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जी-तोड़ मेहनत के बूते क्रिकेटर बनकर पिता का अधूरा ख्वाब पूरा करेंगी इशिता

Fri, 22 Apr 2022 12:34 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 22 Apr 2022 12:34 AM IST
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Ishita will fulfill her father's unfulfilled dream by becoming a cricketer
शाहजहांपुर में क्रिकेट खेलती इशिता जैन । संवाद - फोटो : SHAHJAHANPUR
आले नबी
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शाहजहांपुर। संजय जैन ने कभी देश के लिए क्रिकेट खेलने का ख्वाब देखा था। लेकिन उनकी इच्छा परिस्थितियों के दबाव में अधूरी रह गई। फिर घर में बेटी पैदा हुई तो संजय ने ठान लिया कि उनका अधूरा ख्वाब अब बिटिया ही पूरा करेगी। टीम इंडिया में खेलने का सपना पूरा करने के लिए महज 11 साल की इशिता पूरे मनोयोग से जुटी हुई हैं। पिता सुबह चार बजे उठकर बेटी को अभ्यास कराकर मजबूत कर रहे हैं। इशिता का अगला पड़ाव लखनऊ या बंगलूरू की क्रिकेट एकेडमी में प्रवेश पाना है।
कृभको फर्टिलाइजर के एजीएम संजय जैन और रिलायंस थर्मल पॉवर की स्टोर हेड मिल्की शर्मा जैन की बेटी इशिता जैन दून इंटरनेशनल स्कूल में कक्षा सात की छात्रा है। जैन दंपती रिलायंस थर्मल पॉवर की टाउनशिप में रहते हैं। उनकी बेटी इशिता का सपना है कि भारतीय क्रिकेट महिला टीम में शामिल होकर देश के लिए खेले। इस ख्वाहिश को पूरा करने में इशिता पूरी शिद्दत के साथ लगी हैं। इशिता बताती हैं कि उनके पिता संजय जैन क्रिकेटर बनना चाहते थे। उस समय क्रिकेट में इतना अच्छा कॅरियर न होने के कारण दादा ने इंजीनियरिंग पर जोर दिया। पिता की इच्छा के कारण संजय ने अपने सपनों की तिलांजलि दे दी। अब बेटी को टीम इंडिया में खेलने की ख्वाहिश को पूरा करना चाहते हैं।
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सुबह चार बजे से शुरू होती ट्रेनिंग
जिलास्तरीय क्रिकेटर होने के चलते संजय बेटी को बल्लेबाजी का अभ्यास खुद ही कराते हैं। स्पिन और पेसर का किस तरह से सामना करना है, इसके टिप्स संजय बेटी इशिता का देते हैं। इशिता बताती हैं कि पापा के इतने व्यस्त शेड्यूल होने के बावजूद वह सुबह चार बजे उठ जाते हैं। घर में बनी पिच पर बल्लेबाजी का अभ्यास कराने के बाद फिटनेस के अन्य टिप्स भी देते हैं। शाम को भी उनकी निगरानी में अभ्यास करते हैं।
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लड़कों संग खेलते हुए बन गईं अच्छी खिलाड़ी
इशिता की उम्र जब पांच वर्ष थी, तब वह लड़कों को क्रिकेट खेलते हुए देखती थी। एक दिन उसने खेलने का अनुरोध किया तो लड़कों ने मना कर दिया। काफी जिद करने के बाद उसे भी मौका मिला। लगातार अभ्यास करने से वह एक अच्छी खिलाड़ी बन गईं।
जिलास्तरीय ट्रायल में दिखाई थी बल्लेबाजी की धमक
पिछले वर्ष कृभको फर्टिलाइजर में हुए जिलास्तरीय ट्रायल में इशिता जैन ने अपनी बल्लेबाजी का नमूना पेश किया था। इशिता बताती हैं कि ट्रायल के दौरान तेज गेंदबाजी को देखकर थोड़ा डर लगा था। फिर ठान लिया कि डरना नहीं है, सामना करना है। उसकी बल्लेबाजी देखकर आयोजकों ने भी उसकी सराहना की थी।

बेटी को क्रिकेट एकेडमी में भेजने की इच्छा
मूलरूप से राजस्थान के अजमेर के रहने वाले संजय जैन और इशिता जैन अपनी बेटी में क्रिकेट के जुनून को देखते हुए खेल में ही उसका कॅरियर देख रहे हैं। वह अपनी बेटी को क्रिकेट एकेडमी में प्रवेश दिलाना चाहते हैं। मिल्की शर्मा जैन बताती हैं कि कोरोना संक्रमण के कारण अभी तक एकेडमी बंद थी। उनका प्रयास है कि लखनऊ या बंगलूरू की एकेडमी में इशिता को प्रवेश दिलाया जाए। हालांकि, यूपी की टीम के लिए होने वाले जिला स्तरीय ट्रायल के लिए भी आवेदन किया है।
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