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जलालाबाद में तेज मोड़ से संकेतक नदारद, बगैर रेफ्लेक्टर दौड़ रहीं ट्रॉलियां

Sat, 27 Nov 2021 01:18 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 27 Nov 2021 01:18 AM IST
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जलालाबाद का बिना संकेतक वाला कोला मोड़ । संवाद - फोटो : SHAHJAHANPUR
जलालाबाद। सर्दी बढ़ने के साथ ही रात में कोहरे की भी शुरुआत हो गई है। यातायात के लिहाज से इस मौसम में अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है। ऐसे में सड़कों तथा हाईवे पर तीखे मोड़, संकरे रास्तों, दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र या फिर गांव आदि को कटने वाले रास्ते से पहले संकेतक होने पर संभावित दुर्घटना को काफी हद तक रोका जा सकता है।
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करीब एक सप्ताह से कोहरा पड़ने की शुरुआत हो चुकी है, परंतु कई ऐसे स्थान जो आवागमन के लिहाज से खतरनाक है, परंतु वहां कोई संकेतक आदि नहीं लगाया है। इससे खासकर रात में लोगों के सफर की राह मुश्किल भरी होने से इनकार नहीं किया जा सकता। चेकिंग के नाम पर केवल खानापूर्ति होने के कारण बिना रिफ्लेक्टर वाली ट्रालियां और अपनी उम्र पूरी कर चुके कंडम वाहनों का धड़ल्ले से दौड़ना भी रोड हादसों का सबब बनता है।
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खतरनाक है बझेड़ा वाली पुलिया
आवागमन के लिहाज से पहले से ही खतरनाक बझेड़ा वाली पुलिया बरेली-फर्रुखाबाद बरेली हाईवे पर नगर से करीब तीन किलोमीटर दूर अल्हागंज की तरफ है। ब्रिटिशकालीन यह पुलिया सिंगल लेन होने के साथ इसकी रेलिंग भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त है। इसके निचले हिस्से को कई बार मरम्मत करके कामचलाऊ बनाया है। पुलिया के दोनों तरफ लगाए संकेतक में से कुछ काफी पहले उखड़ गए। कुछ क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, परंतु उन्हें दोबारा लगाने की जरूरत नहीं समझी गई। पुलिया से होकर एक बार में एक ही वाहन निकल पाता है। यहां अक्सर जाम लगने की भी समस्या बनी रहती है।
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हाईवे से जुड़े कई और मोड़ है संकेतक विहीन
बरेली-फर्रुखाबाद हाईवे से बदायूं जाने वाले रोड से पहले कोला मोड़, बुधुआना को जाने वाले रास्ते से पहले सरैंया मोड़ के अलावा हाईवे से शाहजहांपुर को जाने वाला रोड का याकूबपुर तिराहे के पास जुड़ाव है। सभी स्थानों पर कसंकेतक नहीं लगा है। जबकि बरेली से फर्रुखाबाद व बदायूं जाने वाले तथा शाहजहांपुर से इन्हीं रास्तों पर हरदोई जनपद की तरफ से आकर बरेली तथा शाहजहांपुर जाने वाले वाहनों की खासी तादाद है। वाहनों का याकूबपुर तिराहा से होकर ही निकलना होता है। हर समय वाहनों की अधिकता रहने के कारण इस तिराहे के आसपास दुर्घटना होना आम बात है।

बिना रिफ्लेक्टर वाले वाहनों पर नहीं प्रतिबंध
रेता व मिट्टी खनन में लगी ट्रॉलियां अक्सर रात के अंधेरे या सुबह तड़के सबसे ज्यादा तादाद में रोड पर दौड़ती नजर आती हैं। अधिकांश ट्रॉलियों में रिफ्लेक्टर नहीं लगा होता है। कंडम हो चुके बड़े वाहन भी खासी तादाद में बेरोकटोक रोड पर चल रहे हैं। सर्दी के मौसम में इस तरह के वाहनों से दुर्घटना होने की आशंका और बढ़ जाती है। इस ओर ध्यान नहीं दिया जाता। काफी दिनों से छुट्टा पशुओं की तादाद बढ़ गई है। रात में यह पशु हाईवे या सड़कों पर ही टहलते रहते हैं या झुंड बनाकर बैठ जाते हैं। कई बार पशुओं का झुंड अचानक हाईवे पर आने दुर्घटना का सबब बन जाता है।
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