{"_id":"676713e471b5a5d9e10cdd54","slug":"i-have-been-at-work-for-a-long-time-as-if-i-am-alive-in-your-name-shahjahanpur-news-c-122-1-sbly1036-134030-2024-12-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shahjahanpur News: एक मुद्दत से अपने काम पर हूं, जैसे जिंदा ही तेरे नाम पर हूं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shahjahanpur News: एक मुद्दत से अपने काम पर हूं, जैसे जिंदा ही तेरे नाम पर हूं
Sun, 22 Dec 2024 12:45 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Sun, 22 Dec 2024 12:45 AM IST
विज्ञापन
शाहजहांपुर। तुलसी-मीर फाउंडेशन की ओर से शनिवार शाम राजीव भवन में कवि सम्मेलन और मुशायरा का आयोजन किया गया। एक शाम शहीदों के नाम आयोजित कार्यक्रम में रात तक कवियों और शायरों ने अपनी रचनाएं पेश कर श्रोताओं को ताली बजाने पर मजबूर कर दिया।
संस्था के संरक्षक और कवि ज्ञानेंद्र मोहन ज्ञान ने अध्यक्षता करते हुए सुनाया-पंख जले तो जल जाने दो, लौ के ऊपर नाचो तो जीने का आनंद मिलेगा। सुनीत वाजपेयी ने प्राण गंवाकर हमने पाई थी जो अब वह शान कहां, विश्व पटल के मानचित्र पर पहले जैसा मान कहां सुनाकर वाहवाही बटोरी। पल्लवी मिश्रा ने सुनाया-अब तेरे दिल पर वार नहीं हो पाएगा, अपना कोई परिवार नहीं हो पाएगा, प्यार को तुम व्यापार समझ कर बैठे हो, तो हमसे ये व्यापार नहीं हो पाएगा। बहराइच से आए नितेश दिव्य ने सुनाया कि खूबसूरत ये जहां लगने लगेगा लेकिन शर्त बस ये है कि तू अपना नजरिया बदले। लखनऊ से आईं रुबीना अयाज ने एक मुद्दत से अपने काम पर हूं, जैसे जिंदा ही तेरे नाम पर हूं सुनाकर लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। हरदोई के सलमान जफर, पीयूष शर्मा, विकास सोनी ऋतुराज, आतिश मुरादाबादी, विकास शर्मा पारस, अभिषेक अधीर, रितेश सिंह राहिल ने भी अपनी रचनाएं पेश कीं। कार्यक्रम का शुभारंभ अशफाक उल्ला खां ने किया। संचालन इशरत सगीर का रहा। वसीम मीनाई, असगर यासिर, हमीद खिज़र, फहीम बिस्मिल, प्रमोद प्रमिल, राशिद हुसैन राही, गौरव त्रिपाठी, शाहिना खातून, फुरकान कुरैशी, अनूप वर्मा, कृष्ण विनोद मिश्रा, रिजवान सगीर आदि मौजूद रहे ।
विज्ञापन
संस्था के संरक्षक और कवि ज्ञानेंद्र मोहन ज्ञान ने अध्यक्षता करते हुए सुनाया-पंख जले तो जल जाने दो, लौ के ऊपर नाचो तो जीने का आनंद मिलेगा। सुनीत वाजपेयी ने प्राण गंवाकर हमने पाई थी जो अब वह शान कहां, विश्व पटल के मानचित्र पर पहले जैसा मान कहां सुनाकर वाहवाही बटोरी। पल्लवी मिश्रा ने सुनाया-अब तेरे दिल पर वार नहीं हो पाएगा, अपना कोई परिवार नहीं हो पाएगा, प्यार को तुम व्यापार समझ कर बैठे हो, तो हमसे ये व्यापार नहीं हो पाएगा। बहराइच से आए नितेश दिव्य ने सुनाया कि खूबसूरत ये जहां लगने लगेगा लेकिन शर्त बस ये है कि तू अपना नजरिया बदले। लखनऊ से आईं रुबीना अयाज ने एक मुद्दत से अपने काम पर हूं, जैसे जिंदा ही तेरे नाम पर हूं सुनाकर लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। हरदोई के सलमान जफर, पीयूष शर्मा, विकास सोनी ऋतुराज, आतिश मुरादाबादी, विकास शर्मा पारस, अभिषेक अधीर, रितेश सिंह राहिल ने भी अपनी रचनाएं पेश कीं। कार्यक्रम का शुभारंभ अशफाक उल्ला खां ने किया। संचालन इशरत सगीर का रहा। वसीम मीनाई, असगर यासिर, हमीद खिज़र, फहीम बिस्मिल, प्रमोद प्रमिल, राशिद हुसैन राही, गौरव त्रिपाठी, शाहिना खातून, फुरकान कुरैशी, अनूप वर्मा, कृष्ण विनोद मिश्रा, रिजवान सगीर आदि मौजूद रहे ।
विज्ञापन