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Shahjahanpur News: अनुलोम-विलोम और प्राणायाम से हराया दिल का रोग
Sun, 29 Sep 2024 01:18 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Sun, 29 Sep 2024 01:18 AM IST
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आलोक सक्सेना। स्रोत: स्वयं
शाहजहांपुर। तनाव और अनियंत्रित दिनचर्या से हृदयाघात होने पर कई लोगों ने दिनचर्या में योग को शामिल कर लिया है। रोजाना अनुलोम-विलोम, प्रणायाम व सुबह की सैर कर दिल के रोग को उन्होंने मात दी। अब वे लोग पूरी तरह से स्वस्थ हैं। उन्हें दोबारा कोई दिक्कत नहीं हुई।
माना जाता था कि हृदय संबंधी बीमारी बुजुर्गों को ज्यादा होती है, लेकिन वर्तमान में कम उम्र के लोग भी इस बीमारी से ग्रसित हैं। डॉक्टरों की मानें तो तनाव और अनियमित खान-पान हृदयाघात का प्रमुख कारण है। एक या दो बार हृदयाघात से बचने पर दूसरा जीवन पाने वाले अधिकतर लोगों ने योग को अपनाया। योग विज्ञान केंद्र के संस्थापक डॉ. अवधेश मणि त्रिपाठी बताते हैं कि दिल की बीमारी से अनुलोम-विलोम, भ्रामरी प्राणायाम, ध्यान और कपाल भाति योग कर बचा जा सकता है। समस्या से ग्रसित होने वाले दर्जनों लोग विभिन्न स्थानों पर चलने वाले योग सेंटरों पर आते हैं।
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रेफरल यूनिट बन गया राजकीय मेडिकल कॉलेज
-राजकीय मेडिकल कॉलेज में दिल के रोग से ग्रसित मरीजों को बेहतर उपचार नहीं मिल पाता है। अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. केसी वर्मा के अतिरिक्त पांच फिजिशियन हृदय रोगियों का उपचार करते हैं। यहां पर मरीजों के लिए अलग से कॉर्डियाे यूनिट नहीं है। प्रारंभिक उपचार के बाद अधिकतर मरीजों को बरेली, लखनऊ या दिल्ली रेफर किया जाता है। अस्पताल में रोजाना 40 से 50 लोग हृदय की समस्या लेकर आते हैं। डॉक्टर बताते हैं कि वर्तमान में 24 साल उम्र के लोग भी हृदय रोग से ग्रसित होने लगे हैं।
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ये बरतें सावधानी
-छह से आठ घंटे तक सोना चाहिए। फास्टफूड से दूरी बनाएं, पांच प्रकार की सब्जी और फलों का सेवन करें। अल्कोहल और धूम्रपान से दूरी बनाएं। दूध से बने उत्पादों का सेवन कम करें। 30 मिनट तक तेज कदमों से रोजाना चलें। तनाव लेने से बचें। ब्लड प्रेशर की दवा को एकदम नहीं छोड़ें।
-डॉ. राजेश कुमार, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल काॅलेज
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योग अपनाने के बाद नहीं हुई दिक्कत
-11 सितंबर 2020 को हृदयाघात हुआ था। दो नसें ब्लॉक होने के बाद स्टंट डाले गए। इसके बाद योग को अपनाया। प्राणायाम, अनुलोम-विलोम समेत विभिन्न तरह के आसन करते हैं। अब पूरी तरह से स्वस्थ हैं।
-ललित मोहन, पूर्व प्रधानाचार्य
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योग और टहलने से मिला फायदा
हृदयाघात होने के बाद सुबह से रोजाना टहलना शुरू कर दिया। योग के आसन करते हैं। अब तो पूरी तरह से स्वस्थ हूं। योग करने से काफी ज्यादा फायदा हुआ है।
-आलोक सक्सेना, सिटी पार्क कॉलोनी
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माना जाता था कि हृदय संबंधी बीमारी बुजुर्गों को ज्यादा होती है, लेकिन वर्तमान में कम उम्र के लोग भी इस बीमारी से ग्रसित हैं। डॉक्टरों की मानें तो तनाव और अनियमित खान-पान हृदयाघात का प्रमुख कारण है। एक या दो बार हृदयाघात से बचने पर दूसरा जीवन पाने वाले अधिकतर लोगों ने योग को अपनाया। योग विज्ञान केंद्र के संस्थापक डॉ. अवधेश मणि त्रिपाठी बताते हैं कि दिल की बीमारी से अनुलोम-विलोम, भ्रामरी प्राणायाम, ध्यान और कपाल भाति योग कर बचा जा सकता है। समस्या से ग्रसित होने वाले दर्जनों लोग विभिन्न स्थानों पर चलने वाले योग सेंटरों पर आते हैं।
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रेफरल यूनिट बन गया राजकीय मेडिकल कॉलेज
-राजकीय मेडिकल कॉलेज में दिल के रोग से ग्रसित मरीजों को बेहतर उपचार नहीं मिल पाता है। अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. केसी वर्मा के अतिरिक्त पांच फिजिशियन हृदय रोगियों का उपचार करते हैं। यहां पर मरीजों के लिए अलग से कॉर्डियाे यूनिट नहीं है। प्रारंभिक उपचार के बाद अधिकतर मरीजों को बरेली, लखनऊ या दिल्ली रेफर किया जाता है। अस्पताल में रोजाना 40 से 50 लोग हृदय की समस्या लेकर आते हैं। डॉक्टर बताते हैं कि वर्तमान में 24 साल उम्र के लोग भी हृदय रोग से ग्रसित होने लगे हैं।
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ये बरतें सावधानी
-छह से आठ घंटे तक सोना चाहिए। फास्टफूड से दूरी बनाएं, पांच प्रकार की सब्जी और फलों का सेवन करें। अल्कोहल और धूम्रपान से दूरी बनाएं। दूध से बने उत्पादों का सेवन कम करें। 30 मिनट तक तेज कदमों से रोजाना चलें। तनाव लेने से बचें। ब्लड प्रेशर की दवा को एकदम नहीं छोड़ें।
-डॉ. राजेश कुमार, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल काॅलेज
योग अपनाने के बाद नहीं हुई दिक्कत
-11 सितंबर 2020 को हृदयाघात हुआ था। दो नसें ब्लॉक होने के बाद स्टंट डाले गए। इसके बाद योग को अपनाया। प्राणायाम, अनुलोम-विलोम समेत विभिन्न तरह के आसन करते हैं। अब पूरी तरह से स्वस्थ हैं।
-ललित मोहन, पूर्व प्रधानाचार्य
योग और टहलने से मिला फायदा
हृदयाघात होने के बाद सुबह से रोजाना टहलना शुरू कर दिया। योग के आसन करते हैं। अब तो पूरी तरह से स्वस्थ हूं। योग करने से काफी ज्यादा फायदा हुआ है।
-आलोक सक्सेना, सिटी पार्क कॉलोनी

आलोक सक्सेना। स्रोत: स्वयं