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सन 1992 की वो खौफनाक शाम: बढ़ाई गांव में 21 लोगों ने चार घंटे की थी अंधाधुंध फायरिंग, अदालत ने 10 को सुनाई उम्रकैद

Fri, 01 Jul 2022 06:51 PM IST
प्रशांत कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहांपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहांपुर Published by: प्रशांत कुमार Updated Fri, 01 Jul 2022 06:51 PM IST
सार

साल 1992 के फरवरी महीने की 24 को बढ़ाई गांव गोलियां की गूंज से थर्रा उठा था। चार घंटे तक हुई फायरिंग से इलाके के लोग ही नहीं बल्कि आसपास के गांवों में भी दहशत का माहौल था। 

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Jalalabad Shahjahanpur murder 1992 Court sentenced life imprisonment
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

जलालाबाद थाना क्षेत्र के गांव बढ़ाई में 24 फरवरी 1992 को 21 लोगों ने चार घंटे तक फायरिंग की थी। गोली लगने से कल्पू सिंह की मौके पर ही मौत हो गई थी। इसके अलावा दो लोग घायल हो गए थे। 30 साल बाद अपर सत्र न्यायालय के जज सिद्धार्थ वागव ने दस दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। मुकदमा चलने के दौरान दस आरोपियों की मौत हो गई थी। वहीं एक नाबालिग आरोपी की पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड भेजी गई है। एडीजीसी श्रीपाल वर्मा ने बताया कि 25 फरवरी 1992 को बढ़ाई गांव निवासी नर सिंह पुत्र गूजर ने जलालाबाद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

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एफआईआर में नर सिंह ने लिखाया था कि पुरानी रंजिश में 24 फरवरी की शाम करीब चार बजे गांव के रहने वाले चंद्रपाल, परशुराम, साधु,  सुखराम, रघुवीर, जसवीर, श्रीराम, बसंत, एक नाबालिग आरोपी, पुत्तू, मुकेश, रामनाथ, रामलाल, इरमान, कृष्णपाल, सिपट्टर, बरेली के फरीदपुर के गांव मनपुरा के रहने वाले सोनेपाल, ओमेंद्र और छह-सात अन्य लोग असलहे लेकर आ गए। 


 
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घर के बाहर फायरिंग करने से नर सिंह के चाचा कल्पू की मौके पर ही मौत हो गई। गांव के नौरंग और मुन्नालाल फायरिंग और मारपीट में घायल हो गए। पुलिस की जांच में बादाम, राजवीर और सत्यपाल के नाम सामने आए। पुलिस ने 21 लोगों के खिलाफ चार्जशीट अदालत में भेजी। मुकदमे के दौरान परशुराम, सुखराम, श्रीराम, बसंत, पुत्तू, मुकेश, रामलाल, रामनाथ, इरमान, कृष्णपाल की मौत हो गई। सरकारी वकील श्रीपाल वर्मा के तर्कों से सहमत होकर और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने चंद्रपाल, साधु, रघुवीर, जसवीर, सिपट्टर, सोनेपाल, ओमेंद्र, बादाम, राजवीर और सत्यपाल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।  

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