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युवाओं में सांप्रदायिकता का जहर घोले जाने से आहत हैं रजा मुराद
शाहजहांपुर
Updated Tue, 24 Feb 2015 12:59 AM IST
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दमदार रोबीली आवाज और शानदार अभिनय के दम पर सिनेप्रेमियों के दिल पर राज करने वाले अभिनेता रजा मुराद युवाओं में बढ़ती नशाखोरी की प्रवृत्ति और उनमें सांप्रदायिकता का जहर से घोले जाने से काफी आहत हैं। तभी तो उन्होंने युवाओं का आह्वान किया है कि जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छता के खिलाफ अभियान चलाया है, उसी तरह युवा ड्रग्स और सांप्रदायिकता रूपी गंदगी को साफ करने के लिए महाअभियान चलाएं, जिससे हमारा राष्ट्र और प्रगति कर सके।
बॉलीवुड के चरित्र अभिनेता मुराद महमंद हद्दफ निवासी साबिर अली के पुत्रों इजलाल अली खां और शारिक अली खां के वैवाहिक कार्यक्रम में शिरकत करने आए हुए हैं। होटल सत्यम में अमर उजाला से बातचीत करते हुए रजा मुराद ने राजनीति की तरह फिल्मों के भी गिरते स्तर पर चिंता व्यक्त की। बोले: आज कलम में गिरावट आई है। अच्छे संवाद, अच्छी कहानी और अच्छे गीत लिखने वालों की कमी है। जिस तरह देश के लिए मजबूत विपक्ष की जरूरत होती है, ठीक उसी तरह फिल्मों में सशक्त विलेन की भूमिका होती है। तमाम नायक-खलनायक अच्छे संवादों के कारण ही ऊपर उठे और उनके संवाद ही उनकी पहचान बन गए। आज ऐसा नहीं है।
वर्तमान फिल्मों की कहानियों पर उनका कहना है कि जब तक दर्शक देख रहा है, तभी तक इन फिल्मों का जीवन है और जिस दिन दर्शक मुंह फेर लेगा, ऐसी फिल्में दिखनी बंद हो जाएंगी। दर्शकों के दिलों में जगह बनाने के लिए राजपाल यादव जैसा कर्मठ और जुझारू कलाकार की जरूरत है। जरूरी नहीं कि हीरो बनने के लिए छह फुट का कद और सुंदरता ही हो, राजपाल जैसा छोटे कद का आदमी भी दर्शकों के दिलों में जगह बना सकता है। उन्हें खुशी है कि शाहजहांपुर से राजपाल, बरेली से प्रियंका चोपड़ा और रामपुर से वह स्वयं बॉलीवुड में जमे हुए हैं। रजा मुराद ने बताया कि वह ‘कहां गए वो लोग’ सीरियल में अमर शहीद अशफाक उल्ला खां का किरदार निभा चुके हैं। हमें ऐसे सपूतों पर फख्र करना चाहिए।
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बॉलीवुड के चरित्र अभिनेता मुराद महमंद हद्दफ निवासी साबिर अली के पुत्रों इजलाल अली खां और शारिक अली खां के वैवाहिक कार्यक्रम में शिरकत करने आए हुए हैं। होटल सत्यम में अमर उजाला से बातचीत करते हुए रजा मुराद ने राजनीति की तरह फिल्मों के भी गिरते स्तर पर चिंता व्यक्त की। बोले: आज कलम में गिरावट आई है। अच्छे संवाद, अच्छी कहानी और अच्छे गीत लिखने वालों की कमी है। जिस तरह देश के लिए मजबूत विपक्ष की जरूरत होती है, ठीक उसी तरह फिल्मों में सशक्त विलेन की भूमिका होती है। तमाम नायक-खलनायक अच्छे संवादों के कारण ही ऊपर उठे और उनके संवाद ही उनकी पहचान बन गए। आज ऐसा नहीं है।
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वर्तमान फिल्मों की कहानियों पर उनका कहना है कि जब तक दर्शक देख रहा है, तभी तक इन फिल्मों का जीवन है और जिस दिन दर्शक मुंह फेर लेगा, ऐसी फिल्में दिखनी बंद हो जाएंगी। दर्शकों के दिलों में जगह बनाने के लिए राजपाल यादव जैसा कर्मठ और जुझारू कलाकार की जरूरत है। जरूरी नहीं कि हीरो बनने के लिए छह फुट का कद और सुंदरता ही हो, राजपाल जैसा छोटे कद का आदमी भी दर्शकों के दिलों में जगह बना सकता है। उन्हें खुशी है कि शाहजहांपुर से राजपाल, बरेली से प्रियंका चोपड़ा और रामपुर से वह स्वयं बॉलीवुड में जमे हुए हैं। रजा मुराद ने बताया कि वह ‘कहां गए वो लोग’ सीरियल में अमर शहीद अशफाक उल्ला खां का किरदार निभा चुके हैं। हमें ऐसे सपूतों पर फख्र करना चाहिए।
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