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Shahjahanpur News: कई स्कूलों में मिट्टी के चूल्हे पर बनाना पड़ रहा मिड डे मील

Sun, 05 Apr 2026 01:36 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 05 Apr 2026 01:36 AM IST
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In many schools, Mid-Day Meals have to be prepared on earthen stoves.
निगोही के गांव भुंडी में गोबर के कंडों से खाना बनातीं रसोइया। संवाद
शाहजहांपुर। गैस संकट का दंश सरकारी शिक्षकों को भी झेलना पड़ रहा है। सिलिंडर के अभाव में बेसिक के विद्यालयों में मध्याह्न भोजन (एमडीएम) का संकट खड़ा हो रहा है। पहले आसानी से सिलिंडर गांव तक पहुंच जाता था लेकिन अब शिक्षकों को एजेंसी में लाइन में लगकर लेना पड़ रहा है। वहीं, कुछ स्कूलों में सिलिंडर के अभाव में मिट्टी के चूल्हे पर एमडीएम पकाया जा रहा है।
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जिले में लगभग 32 सौ परिषदीय विद्यालय हैं। सभी विद्यालयों के पास गैस कनेक्शन हैं। गैस संकट गहराने के बाद शिक्षकों को भी सिलिंडर प्राप्त करने में खासी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। पहले सिलिंडर आसानी से स्कूल तक आ जाते थे। अब शिक्षकों को एजेंसी में लाइन में लगकर सिलिंडर लेना पड़ रहा है। इसके बाद ढोकर स्कूल लाना पड़ता है। ढिलाई करने पर सिलिंडर खत्म होने से मध्याह्न भोजन लकड़ी-कंडे से चूल्हे पर पकाना पड़ता है।
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ऐसा ही हाल निगोही के गांव भुंडी के प्राथमिक विद्यालय का है। विद्यालय में सिलिंडर न होने के कारण पिछले 15 दिनों से रसोइया चूल्हे पर मध्याह्न भोजन बना रही हैं। रसोइया ने बताया कि 15 दिनों से गोबर के कंडों से खाना बनाने में बहुत समस्या आ रही है। प्रधान अध्यापिका रजनी ने बताया कि गैस एजेंसी संचालक से इस संबंध में कहा गया है। जल्द सिलिंडर उपलब्ध हो जाएगा।
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प्राथमिक शिक्षक संघ के मीडिया प्रभारी राजकुमार तिवारी ने बताया कि पूर्व में सिलिंडर आसानी से मिल जाते थे। अब बुकिंग कराने के लिए एजेंसी पर लाइन लगानी पड़ती है। इससे समय भी खराब होता है और दिक्कत का सामना करना पड़ता है। वहीं, रसोइया वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष ब्रह्मकुमार ने बताया कि जिले के बहुत से विद्यालयों में मिड-डे-मील चूल्हे पर बन रहा है। सिलिंडर मिल ही नहीं पा रहे हैं। जिनके कागज पूरे हैं, उन्हें ही सिलिंडर मिल पा रहा है। दूसरी तरफ लकड़ी भी सूखी नहीं मिल रही है।

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छात्र संख्या लिखकर देने पर सिलिंडर उपलब्ध कराया जा रहा है। स्कूलों में सिलिंडर को लेकर कहीं पर दिक्कत नहीं है। सभी जगह पर गैस चूल्हे पर ही खाना बन रहा है।
-सुरेंद्र मौर्या, बीईओ मुख्यालय
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