना पड़ रहा है। प्रशासन क्षतिग्रस्त पुलिया का निर्माण जल्द कराए, वरना दिक्कतें बढ़ेंगी।
-राजीव यादव, हरनोखा
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पुलिया मानक के अनुसार बनी होती तो इतनी जल्दी खराब नहीं होती। इसी मार्ग से होकर आसपास के तमाम गांवों के लोगों का आना-जाना लगा रहता है। इसलिए नई पुलिया जल्द बनाई जाए।
-सुनील सिंह, हरनोखा
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ग्राम प्रधान की बात
पुलिया टूट जाने से परमवीर चक्र विजेता नायक जदुनाथ सिंह के गांव खजुरी ओर दूसरी ओर बदायूं जनपद के उसावां कस्बे तक सीधा सड़क संपर्क टूट गया है। लोग लौट कर बारा कलां या फिर कौमी गांव होकर आते-जाते हैं। इसमें लोगों का अतिरिक्त समय और धन खर्च हो रहा है। ग्राम पंचायत के पास पुलिया बनवाने भर को बजट नहीं है।
-मोरपाल सिंह, ग्राम प्रधान, हरनोखा
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हरनोखा गांव में नाले पर बनी पुलिया टूटने की सूचना मिली है। इस बारे में ग्रामीण अभियंत्रण विभाग को पत्राचार कर अवगत कराया जा रहा है। सरकारी विभागों के स्तर से होने वाले निर्माण कार्यों की पांच साल की गारंटी होती है। इसलिए पुलिया का निर्माण आरईएस के माध्यम से कराया जाएगा।
-अखिलेश कुमार त्रिपाठी, खंड विकास अधिकारी, कलान
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इन गांवों के ग्रामीणों को फिलहाल 20 से 30 किमी का फेरा लगाकर अन्य रास्तों से तहसील और जिला मुख्यालय आना-जाना पड़ रहा है।
क्षतिग्रस्त हुई पुलिया हरनोखा गांव में बहने वाले नाले पर बनाई गई थी। यह नाला आठ महीने तो सूखा रहता है, लेकिन बरसात के दिनों में उग्र रूप धारण कर लेता है। नाले से बरसाती पानी रुकनपुर गांव के पास अरिल नदी में मिल जाता है। कई दशक पहले जब सड़क और पुलिया की व्यवस्था नहीं थी तो ग्रामीण अपनी व्यवस्थाओं से किसी तरह नाला पार करते थे।
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बाद में जिला पंचायत ने ग्राम बम्हौरा से हरनोखा तक खड़ंजा डाला तो नाले पर पुलिया की जरूरत महसूस हुई। जिला पंचायत ने पुलिया का निर्माण करा दिया, लेकिन उसकी ऊंचाई बहुत कम रखी। इस वजह से नाले में थोड़ा पानी आने पर ही पुलिया भरने लगी। ऐसे में पैदल और वाहनों का आवागमन प्रभावित होने लगा। इस समस्या को देखते हुए विधायक निधि से ग्रामीण अभियंत्रण विभाग ने पुलिया का दोबारा निर्माण कराया, लेकिन उसकी ऊंचाई बड़ाने की केवल खाना पूरी की गई। नतीजा यह हुआ कि इस बार बरसात में यह पुलिया टूट गई और उसके चारों तरफ पानी ही पानी हो गया।
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गत एक सप्ताह से नाले से होकर आवागमन बंद है। गांव के वीरपाल सिंह, मुल्लू सिंह, सपन कुमार सिंह, रईस पाल सिंह, नन्हे सिंह, मुरारी लाल, देव सिंह आदि ने पुलिया की मरम्मत जल्द कराने की मांग की है।
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जन सामान्य की बात
पुलिया का निर्माण जिला पंचायत से कराया गया जो दो साल में ही खराब हो गई। इससे ग्रामीणों को आवागमन में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
-वीरपाल सिंह, हरनोखा
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पुलिया में घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया था और उसे बहुत निचले स्तर पर बनाया गया। इसीलिए पुलिया ढह गई। आबादी के साथ आवागमन बढ़ने से मजबूत पुलिया बननी चाहिए।
-पवन कुमार, हरनोखा
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पुलिया क्षतिग्रस्त होने के बाद ग्रामीणों को कौमी गांव होकर तहसील और जिला मुख्यालय जाना पड़ रहा है। प्रशासन क्षतिग्रस्त पुलिया का निर्माण जल्द कराए, वरना दिक्कतें बढ़ेंगी।
-राजीव यादव, हरनोखा
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पुलिया मानक के अनुसार बनी होती तो इतनी जल्दी खराब नहीं होती। इसी मार्ग से होकर आसपास के तमाम गांवों के लोगों का आना-जाना लगा रहता है। इसलिए नई पुलिया जल्द बनाई जाए।
-सुनील सिंह, हरनोखा
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ग्राम प्रधान की बात
पुलिया टूट जाने से परमवीर चक्र विजेता नायक जदुनाथ सिंह के गांव खजुरी ओर दूसरी ओर बदायूं जनपद के उसावां कस्बे तक सीधा सड़क संपर्क टूट गया है। लोग लौट कर बारा कलां या फिर कौमी गांव होकर आते-जाते हैं। इसमें लोगों का अतिरिक्त समय और धन खर्च हो रहा है। ग्राम पंचायत के पास पुलिया बनवाने भर को बजट नहीं है।
-मोरपाल सिंह, ग्राम प्रधान, हरनोखा
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हरनोखा गांव में नाले पर बनी पुलिया टूटने की सूचना मिली है। इस बारे में ग्रामीण अभियंत्रण विभाग को पत्राचार कर अवगत कराया जा रहा है। सरकारी विभागों के स्तर से होने वाले निर्माण कार्यों की पांच साल की गारंटी होती है। इसलिए पुलिया का निर्माण आरईएस के माध्यम से कराया जाएगा।
-अखिलेश कुमार त्रिपाठी, खंड विकास अधिकारी, कलान