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Shahjahanpur News: बंदर के हमले में जीने से गिरे पुस्तक व्यापारी की मौत
Fri, 25 Oct 2024 02:21 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Fri, 25 Oct 2024 02:21 AM IST
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इमरान उर्फ जमाल का फाइल फोटो। स्रोत: परिजन
शाहजहांपुर। शहर के मोहल्ला बंगश निवासी मोहम्मद इमरान उर्फ जमाल (38) के ऊपर बंदर ने हमला कर दिया। इससे इमरान जीने से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। बुधवार की रात बरेली में उन्होंने दम तोड़ दिया।
जनता इंटर कॉलेज के सामने किताबों की दुकान चलाने वाले मोहम्मद इमरान उर्फ जमाल के मकान में 13 अक्तूबर को बंदरों ने पानी की टंकी खोल दी थी। बंदरों का झुंड चला गया तो सुबह करीब पौने आठ बजे इमरान जीने से छत की ओर बढ़े। अचानक छिपे बैठे बंदर ने उनके ऊपर हमला कर दिया। उससे बचने के लिए दरवाजा बंद करने के दौरान अचानक पैर फिसल गया और वह लड़खड़ा कर जीने से नीचे गिर गए। करीब पांच सीढि़यों से गिरने के बाद उनका सिर दीवार से टकरा गया। परिजनों ने उनका सीटी स्कैन कराया। फिर राजकीय मेडिकल काॅलेज लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टर ने रेफर कर दिया। बरेली के अस्पताल में उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
डॉक्टर पर डराने और बिल बढ़ाने का लगाया आरोप
परिजनों ने इमरान को बरेली के निजी अस्पताल में भर्ती कराया। बड़े भाई डॉ. इस्लाम ने बताया कि डॉक्टर ने तीन दिन में स्थिति सामान्य होने का आश्वासन दिया था। 24 घंटे के बाद हाथ खड़े कर दिए। कहा कि आंख की पुतली फैल रही है। ऑपरेशन करना जरूरी है। परिजन की सहमति के बाद ऑपरेशन कर ढाई से तीन लाख रुपये का बिल बनाया। इसके बाद आयुष्मान कार्ड लगाकर उपचार कराया। फिर भी विभिन्न जांचों के नाम पर परिवार के लोगों से रुपये लिए गए। इसकी कोई स्लिप भी नहीं दी गई। बरेली में पांच दिन उपचार के बाद बुधवार को इमरान जिंदगी से हार गए।
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कच्ची गृहस्थी थी, परिवार पर टूटा मुसीबतों का पहाड़
-इकरार अहमद के चार पुत्र मोहम्मद इस्लाम, रिजवान व डॉ. फुरकान व इमरान उर्फ जमाल थे। सबसे छोटे जमाल किताबों की दुकान चलाते थे। उनकी अभी कच्ची गृहस्थी है। पत्नी गजाला के अलावा नौ साल का बेटा हम्माद और सात वर्षीय बेटी अफीफा है। इमरान की मौत से गजाला पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
होंठ कटे बंदर का आतंक, लोगों को काट रहा
पूरे शहर में बंदरों का आतंक है। इनसे बचने के लिए लोगों ने अपने घरों में जाल लगवा लिए हैं। दहशत के चलते बच्चों को छत तक पर जाने नहीं देते हैं। बंगश क्षेत्र में होंठ कटे बंदर का आतंक है। इमरान के भाई ने बताया कि यह बंदर कई लोगों पर हमला कर चुका है। कुछ दिन पहले यूनुसखेल मोहल्ले के फहमीन पर हमला करने पर पैर व हाथ में फ्रैक्चर हो गया था। उनके ऊपर भी एक बार हमला किया, लेकिन वह बच गए थे। बंदरों को पकड़ने के लिए पूर्व में नगर निगम ने अभियान चलाया था, लेकिन कुछ दिन के बाद बंद कर दिया गया। ऐसे में लोगों को बंदरों से छुटकारा नहीं मिल पा रहा है।
नगर निगम के घेराव की चेतावनी
-कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष फुरकान अहमद कुरैशी ने बंदर के हमले से इमरान उर्फ जमाल की मौत पर नगर निगम की लापरवाही बताई। उन्होंने कहा कि बंदरों को पकड़वाने के लिए कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इसी तरह सांड़ भी हादसे का सबब बन रहे हैं। इन समस्याओं को लेकर पार्टी खामोश नहीं बैठेगी। नगर निगम का घेराव कर प्रदर्शन किया जाएगा।
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जनता इंटर कॉलेज के सामने किताबों की दुकान चलाने वाले मोहम्मद इमरान उर्फ जमाल के मकान में 13 अक्तूबर को बंदरों ने पानी की टंकी खोल दी थी। बंदरों का झुंड चला गया तो सुबह करीब पौने आठ बजे इमरान जीने से छत की ओर बढ़े। अचानक छिपे बैठे बंदर ने उनके ऊपर हमला कर दिया। उससे बचने के लिए दरवाजा बंद करने के दौरान अचानक पैर फिसल गया और वह लड़खड़ा कर जीने से नीचे गिर गए। करीब पांच सीढि़यों से गिरने के बाद उनका सिर दीवार से टकरा गया। परिजनों ने उनका सीटी स्कैन कराया। फिर राजकीय मेडिकल काॅलेज लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टर ने रेफर कर दिया। बरेली के अस्पताल में उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
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डॉक्टर पर डराने और बिल बढ़ाने का लगाया आरोप
परिजनों ने इमरान को बरेली के निजी अस्पताल में भर्ती कराया। बड़े भाई डॉ. इस्लाम ने बताया कि डॉक्टर ने तीन दिन में स्थिति सामान्य होने का आश्वासन दिया था। 24 घंटे के बाद हाथ खड़े कर दिए। कहा कि आंख की पुतली फैल रही है। ऑपरेशन करना जरूरी है। परिजन की सहमति के बाद ऑपरेशन कर ढाई से तीन लाख रुपये का बिल बनाया। इसके बाद आयुष्मान कार्ड लगाकर उपचार कराया। फिर भी विभिन्न जांचों के नाम पर परिवार के लोगों से रुपये लिए गए। इसकी कोई स्लिप भी नहीं दी गई। बरेली में पांच दिन उपचार के बाद बुधवार को इमरान जिंदगी से हार गए।
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कच्ची गृहस्थी थी, परिवार पर टूटा मुसीबतों का पहाड़
-इकरार अहमद के चार पुत्र मोहम्मद इस्लाम, रिजवान व डॉ. फुरकान व इमरान उर्फ जमाल थे। सबसे छोटे जमाल किताबों की दुकान चलाते थे। उनकी अभी कच्ची गृहस्थी है। पत्नी गजाला के अलावा नौ साल का बेटा हम्माद और सात वर्षीय बेटी अफीफा है। इमरान की मौत से गजाला पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
होंठ कटे बंदर का आतंक, लोगों को काट रहा
पूरे शहर में बंदरों का आतंक है। इनसे बचने के लिए लोगों ने अपने घरों में जाल लगवा लिए हैं। दहशत के चलते बच्चों को छत तक पर जाने नहीं देते हैं। बंगश क्षेत्र में होंठ कटे बंदर का आतंक है। इमरान के भाई ने बताया कि यह बंदर कई लोगों पर हमला कर चुका है। कुछ दिन पहले यूनुसखेल मोहल्ले के फहमीन पर हमला करने पर पैर व हाथ में फ्रैक्चर हो गया था। उनके ऊपर भी एक बार हमला किया, लेकिन वह बच गए थे। बंदरों को पकड़ने के लिए पूर्व में नगर निगम ने अभियान चलाया था, लेकिन कुछ दिन के बाद बंद कर दिया गया। ऐसे में लोगों को बंदरों से छुटकारा नहीं मिल पा रहा है।
नगर निगम के घेराव की चेतावनी
-कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष फुरकान अहमद कुरैशी ने बंदर के हमले से इमरान उर्फ जमाल की मौत पर नगर निगम की लापरवाही बताई। उन्होंने कहा कि बंदरों को पकड़वाने के लिए कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इसी तरह सांड़ भी हादसे का सबब बन रहे हैं। इन समस्याओं को लेकर पार्टी खामोश नहीं बैठेगी। नगर निगम का घेराव कर प्रदर्शन किया जाएगा।