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समझकर खरीदें चकबंदी वाली जमीन के प्लाट
शाहजहांपुर
Updated Mon, 12 Jan 2015 11:47 PM IST
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मकान बनाने को शहर के आसपास प्लाट खरीदना चाह रहे हैं तो चकबंदी प्रक्रिया में शामिल की गई जमीन का टुकड़ा लेने से बचें। ऐसा नहीं करने पर बाद में तमाम दुश्वारियां खड़ी हो सकती हैं। यह अलग बात है कि विनियमित क्षेत्र के प्रभारी अधिकारी सिटी मजिस्ट्रेट की चेतावनी नजरंदाज कर कालोनाइजर ऐसी जमीनें बेचकर अपना उल्लू सीधा करने में जुटे हैं।
पुवायां रोड पर चिनौर से लेकर पैना तक, निगोही रोड पर कुष्ठ आश्रम से लेकर सतवां बुजुर्ग तक, लोधीपुर के आसपास कई स्थानों पर जमीन के सौदागर प्लाटिंग के धंधे में जुटे हैं। उन्होंने कई जगह ऐसी जमीनें बाजार रेट से कम दामों पर खरीद रखी हैं, जिनके चकबंदी क्षेत्र में शामिल होने के आसार हैं। संबंधित ग्रामीणों ने जमीन निकलती देख सस्ते दामोें पर सौदा किया तो कालोनाइजरों की बन आई। उनके प्लाट बिकने के बाद चकबंदी होने पर खरीदे गए भूखंड की मालियत बदलना तय है।
ऐसा होने पर चकबंदी कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराना होगा। निर्णय होने में कई साल लग सकते हैं और तब तक खरीददार को कब्जा भी नहीं मिलने वाला। कालोनाइजर सब कुछ समझते हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ अपना भला दिख रहा है। ऐसे ही लोगों से सचेत करने के लिए शहर से सटे गांव (अब मोहल्ला) ककरा कलां और खुर्द की दीवारों पर बेनामी पम्फलेट्स चस्पा किए गए हैं। एसडीएम जयनाथ यादव के अनुसार चकबंदी प्रक्रिया में शामिल जमीनों के सभी अभिलेख राजस्व से चकबंदी विभाग ट्रांसफर हो जाते हैं। इसलिए बाद में जमीन संबंधी सारे मामले चकबंदी महकमे से निस्तारित होते हैं।
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पुवायां रोड पर चिनौर से लेकर पैना तक, निगोही रोड पर कुष्ठ आश्रम से लेकर सतवां बुजुर्ग तक, लोधीपुर के आसपास कई स्थानों पर जमीन के सौदागर प्लाटिंग के धंधे में जुटे हैं। उन्होंने कई जगह ऐसी जमीनें बाजार रेट से कम दामों पर खरीद रखी हैं, जिनके चकबंदी क्षेत्र में शामिल होने के आसार हैं। संबंधित ग्रामीणों ने जमीन निकलती देख सस्ते दामोें पर सौदा किया तो कालोनाइजरों की बन आई। उनके प्लाट बिकने के बाद चकबंदी होने पर खरीदे गए भूखंड की मालियत बदलना तय है।
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ऐसा होने पर चकबंदी कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराना होगा। निर्णय होने में कई साल लग सकते हैं और तब तक खरीददार को कब्जा भी नहीं मिलने वाला। कालोनाइजर सब कुछ समझते हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ अपना भला दिख रहा है। ऐसे ही लोगों से सचेत करने के लिए शहर से सटे गांव (अब मोहल्ला) ककरा कलां और खुर्द की दीवारों पर बेनामी पम्फलेट्स चस्पा किए गए हैं। एसडीएम जयनाथ यादव के अनुसार चकबंदी प्रक्रिया में शामिल जमीनों के सभी अभिलेख राजस्व से चकबंदी विभाग ट्रांसफर हो जाते हैं। इसलिए बाद में जमीन संबंधी सारे मामले चकबंदी महकमे से निस्तारित होते हैं।
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