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आयकर विभाग के अफसरों का गल्ला मंडी में छापा
शाहजहांपुर, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 18 Mar 2017 12:05 AM IST
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छापा
- फोटो : शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश
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नोटबंदी के दौरान 31 दिसंबर तक बैंकों में जमा किए गए पांच सौ और एक हजार के नोटों के स्रोत की जांच के लिए आयकर विभाग के अधिकारियों ने शुक्रवार को बहादुरगंज गल्ला मंडी में आटा और दालों के थोक कारोबारियों के दो प्रमुख प्रतिष्ठानों पर एक साथ छापा मारा। अफसरों की दोनों टीमों ने आयकर आयुक्त वृंदा देसाई के नेतृत्व में सुबह 11 बजे से शाम तक अभिलेखों और स्टॉक को चेक किया। इस दौरान व्यापारी नेताओं ने नोटिस में पांच दिन का समय दिए जाने के बावजूद व्यवसायिक प्रतिष्ठानों का सर्वे करने पर आयकर आयुक्त से आपत्ति जताई।
गल्ला मंडी में दालों के थोक व्यापारी प्रभाकर गुप्ता का प्रतिष्ठान है। इसी तरह बहादुरगंज में ही जेल रोड तिराहे पर उनके परिवार के अरुण गुप्ता आटा, वनस्पति आदि का थोक कारोबार करते हैं। भारी पुलिस फोर्स के साथ दिन में करीब साढ़े 11 बजे गल्ला मंडी पहुंचे आयकर अधिकारियों ने दोनों प्रतिष्ठानों को जांच के दायरे में ले लिया। पुलिस के साथ अफसरों को आया देख मंडी के व्यापारियों में हड़कंप मच गया।
व्यापारियों की सूचना पर कुछ ही देर में व्यापार मंडल कंछल गुट के जिलाध्यक्ष वेदप्रकाश गुप्ता, नगर अध्यक्ष सचिन बाथम, प्रदेश मंत्री नारायण दास अग्रवाल, मनोज खन्ना, अमित शर्मा, कंचन गुप्ता आदि गल्ला मंडी पहुंच गए। जांच कार्रवाई का नेतृत्व कर रहीं आयकर आयुक्त वृंदा देसाई और आयकर अधिकारी वीएस मीणा ने व्यापारी नेताओं को बताया कि दोनों प्रतिष्ठानों ने गत वर्ष आठ नवंबर को नोटबंदी लागू होने के बाद से 31 दिसंबर तक बैंकों में जो धनराशि जमा कराई है, उसका अभिलेखों से मिलान किया जा रहा है।
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इसके लिए अधिकारियों ने दोनों फर्मों के संचालकों से लक्षित अवधि में जमा कराई रकम के बैंक स्टेटमेंट, डे बुक, कैश बुक आदि तलब कर लिए। अरुण कुमार की फर्म के संचालकों ने जरूरी अभिलेख उपलब्ध करा दिए, लेकिन दाल व्यवसायी प्रभाकर गुप्ता के कारोबारी सिलसिले में बाहर होने पर उनका बेटा मांगे गए कागजात नहीं दिखा सका। अफसरों ने दाल प्रतिष्ठान पर मौजूद स्टाफ से सख्त रवैया अपनाया तो वहां खड़े व्यापारी नेताओं ने तार्किक तरीके से इसका विरोध करना शुरू कर दिया।
व्यापारी नेता बाथम ने आयकर अधिकारी से कहा कि नोटबंदी के बाद जमा कराई रकम का विवरण मांगे जाने के विभाग से जारी नोटिस दोेनों प्रतिष्ठान संचालकों को आज ही प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि नोटिस में वांछित विवरण देने के लिए पांच दिन का समय भी दिया गया है। अभी वित्त वर्ष समाप्त होने में दस दिन से ज्यादा वक्त भी है। इसलिए सर्वे की कार्रवाई का अभी कोई औचित्य नहीं बनता। अफसरों ने व्यापारियों को आश्वस्त किया कि जांच के नाम पर किसी का अनावश्यक उत्पीड़न नहीं किया जाएगा।
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गल्ला मंडी में दालों के थोक व्यापारी प्रभाकर गुप्ता का प्रतिष्ठान है। इसी तरह बहादुरगंज में ही जेल रोड तिराहे पर उनके परिवार के अरुण गुप्ता आटा, वनस्पति आदि का थोक कारोबार करते हैं। भारी पुलिस फोर्स के साथ दिन में करीब साढ़े 11 बजे गल्ला मंडी पहुंचे आयकर अधिकारियों ने दोनों प्रतिष्ठानों को जांच के दायरे में ले लिया। पुलिस के साथ अफसरों को आया देख मंडी के व्यापारियों में हड़कंप मच गया।
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व्यापारियों की सूचना पर कुछ ही देर में व्यापार मंडल कंछल गुट के जिलाध्यक्ष वेदप्रकाश गुप्ता, नगर अध्यक्ष सचिन बाथम, प्रदेश मंत्री नारायण दास अग्रवाल, मनोज खन्ना, अमित शर्मा, कंचन गुप्ता आदि गल्ला मंडी पहुंच गए। जांच कार्रवाई का नेतृत्व कर रहीं आयकर आयुक्त वृंदा देसाई और आयकर अधिकारी वीएस मीणा ने व्यापारी नेताओं को बताया कि दोनों प्रतिष्ठानों ने गत वर्ष आठ नवंबर को नोटबंदी लागू होने के बाद से 31 दिसंबर तक बैंकों में जो धनराशि जमा कराई है, उसका अभिलेखों से मिलान किया जा रहा है।
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इसके लिए अधिकारियों ने दोनों फर्मों के संचालकों से लक्षित अवधि में जमा कराई रकम के बैंक स्टेटमेंट, डे बुक, कैश बुक आदि तलब कर लिए। अरुण कुमार की फर्म के संचालकों ने जरूरी अभिलेख उपलब्ध करा दिए, लेकिन दाल व्यवसायी प्रभाकर गुप्ता के कारोबारी सिलसिले में बाहर होने पर उनका बेटा मांगे गए कागजात नहीं दिखा सका। अफसरों ने दाल प्रतिष्ठान पर मौजूद स्टाफ से सख्त रवैया अपनाया तो वहां खड़े व्यापारी नेताओं ने तार्किक तरीके से इसका विरोध करना शुरू कर दिया।
व्यापारी नेता बाथम ने आयकर अधिकारी से कहा कि नोटबंदी के बाद जमा कराई रकम का विवरण मांगे जाने के विभाग से जारी नोटिस दोेनों प्रतिष्ठान संचालकों को आज ही प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि नोटिस में वांछित विवरण देने के लिए पांच दिन का समय भी दिया गया है। अभी वित्त वर्ष समाप्त होने में दस दिन से ज्यादा वक्त भी है। इसलिए सर्वे की कार्रवाई का अभी कोई औचित्य नहीं बनता। अफसरों ने व्यापारियों को आश्वस्त किया कि जांच के नाम पर किसी का अनावश्यक उत्पीड़न नहीं किया जाएगा।